सम्पूर्ण आरती संग्रह
Complete Aarti Sangrah — Hindi & Marathi

Complete Aarti Sangrah — Hindi & Marathi
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
एकदंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहत, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥
`, mr: `जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जयाची पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
एकदंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथ्यावर सिंदूर शोभे, उंदराची स्वारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
पान चढे, फूल चढे, आणि चढे मेवा।
लाडूंचा भोग लागे, संत करती सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥
` }, { title: 'सुखकर्ता दुखहर्ता', subtitle: 'Sukhkarta Dukhaharta — मराठी प्रसिद्ध आरती', hi: `सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शन माझे घडो देवा, करूणा करी॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा॥
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नुपुरे चरणी घागऱ्या॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
`, mr: `सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शन माझे घडो देवा, करूणा करी॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
` }, { title: 'गणपती बाप्पा मोरया', subtitle: 'Ganpati Bappa Morya Aarti', hi: `गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया।
श्री गणेश गजानन्द, विघ्नों के हारी।
शंकर सुत गणराज, सुर-मुनि-सुखकारी॥
शुभ काज में प्रथम पूजा, तुम्हारी होती।
बड़े बड़े मुनि-देवता, तुमको शीश नवाते॥
गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया।
मोदक प्रिय गणराज को, चढ़ाओ नित्य।
दूर्वा और शमी पत्र, करो अर्पित नित्य॥
गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया।
`, mr: `गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया।
श्री गणेश गजानन, विघ्नांचा हारी।
शंकरसुत गणराज, सुर-मुनि-सुखकारी॥
शुभ कार्यात प्रथम पूजा, तुझी होते।
मोठमोठे मुनी-देव, तुला माथा नमवते॥
गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया।
मोदक प्रिय गणराजा, अर्पण करू नित्य।
दूर्वा आणि शमीपत्र, वाहू अर्पण नित्य॥
गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया।
` }, { title: 'श्री गणेश चालीसा आरती', subtitle: 'Shri Ganesh Aarti — Mangal Roop', hi: `ॐ जय श्री गणेश, जय श्री गणेश।
मंगल मूर्ति विराजत, भव-बाधा हरत।
शीश पर सिंदूर सोहे, गंध फूल धारत॥
ॐ जय श्री गणेश, जय श्री गणेश।
विघ्नहर्ता विनायक, शिव सुत गणराज।
बुद्धि प्रदाता भगवन, सफल करो काज॥
लंबोदर महाकाय, त्रिभुवन के स्वामी।
सब विघ्नों को दूर करो, तुम अंतर्यामी॥
ॐ जय श्री गणेश, जय श्री गणेश।
`, mr: `ॐ जय श्री गणेश, जय श्री गणेश।
मंगल मूर्ती विराजत, भव-बाधा हरत।
शीर्षावर सिंदूर शोभे, गंध फूल धारत॥
ॐ जय श्री गणेश, जय श्री गणेश।
विघ्नहर्ता विनायक, शिवसुत गणराज।
बुद्धी प्रदाता भगवन, यशस्वी करो काज॥
ॐ जय श्री गणेश, जय श्री गणेश।
` }, { title: 'गणेश वंदना आरती', subtitle: 'Ganesh Vandana — Pratham Puja Aarti', hi: `वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि सम प्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
जय श्री गणेश प्रभु, आरती उतारू।
लंबोदर गजमुख को, वंदन बारंबार॥
वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि सम प्रभ।
