🪔 वैतरिणी व्रत की पूजा विधि (Step-by-Step) vaitarni vrat
- स्नान और शुद्धता:
- प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- व्रत का संकल्प:
- हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर वैतरिणी व्रत का संकल्प लें: “मैं पितरों की शांति और मोक्ष हेतु वैतरिणी व्रत करता हूँ।”
- पूजन सामग्री:
- तुलसी पत्र, काले तिल, सफेद वस्त्र, दीपक, धूप, नैवेद्य, जल पात्र, पंचामृत, पितृ चित्र या प्रतीक।
- पितृ पूजन और तर्पण:
- पितरों के नाम से तिल, जल और कुश से तर्पण करें।
- “ॐ पितृभ्यो नमः” मंत्र का उच्चारण करें।
- वैतरिणी व्रत कथा श्रवण:
- व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा में वैतरिणी नदी पार करने की महिमा और व्रत के लाभ बताए जाते हैं।
- दीपदान और ब्राह्मण भोजन:
- दीपदान करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
- वस्त्र, तिल, गाय का दान भी शुभ माना जाता है।
- आरती और प्रार्थना:
- पितृ आरती करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।
- “हे पितरों! कृपा कर हमें सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।”
वैतरिणी व्रत उद्यापन के प्रमुख लाभ vaitarni vrat
- पितृ दोष से मुक्ति: वैतरिणी व्रत का उद्यापन करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष शांत होता है, जिससे जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष: यह व्रत विशेष रूप से उन आत्माओं के लिए किया जाता है जो वैतरिणी नदी पार नहीं कर पातीं। उद्यापन से उन्हें वैतरिणी पार करने का पुण्य फल मिलता है।
- कुल में सुख-शांति और समृद्धि: उद्यापन करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
- कर्ज़ और रोगों से राहत: मान्यता है कि वैतरिणी व्रत और उसका विधिपूर्वक उद्यापन करने से पुराने कर्ज़, रोग और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
- आत्मिक शुद्धि और पुण्य की प्राप्ति: यह व्रत आत्मा को शुद्ध करता है और व्यक्ति को पुण्य फल प्रदान करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। vaitarni vrat
- पूर्वजों का आशीर्वाद: उद्यापन के माध्यम से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं, जिससे जीवन में उन्नति और सफलता मिलती है
🌺 श्री पद्म पुराणान्तर्गत श्री वैतरणी नदी व्रत कथा 🌺 Vaitarni nadi vrat katha
कथा
|| श्री गणेश प्रसन्न ||
महाराज युधिष्ठिर श्री भगवान श्रीकृष्णचंद्र से कहते हैं —
हे देवश्रेष्ठ! मेरे हित के लिए यह की आराधना को कहिए। हे नर्क का विनाश करने वाले! कृपा करके वे सभी उपाय बताइए जिससे मनुष्य प्राणी नरक की यातना न भोग सके।
यमलोक में वैतरणी नामक नदी है, जिसके दर्शन मात्र से मनुष्य का साहस नष्ट हो जाता है। वह रक्त से बहती हुई, पूय (मवाद) और खून से भरी हुई है। समस्त प्राणियों में भय उत्पन्न करने वाली, सर्व जीवों के लिए दुर्लभ है। वह सुखपूर्वक तैरने योग्य कैसे हो सकती है?” ॥३॥
“हे कृष्ण! उस नदी का मेरे हृदय में अत्यंत भय है, अतः उसे पार करने का उपाय कृपया बताइए।” ॥४॥