मोदक के भोग लगाऊं, मनसे प्रेम धरूं।
गणपति देव विनायक, चरण शरण गहूं॥
जय गणेश, जय गणेश, जय मंगल करता।
भक्तों के सब काज सफल, करना नित्य सरता॥
`, mr: `वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटी सम प्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
जय श्री गणेश प्रभु, आरती उतारतो।
लंबोदर गजमुखाला, वंदन वारंवार॥
वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटी सम प्रभ।
मोदकाचा भोग लावतो, मनाने प्रेम धरतो।
गणपती देव विनायक, चरण शरण येतो॥
जय गणेश, जय गणेश, जय मंगल कर्ता॥
` } ] }, { id: 'mahadev', name: 'महादेव जी', name_en: 'Mahadev Shiva', icon: '🕉️', color: '#1A237E', seoDesc: 'शिव महादेव की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'ॐ जय शिव ओंकारा', subtitle: 'Om Jai Shiv Onkara — महाआरती', hi: `ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
दो भुज चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहे, भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
श्री फल, तुलसी, बिल्वपत्र, धतूरे का चढ़ावा।
भस्म अखंड रमाई, शोभे बहु भावा॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
`, mr: `ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णू, सदाशिव, अर्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन, गरुडासन, वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
दोन भुज, चार भुज, दहाभुज अति शोभे।
त्रिगुण रूप पाहता, त्रिभुवन मन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
` }, { title: 'शिव की आरती', subtitle: 'Shiv Aarti — Bhole Shankar Aarti', hi: `जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
गले सर्पमाला, शीश गंगा साथ॥
जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
नंदी वाहन, तीन नेत्र वाले।
त्रिपुंड लगाए, रुद्राक्ष माला वाले॥
जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
आशुतोष भोले, दीनों के दाता।
जटाधारी नीलकंठ, शिव गुणों का गाता॥
बेल पत्र चढ़ाओ, दूध से अभिषेक।
महामृत्युंजय जाप से, होती मुक्ति एक॥
जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
`, mr: `जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
गळ्यात सर्पमाला, शीर्षी गंगा साथ॥
जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
नंदी वाहन, तीन नेत्र वाले।
त्रिपुंड लावले, रुद्राक्ष माला वाले॥
जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
आशुतोष भोले, दीनांचे दाते।
जटाधारी नीलकंठ, शिव गुण गाते॥
जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ।
` }, { title: 'शिव तांडव स्तोत्र आरती', subtitle: 'Shiv Tandav Aarti — Shankara Aarti', hi: `जय महेश जय शंकर, शिव आदि अनादि।
निर्गुण निराकार तुम, प्रभु जगदादि॥
कैलास पर्वत पे विराजे, संगी माँ पार्वती।
ध्यान-धारणा में मगन, महादेव जगपति॥
जय महेश जय शंकर।
मंदाकिनी की धारा बहे, जटा के बीच में।
चंद्रमा सुशोभित है, उनके मुकुट में॥
डमरू से नाद निकले, तांडव करते शिव।
संहारक और सर्जक, ऐसे हैं महादेव॥
जय महेश जय शंकर, शिव आदि अनादि॥
`, mr: `जय महेश जय शंकर, शिव आदि अनादी।
निर्गुण निराकार तू, प्रभू जगदादी॥
कैलास पर्वतावर विराजे, सोबत माँ पार्वती।
ध्यान-धारणेत मग्न, महादेव जगपती॥
जय महेश जय शंकर।
मंदाकिनीची धारा वाहे, जटांच्या मध्ये।
चंद्र शोभतो त्यांच्या, मुकुटामध्ये॥
जय महेश जय शंकर, शिव आदी अनादी॥
` }, { title: 'बोल बम बोल बम', subtitle: 'Bol Bam Shiv Aarti — Sawan Special', hi: `बोल बम, बोल बम, बोल बम भोले।
शिव शंकर बम बम, नाम तेरा बोले॥
कांवर उठाए चले, शिव के द्वार।
जल चढ़ाऊं गंगा का, कर लो स्वीकार॥
बोल बम, बोल बम, बोल बम भोले।
सावन में झूले पड़े, नंदन वन में।
शिव-पार्वती खेलें, पर्वत के गन में॥
भस्म रमाए महादेव, योगी बैरागी।
तीनों लोकों के स्वामी, महाकाल त्यागी॥
बोल बम, बोल बम, बोल बम भोले।
`, mr: `बोल बम, बोल बम, बोल बम भोले।
शिव शंकर बम बम, नाम तुझे बोले॥
कावड़ उचलून चालले, शिवाच्या दाराशी।
गंगाजल चढवतो, स्वीकारा त्वरेशी॥
बोल बम, बोल बम, बोल बम भोले।
श्रावणात झुले लागले, नंदनवनात।
शिव-पार्वती खेळते, पर्वताच्या रानात॥
बोल बम, बोल बम, बोल बम भोले।
` }, { title: 'नमः शिवाय आरती', subtitle: 'Om Namah Shivaya Aarti — Panchakshara Aarti', hi: `ॐ नमः शिवाय, नमः शिवाय।
शिव की जय बोलो, नमः शिवाय॥
पंचतत्त्व में रमे हो तुम, पंचाक्षर तुम्हारा।
न, म, शि, वा, य — ये मंत्र निराला॥
ॐ नमः शिवाय।
बेलपत्र त्रिदल जैसे, तीनों नेत्र तुम्हारे।
जन्म-मृत्यु-मोक्ष तीनों, तुम्हारे इशारे॥
त्र्यंबकेश्वर नाम है, गंगाधर कहाते।
भोले शंकर की आरती, मिलकर सब गाते॥
ॐ नमः शिवाय, नमः शिवाय।
`, mr: `ॐ नमः शिवाय, नमः शिवाय।
शिवाचा जयजयकार, नमः शिवाय॥
पंचतत्त्वात रमलेले, पंचाक्षर तुझे।
न, म, शि, वा, य — हे मंत्र अनोखे॥
ॐ नमः शिवाय।
बेलपत्र त्रिदलासारखे, तीन नेत्र तुझे।
जन्म-मृत्यू-मोक्ष तीनही, तुझ्या इशाऱ्याने॥
ॐ नमः शिवाय, नमः शिवाय।
` } ] }, { id: 'mata', name: 'माता जी', name_en: 'Maa Devi Aarti', icon: '🌸', color: '#880E4F', seoDesc: 'माता जी की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'जय अम्बे गौरी', subtitle: 'Jai Ambe Gauri — Navratri Aarti', hi: `जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी।
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजे॥
जय अम्बे गौरी।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥
`, mr: `जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुम्हाला निशिदिन ध्यावत, हरी ब्रह्मा शिवरी॥
जय अंबे गौरी।
माथ्यावर सिंदूर विराजत, टिळा मृगमदाचा।
उज्ज्वल दोन नयन, चंद्रवदन सुंदर॥
जय अंबे गौरी।
सिंह वाहन राजते, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनि सेवती, त्यांच्या दुखाची हारी॥
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥
` }, { title: 'माँ वैष्णो देवी आरती', subtitle: 'Vaishno Devi Aarti — Sherawali Mata', hi: `जय माँ वैष्णो, जय माँ वैष्णो।
कटरा नगर में विराजे, शेरों वाली माता॥
जय माँ वैष्णो देवी।
त्रिकुट पर्वत पर बैठी, आदिशक्ति अम्बे।
भक्तों के कष्ट हरती, दुर्गा माँ जगदम्बे॥
पिंडी रूप विराजे, गुफा में तुम्हारी।
अखंड जोत जलती है, करो कृपा भारी॥
जय माँ वैष्णो देवी।
सांझी और प्रभाती, आरती उतारूं।
माँ के दरबार में मैं, शीश झुकाकर आऊं॥
जय माँ वैष्णो, जय माँ वैष्णो॥
`, mr: `जय माँ वैष्णो, जय माँ वैष्णो।
कटरा नगरात विराजे, शेरावाली माता॥
जय माँ वैष्णो देवी।
त्रिकूट पर्वतावर बसते, आदिशक्ती अंबे।
भक्तांचे कष्ट हरते, दुर्गा माँ जगदंबे॥
जय माँ वैष्णो देवी।
पिंडीरूपात विराजे, गुहेत तुझी माँ।
अखंड ज्योत जळते, करा कृपा माँ॥
जय माँ वैष्णो, जय माँ वैष्णो॥
` }, { title: 'सरस्वती माँ की आरती', subtitle: 'Saraswati Maa Aarti — Vidya Devi', hi: `जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता।
चंद्रवदनी पद्मासनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