श्रीकृष्ण बोले — “हे युधिष्ठिर! मैंने पूर्वकाल में द्वारकापुरी में स्नान करके आते समय मुद्गल नामक तपोधन मुनि को देखा था।” ॥५॥
“उनका तपश्चर्या से उत्पन्न तेज सूर्य के समान अत्यंत शोभायमान था। उन्हें दंडवत प्रणाम करके मैंने पूछा —” ॥६॥
“हे स्वामी! यमलोक में हजारों नरक हैं — उनसे छुटकारा कैसे मिलता है? कृपा करके बताइए।” ॥७॥
मुद्गल ऋषि बोले — “हे कृष्ण! मुझे अचानक मूर्छा आ गई। इतने में ही अंगुष्ठ-प्रमाण देह वाले यमदूतों ने मुझे यातना देते हुए, दृढ़ लोहे की जंजीरों से बाँधकर यमराज के पास ले गए।” ॥९॥ Vaitarni nadi vrat katha
“यमराज की सभा में मैंने देखा — काला चेहरा, लाल-पीली आँखें, डरावनी सूरत, दंडधारी मृत्यु और व्याधियों से घिरे हुए यमराज।” ॥१०॥
“वात, पित्त और कफ — ये उनकी मूर्तियाँ हैं, जिनकी वे उपासना करते हैं।” ॥११॥
“सुभाष, ज्वर, स्फोटक, गर्मी, भगंदर, जलंधर आदि रोग वहाँ विद्यमान हैं।” ॥१२॥
“नाना प्रकार की वेदनाएँ, दुखदायक रोग, मूत्रकष्ट, हृदय रोग, भूतमंडली आदि वहाँ उपस्थित हैं।” ॥१३॥
“नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित यमदूत, यमराज की सेवा में आज्ञा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” ॥१४॥
“राक्षस, दानव, नाग, रूपवान जीव वहाँ खड़े हैं। धर्माधिकारी चित्रगुप्त आदि लेखक अपने स्थान पर बैठे हैं। व्याघ्र, सिंह, भेड़िया, सियारनी, सर्प, बिच्छू, मच्छर, जोंक, खटमल, वराह, हाथी, रीछ, गिद्ध, सियार, चोर, भूत, दरिद्र, डाकिनी, ग्रह आदि सभी वहाँ उपस्थित हैं — जो हड्डी-मांस काटकर रक्त बहाने वाले हैं, अपने सेनापतियों सहित यमराज की सभा में शोभा पा रहे हैं।”
“भयानक जंगल के जीवों से यमराज उसी प्रकार सुशोभित थे जैसे कज्जल के पहाड़ पर सर्प।”
“मुझे देखकर यमराज ने अपने सेवकों से कहा — ‘नाम में भ्रांति होकर तुमने इन मुनि को यहाँ क्यों लाया? कौडिन्य ग्राम के भीष्मक क्षत्रिय के पुत्र मुद्गल को लाओ।’” ॥२०॥
“यह सुनकर वे वहाँ से गए और लौटकर बोले — ‘हे स्वामी! हमने मुद्गल को नहीं देखा, वह कहाँ है यह हमें ज्ञात नहीं।’”
तब यमराज बोले — “हे मृत्युगण! भगवान के भक्त प्रायः नहीं दिखते। जिन्होंने वैतरणी एकादशी का व्रत किया है, वे दुर्लभ हैं। जो उज्जैन, प्रयाग, काशी आदि तीर्थों में मरे हैं, जिन्होंने तिल, हाथी, सोना, गायों को घास आदि दान दिया है — उनके दर्शन भी दुर्लभ हैं।”
दूतों ने कहा — “हे स्वामी! यह कौन-सा व्रत है? कृपा करके कहिए कि क्या करना चाहिए जिससे आपको संतोष हो।”
यमराज ने कहा — “मार्गशीर्ष आदि मासों में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत अति उत्तम है। जो स्नान करके उपवास करता है और वैतरणी नदी व चित्रगुप्त की पूजा करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।”
युधिष्ठिर बोले — “उस व्रत की विधि क्या है? कृपा करके बताइए।”
श्रीकृष्ण बोले —
“मार्गशीर्ष आदि मासों के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विधिवत् वैतरणी व्रत करना चाहिए। जो मनुष्य प्रति मास एक वर्ष तक यह व्रत करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।”
“एकादशी के दिन यह संकल्प ले — ‘हे देवदेवेश! आज मैं उपवास करूंगा। द्वादशी के दिन आपकी पूजा करके भोजन करूंगा। हे गोविंद! आप इस पूजा के साक्षी रहें। मैं आपकी शरण में हूँ। यदि स्वप्न या इंद्रियों की विकलता से कोई दोष हुआ हो तो क्षमा करें।’”
“इसके बाद दिन में तीसरे प्रहर मिट्टी, गोबर, तिल लेकर पवित्र नदी, तालाब या घर में नियत चित्त होकर इन सबको मिलाकर जल में प्रविष्ट करें।”
“फिर भक्ति भाव से कहें — ‘हे पृथ्वीदेवी! भगवान ने वराह अवतार धारण कर तुम्हारा उद्धार किया है।’”
“‘अश्वक्रान्ता’ मंत्र से मृतिका लगाएँ। गौमय में लक्ष्मी निवास करती हैं, अतः गोबर को नमस्कार करें।
तिल कश्यपजी से उत्पन्न हैं, अतः पाप-नाशक हैं।”
“हे गोविंद! तिलस्नान से मेरे पापों का हरण कीजिए। हे जल! तुम दैत्य, दानव, राक्षस, स्वेदज, अंडज सभी की ज्योति हो। विष्णु ने तुम्हें बनाया है, अतः तीर्थों सहित हमारे समीप आओ।”
“फिर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, देव, ऋषि और पितरों का तर्पण करें और अपने घर लौटें। सोने के कलश में पाँच रत्न, जल और दक्षिणा डालें; तांबे के कलश को ऊपर रखें। लक्ष्मीपति विष्णु का विष्णु-मंत्र से पूजन करें।”
“मिट्टी-गोबर से लीपे हुए स्थान पर चावल से धर्मराज, चित्रगुप्त की मूर्ति बनाएँ।
गंगाजल में वैतरणी नदी की स्थापना करें और विष्णु की पूजा करें।”
“फिर धर्मराज, चित्रगुप्त, वैतरणी नदी और गौ माता की पूजा करें —
‘हे धर्मराज! हे दक्षिण दिशा के स्वामी! भैंसे पर सवार होकर आप हमारी शुभकामनाएँ पूर्ण करें।
हे विचित्र चित्रगुप्त! हमें नरक की पीड़ा से मुक्त करें।’”
“इस प्रकार बारह नामों से धर्मराज की पूजा करें, फिर वैतरणी नदी की प्रार्थना करें —
‘हे पापघ्ने! सब कामनाओं को पूर्ण करने वाली! जन्म-मृत्यु-जरा से रहित भगवान के द्वारा मेरा उद्धार करो। हे रमापते! मुझे भयावह नदी से पार लगाओ।’”
“हे वैतरणी! जिनके भय से प्राणी काँपते हैं, उन सबका उद्धार करने वाली तुम हो। मैंने तुम्हारी पूजा की है। तुम पापों को नाश करने वाली हो। मैं तुम्हें अर्घ्य देता हूँ।”
“हे जगन्नाथ! हे कृष्ण! नामस्मरण मात्र से मेरे सभी पापों का हरण करो।”
“फिर भगवान को पकवान, ताम्बूल, वस्त्र, दीपक अर्पण करें। गौ माता की पूजा कर घास खिलाएँ —
‘हे सब पापों का नाश करने वाली, आरोग्य व दीर्घायु देने वाली गौमाता! मुझ पर प्रसन्न हो।’”
“इस प्रकार वर्षभर गरुड़ध्वज भगवान की पूजा कर, वर्ष के अंत में सोने की भगवान की मूर्ति, लोहे की यमराज की मूर्ति बनवाकर, तांबे के कलश में जल भरकर उसमें मछली, कछुआ, कमल आदि डालें और पूर्वोक्त विधि से श्रेष्ठ पूजा करें।”
“वेदोक्त विधि से वैतरणी का ध्यान करें —
‘हे सर्वपाप-नाशिनी! हे महाघोर यमलोक में प्रसिद्ध नदी! मैं तुम्हें अर्घ्य देता हूँ। सभी देवता तुम्हारे पास निवास करते हैं।’”
“विष्णु-मंत्र से हवन करें, रात्रि में जागरण करें।
फिर बारह या तेरह कुलीन वेदपाठी ब्राह्मणों को तिल, लड्डू, ताम्रपत्र, छत्र, जूता आदि सामग्री सहित भोजन कराकर सोने की दक्षिणा दें।”
“तेरहवें दिन आचार्य को वस्त्र, कुंकुम, फूल, हार, दक्षिणा, घंटा, चामर, लोहदंड, इक्षुदंड आदि सहित गौ दान करें।