बाईं कर में वीणा, दाईं कर में माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियों वाला॥
जय सरस्वती माता।
देवी शारदा भवानी, वाणी की अधिष्ठात्री।
विद्यार्थियों के ह्रदय में, ज्ञान की दात्री॥
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता॥
`, mr: `जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता।
चंद्रवदनी पद्मासनी, ज्योती मंगलकारी।
शोभे शुभ हंस स्वारी, अतुल तेजधारी॥
डाव्या हाती वीणा, उजव्या हाती माला।
शीर्षावर मुकुट शोभे, गळ्यात मोत्यांचा माला॥
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता॥
` }, { title: 'शीतला माता की आरती', subtitle: 'Sheetala Mata Aarti — Roga Nashini', hi: `जय शीतला माता, जय जय शीतला माता।
आदि ज्योत निराली तुम, दीन दुखीयन त्राता॥
जय शीतला माता।
रूप अनूप विराजे, सुंदर शीतल काया।
गधे की सवारी माता, दाल-भात का माया॥
रोग-दोष निवारिणी, भक्तों की हितकारी।
माँ की जय बोलते हैं, बच्चे नर और नारी॥
जय शीतला माता, जय जय शीतला माता॥
`, mr: `जय शीतला माता, जय जय शीतला माता।
आदि ज्योत निराळी तू, दीन दुखियांची त्राता॥
जय शीतला माता।
रूप अनुपम विराजे, सुंदर शीतल काया।
गाढव स्वारी माता, दाल-भात प्रिया॥
जय शीतला माता, जय जय शीतला माता॥
` }, { title: 'माँ की आरती', subtitle: 'Universal Mata Aarti — Sarva Devi Aarti', hi: `आरती माँ की गाओ, भव-बाधा मिटाओ।
जय माँ जगदम्बे, कृपा बरसाओ॥
नौ दुर्गा नव रूप धरे हैं, भक्तों के मन भाओ।
शैलपुत्री-ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा गाओ॥
कूष्मांडा स्कंदमाता, कात्यायनी धाओ।
कालरात्रि महागौरी, सिद्धिदात्री मनाओ॥
आरती माँ की गाओ, भव-बाधा मिटाओ।
दीप जलाओ थाल सजाओ, फूल-मिठाई लाओ।
माँ के दरबार में मिलकर, जयकारा लगाओ॥
जय माँ जगदम्बे, जय माँ जगदम्बे॥
`, mr: `आरती माँची गाओ, भव-बाधा मिटवा।
जय माँ जगदंबे, कृपा वर्षव॥
नऊ दुर्गा नऊ रूप धरले, भक्तांच्या मनी भाओ।
शैलपुत्री-ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा गाओ॥
आरती माँची गाओ, भव-बाधा मिटवा।
दीप लावा ताट सजवा, फूल-मिठाई आणा।
माँच्या दरबारात एकत्र, जयकारा लावा॥
जय माँ जगदंबे, जय माँ जगदंबे॥
` } ] }, { id: 'hanuman', name: 'हनुमान जी', name_en: 'Hanuman Ji Aarti', icon: '🐒', color: '#E65100', seoDesc: 'हनुमान जी की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'आरती कीजे हनुमान लला की', subtitle: 'Aarti Kije Hanuman Lala Ki — Mangalvar Aarti', hi: `आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
जाके बल से गिरिवर काँपे, रोग-दोष जाके निकट न झाँपे।
अंजनिपुत्र महाबलवाली, आरती कीजे हनुमान लला की॥
लंका विध्वंस किए रघुराई, तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जाके बल दशानन मारे, राम रसायन नित उर धारे॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
`, mr: `आरती केजे हनुमान लल्लाची।
दुष्ट दलन रघुनाथ कलेची॥
आरती केजे हनुमान लल्लाची।
ज्याच्या बळाने पर्वत कापे, रोग-दोष जवळ न येते।
अंजनीपुत्र महाबलशाली, आरती केजे हनुमान लल्लाची॥
लंकेचा विध्वंस केला, तुलसीदासांनी कीर्ती गायली।
आरती केजे हनुमान लल्लाची।
` }, { title: 'मनोजवम मारुत तुल्यवेगम', subtitle: 'Manojavam Aarti — Anjaneya Stotra', hi: `मनोजवम मारुत तुल्यवेगम, जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठम।
वातात्मजम वानरयूथमुख्यम, श्रीरामदूतम शरणं प्रपद्ये॥
जय बजरंगी, जय बजरंगी, जय श्री हनुमान।
राम-लखन जानकी के दास, वीर महाबलवान॥
अष्टसिद्धि नव निधि के दाता, अंजनि के लाला।
संकटमोचन नाम है तेरा, भगाओ भव की ज्वाला॥
जय बजरंगी, जय श्री हनुमान॥
`, mr: `मनोजवम मारुत तुल्यवेगम, जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठम।
वातात्मजम वानरयूथमुख्यम, श्रीरामदूतम शरणं प्रपद्ये॥
जय बजरंगी, जय बजरंगी, जय श्री हनुमान।
राम-लखन जानकीचे दास, वीर महाबलवान॥
अष्टसिद्धी नव निधींचा दाता, अंजनीचा लाला।
जय बजरंगी, जय श्री हनुमान॥
` }, { title: 'जय हनुमान ज्ञान गुण सागर', subtitle: 'Jai Hanuman — Chalisa Opening Aarti', hi: `जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीश तिहुं लोक उजागर।
रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनि पुत्र पवन सुत नामा॥
जय बजरंग बली, हनुमान जी की जय।
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।
कंचन वरण विराज सुवेसा, कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र और ध्वजा विराजे, काँधे मूंज जनेउ साजे।
जय बजरंग बली, हनुमान जी की जय।
`, mr: `जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीश तिन्हीं लोक उजागर।
रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनीपुत्र पवनसुत नामा॥
जय बजरंग बली, हनुमानजींचा जय।
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमती निवार सुमतीचा संगी।
जय बजरंग बली, हनुमानजींचा जय।
` }, { title: 'बजरंग बाण आरती', subtitle: 'Bajrang Baan Aarti — Sankat Mochan', hi: `जय श्री राम, जय श्री राम, जय हनुमान।
संकट मोचन हनुमान, प्रभु नाम का गुणगान॥
बजरंग बाण चलाते हो, दुश्मन को भगाते हो।
भूत-प्रेत-पिशाच से, भक्तों को बचाते हो॥
मंगलवार और शनिवार, तुम्हारा प्रिय दिन।
सिंदूर और चमेली, चढ़ाऊं नित नव दिन॥
जय श्री राम, जय हनुमान॥
`, mr: `जय श्री राम, जय श्री राम, जय हनुमान।
संकट मोचन हनुमान, प्रभू नामाचे गुणगान॥
बजरंग बाण चालवता, शत्रूला पळवता।
भूत-प्रेत-पिशाचापासून, भक्तांना वाचवता॥
जय श्री राम, जय हनुमान॥
` }, { title: 'पवन पुत्र हनुमान', subtitle: 'Pawan Putra Aarti — Veer Hanuman', hi: `पवन पुत्र हनुमान, रामभक्त बलवान।
लंका जलाकर आए, सीता माँ का मान॥
केसरी नंदन, अंजना का लाल।
तीनों लोक में गाते, तुम्हारे गुण गान॥
पवन पुत्र हनुमान।
संजीवनी बूटी लाए, लखन जी को जिलाए।
राम के काज सारे, तुमने ही सजाए॥
भक्त की पुकार सुनकर, दौड़े चले आए।
जयकारा हनुमान का, सब मिल कर लगाए॥
पवन पुत्र हनुमान, रामभक्त बलवान॥
`, mr: `पवनपुत्र हनुमान, रामभक्त बलवान।
लंका जाळून आले, सीता माँचा मान॥
केसरीनंदन, अंजनेचा लाल।
तिन्हीं लोकात गाती, तुझे गुणगान॥
पवनपुत्र हनुमान।
संजीवनी बूटी आणली, लखनजींना जगवले।
रामाचे सारे कार्य, तुम्हीच सजवले॥
पवनपुत्र हनुमान, रामभक्त बलवान॥
` } ] }, { id: 'dattatray', name: 'दत्तात्रय जी', name_en: 'Dattatray Ji Aarti', icon: '🙏', color: '#4A148C', seoDesc: 'दत्तात्रय जी की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ति', subtitle: 'Trigunätmak Traimürti — Datta Aarti', hi: `त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ति दत्त हे जाणा।
त्रिगुणी अवतार त्रिलोकी राणा॥
जय दत्त, जय दत्त, जय श्री दत्त।
ब्रह्मा-विष्णु-महेश तीनों का रूप।
तीन शीश, छह भुजा, अद्भुत स्वरूप॥
अनसूया के पुत्र हो, गुरुदेव अवधूत।
नव-नाथों के पालक हो, कलियुग में प्रभु॥
जय दत्त, जय दत्त, जय श्री दत्त।
`, mr: `त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हे जाणा।