गाय की पूँछ पकड़कर गन्ने का डंडा हाथ में लेकर यह मंत्र पढ़ते हुए कहें —
‘हे दिव्यश्रेष्ठ! मैंने भगवान की कृपा से वैतरणी को पार कर लिया है।’”
“जो मनुष्य या नारी इस वैतरणी व्रत को करते हैं, उन्हें महान पुण्यफल प्राप्त होता है।
जो इस व्रत का पालन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।”
इति श्री पद्म पुराणान्तर्गत श्री वैतरणी नदी व्रत कथा समाप्तम्॥ Vaitarni nadi vrat katha
- ‼️मंत्रात शक्ती असते का ‼️
- (adhikmas mahatmay) अध्याय २१ – धर्म शर्माची कथा
- 10,bhav me sury bhagvan : दशम भाव में सूर्य का प्रभाव
- 1000 Vishnu Sahastra Naame |
- 11,bhav me sury bhagvan : एकादश भाव में सूर्य का प्रभाव
- कैसा मिलेगा जीवनसाथी? | Marriage Prediction by Kundliकैसा मिलेगा जीवनसाथी? कब तक होगा विवाह? जीवन के तीन महत्वपूर्ण आधार हैं – विवाह, धन और स्वास्थ्य। इन…
- Mangal Dosh Kya Hai? Kya Manglik Ki Shaadi Sirf Manglik Se Hi Honi ChahiyeMangal Dosh Kya Hai? Kya Manglik Ki Shaadi Sirf Manglik Se Hi Honi Chahiye भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक संस्कार माना गया है – सोलह संस्कारों में से एक। विवाह दो आत्माओं, दो परिवारों और दो कुलों का संगम है। यही कारण है कि विवाह से पहले कुंडली मिलान की परंपरा भारतीय समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- वैशाख माह 2026 वैशाख माह 2026 कब शुरू होगा? त्योहारों की पूरी लिस्ट Vaishakhaवैशाख Vaishakha माह 2026 कब शुरू होगा? जानें सभी व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट स महीने में जल दान का विशेष महत्व होता है,
- शीतला सप्तमी 2026: कब है शीतला सप्तमी? | sheetala-saptami-2026-date-time-mahatvaशीतला सप्तमी 2026: कब है शीतला सप्तमी? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और कथा | sheetala-saptami-2026-date-time-mahatva सनातन धर्म में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें शीतला सप्तमी का विशेष महत्व है।
- चंद्र ग्रहण कब है ? क्या करे ओर क्या ना करे | khagras chandra grahan 2026 |खग्रास चंद्र ग्रहण कब है ? 2026 Chandra Grahan 2026: Event Details and Timing 3 मार्च 2026 चंद्र ग्रहण…
- Rudraksha kyu pehna chahiye | रुद्राक्ष क्यों धारण किया जाता है?रुद्राक्ष क्यों धारण किया जाता है? Rudraksha रुद्राक्ष धारण करने से अनेक व्यक्तियों को लाभ होते हुए आपने देखा…
- सूर्य महादशा के नैसर्गिक शुभ-अशुभ फल | surya grah mahadashaसूर्य महादशा का नैसर्गिक फल (संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप में) सूर्य महादशा के सामान्य प्रभाव क्या है ? surya…
- ग्रहों का शुभ और अशुभ फल | पाराशरी ज्योतिष ग्रह फल | kundali me grah ki sthithi and falकुंडली में ग्रहों का शुभ और अशुभ फल | पाराशरी ज्योतिष अनुसार ग्रह फल कुंडली कुंडली में तीन तत्व…
- Navagraha Stotra (नवग्रह स्तोत्रम्)यहाँ नवग्रह स्तोत्रम् (Navagraha Stotra) का पूरा पाठ संस्कृत में और उसका अंग्रेजी अर्थ प्रस्तुत किया गया है। यह…
- श्री वैतरणी नदी व्रत कथा | Vaitarni nadi vrat katha🪔 वैतरिणी व्रत की पूजा विधि (Step-by-Step) vaitarni vrat वैतरिणी व्रत उद्यापन के प्रमुख लाभ vaitarni vrat 🌺 श्री…
- कोजागिरी पूर्णिमा व्रत कथा: धन और समृद्धि का रहस्य Kojagiri pornima 2025कोजागिरी पूजा निश्चित कल में की जाए तो अत्यंत सुबह करी फल मिलता है| पूजा घर कोजागिरी पूर्णिमा निश्चित…
- बुध का कन्या राशि में उदय: इन राशियों को कर देंगे मालामाल ! Budh ka kanya rashi praveshबुध का कन्या राशि में उदय: इन राशियों को कर देंगे मालामाल! बुध का कन्या राशि में उदय: ज्योतिष…
- Mohini Stotram श्रीकृष्णस्तोत्रं मोहिनीरचितम्Mohini Stotram श्रीकृष्णस्तोत्रं मोहिनीरचितम् श्रीकृष्णस्तोत्रं मोहिनीरचितम् श्री गणेशाय नमः । मोहिन्युवाच । सर्वेन्द्रियाणां प्रवरं विष्णोरंशं च मानसम् । तदेव…
- Dhan Prapti Combo Gemstone Bracelet – Unlock Prosperity Instantly💰 Dhan Prapti Combo Gemstone Bracelet – Unlock Prosperity Instantly Everyone desires stability in life—but financial problems often stand…
- खग्रास चंद्र | When Chandra Grahan 2025-Sep-07खग्रास चंद्रग्रहण केव्हा ग्रहण पाळावे ? Chandra Grahan 2025 भाद्रपद शु. १५, रविवार, ७ सप्टेंबर २०२५श्रीवर्ष स्पर्श – संमीलन…
- श्रावण मास, महादेव प्रसन्न करण्याचे सर्वोत्तम उपाय Shrawan monthश्रावण मास, महादेव प्रसन्न करण्याचे सर्वोत्तम उपाय Shrawan month कर्क संक्रांती आणि श्रावण मासातील पुण्यकाळाचे महत्त्व संक्रांती म्हणजे सूर्य…
- How Saraswati Yoga Enhances Creativity and Knowledge in Your Horoscope”How Saraswati Yoga Enhances Creativity and Knowledge in Your Horoscope ज्योतिष में सरस्वती योग: बुद्धि, कला और विद्या का…
- Saturn’s Retrograde in Pisces: Brace Yourself—These Zodiac Signs Are in for a StormSaturn Retrograde in Pisces 2025: Brace Yourself—These Zodiac Signs Are in for a Storm Introduction Saturn retrograde in Pisces…
- शनि वक्री मीन राशि में – 13 जुलाई 2025 saturn prabhavशनि वक्री मीन राशि में – 13 जुलाई 2025 शनि वक्री मीन राशि में – 13 जुलाई 2025 शनि…
- आषाढ़ अमावस्या 2025: कैसे करें तर्पण और कौन से मंत्र दिलाएंगे पितृ दोष से छुटकारा? Amavasya 2025आषाढ़ अमावस्या 2025: कैसे करें तर्पण और कौन से मंत्र दिलाएंगे पितृ दोष से छुटकारा? Ashadha Amavasya 2025 आषाढ़…
- गोत्र म्हणजे काय? तुमचं गोत्र कसं ओळखाल – जाणून घ्या त्यामागचं रहस्य आणि महत्त्व ! what is gotra ? Gotra mhanje kay ?गोत्र म्हणजे काय ? तुमचे गोत्र जाणून घ्या ! Gotra mhanje kay ? what is gotra ? गोत्र म्हणजे…
- शुक्र गोचर 2025, 3 राशी को मिलेगा लाभ | Venus Transit In Mrigasira Nakshatra: Monetary Gains & Success For 3 Zodiacs!शुक्र गोचर 2025, 3 राशी को मिलेगा लाभ | Venus Transit In Mrigasira Nakshatra: Monetary Gains & Success For 3 Zodiacs!मृगशिरा नक्षत्र में शुक्र का गोचर 2025: इन 3 राशियों को मिलेगा धन लाभ और सफलता 20 जुलाई 2025 को शुक्र ग्रह मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, जो वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है।