त्रिगुणी अवतार त्रिलोकी राणा॥
जय दत्त, जय दत्त, जय श्री दत्त।
ब्रह्मा-विष्णू-महेश तिघांचे रूप।
तीन शीर्षे, सहा भुजा, अद्भुत स्वरूप॥
अनसूयेचे पुत्र तू, गुरुदेव अवधूत।
नव-नाथांचा पालक, कलियुगातील प्रभू॥
जय दत्त, जय दत्त, जय श्री दत्त।
` }, { title: 'दिगंबरा दिगंबरा', subtitle: 'Digambara — Datta Mantra Aarti', hi: `दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।
अनंत कोटि ब्रह्मांडनायक, राजाधिराज दत्त।
योगिराज परब्रह्म, सच्चिदानंद दत्त॥
दिगंबरा दिगंबरा।
श्रीपाद श्रीवल्लभ, नृसिंह सरस्वती।
स्वामी समर्थ, अक्कलकोट वास्तव्य।
गणपती, माणिक, नाथ, तुकाराम नाम।
दत्त दिगंबर, सबका अभिराम॥
दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।
`, mr: `दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।
अनंत कोटी ब्रह्मांडनायक, राजाधिराज दत्त।
योगीराज परब्रह्म, सच्चिदानंद दत्त॥
दिगंबरा दिगंबरा।
श्रीपाद श्रीवल्लभ, नृसिंह सरस्वती।
स्वामी समर्थ, अक्कलकोट वास्तव्य।
दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।
` }, { title: 'श्री दत्त प्रभु की आरती', subtitle: 'Shri Datta Prabhu Aarti', hi: `जय जय दत्त, जय जय दत्त प्रभु।
गुरु गोविंद, ब्रह्म, माधव आप॥
चौदह विद्याओं के ज्ञाता, अठारह पुराण के पाता।
अनसूया के तीन पुत्र, ब्रह्मा विष्णु शिव प्रभु॥
जय जय दत्त, जय जय दत्त प्रभु।
गुरुवार को करें पूजा, श्रद्धा से चरण पखारो।
उड्डीपुर-गाणगापुर में, दर्शन करो दत्त प्रभु॥
जय जय दत्त, जय जय दत्त प्रभु।
`, mr: `जय जय दत्त, जय जय दत्त प्रभू।
गुरू गोविंद, ब्रह्म, माधव आप॥
चौदा विद्यांचे ज्ञाते, अठरा पुराणांचे पाते।
अनसूयेचे तीन पुत्र, ब्रह्मा विष्णू शिव प्रभू॥
जय जय दत्त, जय जय दत्त प्रभू।
गुरुवारी करा पूजा, श्रद्धेने चरण धुवा।
गाणगापूर-औदुंबरला, दर्शन घ्या दत्त प्रभू॥
जय जय दत्त, जय जय दत्त प्रभू।
` }, { title: 'अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त', subtitle: 'Avadhoot Chintan — Guru Dev Datta', hi: `अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।
अनंत तुम्हारी महिमा है, अनंत गुणगान।
तीन शीश, छह हाथ, चौदह मुनि संग साथ॥
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।
भिक्षा माँगकर खाते हो, वैरागी जो आते।
आत्मज्ञान का बोध दो, दत्त गुरुदेव।
संसार के दुखों से मुक्ति, दो गुरुदेव॥
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।
`, mr: `अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।
अनंत तुझी महिमा, अनंत गुणगान।
तीन शीर्ष, सहा हात, चौदा मुनी संग साथ॥
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।
भिक्षा मागून खातोस, वैरागी जो येतो।
आत्मज्ञानाचा बोध दे, दत्त गुरुदेव।
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।
` }, { title: 'दत्त जयंती आरती', subtitle: 'Datta Jayanti Aarti — Special Aarti', hi: `जय दत्त गुरु, जय दत्त गुरु, जय दत्त जयंती।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा को, अवतार लिया संती॥
अत्रि मुनि और अनसूया के, तुम हो प्रिय लाल।
त्रिमूर्ति स्वरूप धरकर, आए भू पर काल॥
जय दत्त गुरु, जय दत्त जयंती।
नृसिंह वाडी, गाणगापुर, औदुंबर धाम।
तुलजापुर-पंढरपुर में, रमते हैं राम॥
जय दत्त गुरु, जय दत्त जयंती।
`, mr: `जय दत्त गुरू, जय दत्त गुरू, जय दत्त जयंती।
मार्गशीर्ष पौर्णिमेला, अवतार घेतला संती॥
अत्रि मुनी आणि अनसूयेचे, तू प्रिय लाल।
त्रिमूर्ती स्वरूप धरून, आलास भूवर काल॥
जय दत्त गुरू, जय दत्त जयंती।