- venkatesh stotra | वेंकटेश स्तोत्रvenkatesh stotra | वेंकटेश स्तोत्र venkatesh stotra | वेंकटेश स्तोत्र venkatesh stotra वेंकटेश स्तोत्र: वेंकटेश स्तोत्र संस्कृत में भगवान…
- घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र ghorkashtodhyran stotra दत्त महाराज स्तोत्रसंकटनिवारण होण्यासाठी तसेच गुरूग्रहपिडा दूर होण्यासाठी प्रभावी दत्तस्तोत्रे घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र
- श्री रुद्राष्टकम् | Rudrashtakam महादेव जिकी स्तुतीश्री रुद्राष्टकम् | Rudrashtakam महादेव जिकी स्तुती ॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्…
- गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र | Gajendra moksha stotraगजेंद्र मोक्ष स्तोत्र | Gajendra moksha stotra श्री शुक उवाच – एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि ।जजाप परमं जाप्यं…
- शिव तांडव स्तोत्र shiv tandav stotra – Hindi Lyrics and Meaningशिव तांडव स्तोत्र – Hindi Lyrics and Meaning shiv tandav stotra जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्।डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद…
- शिव महिम्ना स्तोत्र | shiv Mahimna stotraशिव महिम्ना स्तोत्रस्त पाठ | shiv Mahimna stotra पुष्पदन्त उवाच – शिव महिम्ना स्तोत्रस्त पाठ | shiv Mahimna stotra…
- Madhurastakam | मधुराष्टकंश्री कृष्ण भगवान अति प्रिय स्तोत्र | अष्टक मधुराष्टक | मधुराष्टकम Madhurastakam अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं…
- श्रीपाद श्रीवल्लभ स्तोत्र | Shripad Shrivallabh Stotrashreepad Shreevallabhश्रीपाद श्रीवल्लभ स्तोत्र | Shripad Shrivallabh Stotrashreepad Shreevallabh ॥ श्रीपाद श्रीवल्लभ स्तोत्र ॥ श्रीपाद वल्लभ गुरोः वदनारविन्दंवैराग्य दीप्ति परमोज्वलमद्वितीयम्…
- श्री गजानन महाराज स्तोत्र | Gajanan maharaj stotraश्री गजानन महाराज स्तोत्र | Gajanan maharaj stotra श्री गजानन महाराज का यह स्तोत्र भक्तों को शांति, समृद्धि और…
- श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्र प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं Shri Sankat Nashan Ganesh Stotraश्री संकटनाशन गणेश स्तोत्र प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं Shri Sankat Nashan Ganesh Stotra श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्र नारद पुराण…
- महापुरुष योग 2025: मिथुन, कन्या और मीन राशियों के लिए bhadra and malavya mahapurush 2025भद्र और मालव्य महापुरुष योग 2025: मिथुन, कन्या और मीन राशियों के लिए धन, वैभव और सफलता के द्वार…
- Manglik Dosha Remedies 2025: मंगल दोष के प्रभावी उपाय, शादी में विलंब और कलह से पाएं मुक्ति🪔 Manglik Dosha Remedies 2025: मंगल दोष के प्रभावी उपाय, शादी में विलंब और कलह से पाएं मुक्ति 🔮…
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