नृसिंहवाडी, गाणगापूर, औदुंबर धाम।
जय दत्त गुरू, जय दत्त जयंती।
` } ] }, { id: 'krishna', name: 'कृष्ण जी', name_en: 'Shri Krishna Aarti', icon: '🦚', color: '#1565C0', seoDesc: 'श्री कृष्ण जी की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'आरती कुंजबिहारी की', subtitle: 'Aarti Kunj Bihari Ki — Janmashtami Aarti', hi: `आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावत मुरली मनोहर।
श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद महादेव॥
आरती कुंजबिहारी की।
গগने दामिनी दमके, मोर नाचत वन में।
गोकुल के नंदलाला, मदन मोहन बनचारी॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
`, mr: `आरती कुंजबिहारीची, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारीची।
गळ्यात वैजयंती माला, वाजवत मुरली मनोहर।
कानांत कुंडले झळकती, नंदाचा आनंद महादेव॥
आरती कुंजबिहारीची।
आकाशात वीज चमके, मोर नाचे वनात।
गोकुळाचा नंदलाला, मदन मोहन वनचारी॥
आरती कुंजबिहारीची, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारीची।
` }, { title: 'राधे-राधे जपो', subtitle: 'Radhe Krishna Aarti — Prema Bhakti', hi: `राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी।
राधे-राधे, राधे-राधे, राधे बरसाने वाली॥
कृष्ण-राधा की जोड़ी सुंदर, देखते रह जाते।
वृंदावन में रास रचाते, गोपियाँ संग नाचते॥
राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी।
यशोदा मैया के दुलारे, कान्हा नंदलाला।
मक्खन-मिश्री खाते हो, माखन चोर कन्हैया॥
राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी।
`, mr: `राधे-राधे जपा येतील बिहारी।
राधे-राधे, राधे-राधे, राधे बरसान्यावाली॥
कृष्ण-राधेची जोडी सुंदर, पाहतच राहतो।
वृंदावनात रास रचवतो, गोपींसह नाचतो॥
राधे-राधे जपा येतील बिहारी।
` }, { title: 'जय यशोदा के नंदलाला', subtitle: 'Jai Yashoda Nandlala Aarti', hi: `जय यशोदा के नंदलाला, जय-जय माखन चोर।
गोकुल में खेलत हो, कर मुरली की टोर॥
जय यशोदा के नंदलाला।
पीताम्बर धारण किए, मोर मुकुट पर।
यमुना के तट पर खेलें, कान्हा सुंदरवर॥
कालिय नाग नाथा रे, दामोदर दीनदयाल।
गोवर्धन उठाया रे, गोकुल के रखवाल॥
जय यशोदा के नंदलाला, जय-जय माखन चोर॥
`, mr: `जय यशोदेच्या नंदलाला, जय-जय माखन चोर।
गोकुळात खेळतोस, मुरलीच्या सुरावर॥
जय यशोदेच्या नंदलाला।
पीतांबर परिधान, मोर मुकुट माथ्यावर।
यमुनाकिनारी खेळती, कान्हा सुंदरवर॥
जय यशोदेच्या नंदलाला, जय-जय माखन चोर॥
` }, { title: 'हे गोविंद हे गोपाल', subtitle: 'He Govind He Gopal — Vrindavan Aarti', hi: `हे गोविंद, हे गोपाल, हे दयाल, मुरारी।
भव-बाधा निवारो प्रभु, हो सहाय हमारी॥
द्वारिकाधीश, वासुदेव, देवकी के नंदन।
पांडवों के सखा सदा, दुर्योधन के भंजन॥
हे गोविंद, हे गोपाल।
गीता का उपदेश दिया, अर्जुन को ज्ञान।
कर्म-धर्म-मोक्ष-भक्ति, तुमने दिया मान॥
हे गोविंद, हे गोपाल, हे दयाल, मुरारी।
`, mr: `हे गोविंद, हे गोपाल, हे दयाल, मुरारी।
भव-बाधा निवार प्रभू, हो सहाय आमची॥
द्वारकाधीश, वासुदेव, देवकीचे नंदन।
पांडवांचा सखा सदा, दुर्योधनाचा भंजन॥
हे गोविंद, हे गोपाल।
गीतेचा उपदेश दिला, अर्जुनाला ज्ञान।
हे गोविंद, हे गोपाल, हे दयाल, मुरारी।
` }, { title: 'नंद के आनंद भयो', subtitle: 'Nand Ke Anand Bhayo — Janmashtami Special', hi: `नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥
नंद के आनंद भयो।
भादों की अंधियारी रात में, जन्म लिया कान्हा।
मथुरा नगरी में बाजे, शंख-ढोल-नगाड़ा॥
वसुदेव सिर पर धरके, पार किए यमुना।
गोकुल में यशोदा को, सौंपा रे दुलहना॥
नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।
`, mr: `नंदाला आनंद झाला, जय कन्हैया लाल की।
हत्ती घोडा पालखी, जय कन्हैया लाल की॥
नंदाला आनंद झाला।
भाद्रपदाच्या अंधाऱ्या रात्री, जन्म घेतला कान्हाने।
मथुरा नगरीत वाजती, शंख-ढोल-नगारे॥
नंदाला आनंद झाला, जय कन्हैया लाल की।
` } ] }, { id: 'balaji', name: 'बालाजी', name_en: 'Balaji Tirupati Aarti', icon: '⚡', color: '#B71C1C', seoDesc: 'बालाजी वेंकटेश्वर की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'जय जय श्री वेंकटेश', subtitle: 'Jai Jai Shri Venkatesh — Tirupati Balaji Aarti', hi: `जय जय श्री वेंकटेश, जय जय श्री वेंकटेश।
श्रीनिवास गोविंद, श्री वेंकटेश॥
जय जय श्री वेंकटेश।
तिरुपति के बालाजी, सातवें पहाड़ पर।
दर्शन करने आते हैं, लाखों भक्त हर पल॥
काली कलाई के स्वामी, सोने के मुकुट धारी।
पद्मावती के स्वामी, श्रीनिवास महारी॥
जय जय श्री वेंकटेश, जय जय श्री वेंकटेश।
`, mr: `जय जय श्री वेंकटेश, जय जय श्री वेंकटेश।
श्रीनिवास गोविंद, श्री वेंकटेश॥
जय जय श्री वेंकटेश।
तिरुपतीचे बालाजी, सातव्या डोंगरावर।
दर्शन घेण्यासाठी येती, लाखो भक्त प्रत्येक वेळी॥
पद्मावतीचे स्वामी, श्रीनिवास महारी॥
जय जय श्री वेंकटेश, जय जय श्री वेंकटेश।
` }, { title: 'गोविंद गोविंद हरि', subtitle: 'Govinda Govinda Hari — Vaishnava Aarti', hi: `गोविंद गोविंद हरि गोविंद।
वेंकटेश श्रीनिवास, गोविंद॥
आनंद नीलाद्रि के राजे, श्री बालाजी विराजे।
भक्तों के सब काज सँवारे, मंगल कर्म सजाजे॥
गोविंद गोविंद हरि गोविंद।
शेषाद्रि पर्वत पर बसे हो, ब्रह्मांड में व्यापत।
तिरुमाला के देव हो तुम, सब मंगल की चाहत॥
गोविंद गोविंद हरि गोविंद।
`, mr: `गोविंद गोविंद हरी गोविंद।
वेंकटेश श्रीनिवास, गोविंद॥
आनंद नीलाद्रिचे राजे, श्री बालाजी विराजे।
भक्तांचे सर्व कार्य सजवती, मंगल कर्म सजवती॥
गोविंद गोविंद हरी गोविंद।
` }, { title: 'श्री वेंकटेश स्तुति', subtitle: 'Venkatesh Stuti Aarti', hi: `जय हो जय हो बालाजी, जय तिरुपति वास।
श्री निवास भगवान, करो मेरी आस॥
शंख-चक्र-गदा-पद्म, चारों भुज धारे।
कौस्तुभ मणि वक्षस्थल, शोभा अति प्यारे॥
जय हो जय हो बालाजी।
लक्ष्मी और भूदेवी, दो भुजा में समाई।
भक्तों का रखवाला है, बालाजी सुखदाई॥
जय हो जय हो बालाजी, जय तिरुपति वास।
`, mr: `जय हो जय हो बालाजी, जय तिरुपती वास।
श्री निवास भगवान, करा माझी आस॥
शंख-चक्र-गदा-पद्म, चारही भुज धरले।
जय हो जय हो बालाजी।
लक्ष्मी आणि भूदेवी, दोन बाजूंनी साथ।
भक्तांचा रक्षक हा, बालाजी सुखदाता॥
जय हो जय हो बालाजी, जय तिरुपती वास।
` }, { title: 'वेंकटरमणा गोविंद', subtitle: 'Venkataramana Govinda Aarti', hi: `वेंकटरमणा गोविंद, वेंकटरमणा गोविंद।
तिरुपति देवा, जय हो प्रभु॥
सातों पहाड़ों के देवा, आनंदनिलयम्।
बालाजी के दर्शन से, होत है मोक्षम्॥
वेंकटरमणा गोविंद।
पुलहोरा और लड्डू, प्रसाद तुम्हारा।
तिरुमाला के स्वामी, करते हैं उद्धारा॥
वेंकटरमणा गोविंद, वेंकटरमणा गोविंद।
`, mr: `वेंकटरमणा गोविंद, वेंकटरमणा गोविंद।
तिरुपती देवा, जय हो प्रभू॥
सात डोंगरांचे देवा, आनंदनिलयम्।
बालाजीच्या दर्शनाने, होते मोक्षम्॥
वेंकटरमणा गोविंद।
पुलिहोरा आणि लाडू, प्रसाद तुझा।
वेंकटरमणा गोविंद, वेंकटरमणा गोविंद।
` }, { title: 'हे बालाजी आरती', subtitle: 'He Balaji — Bhakta Ki Ardaas', hi: `हे बालाजी, हे बालाजी, दर्शन दो प्रभु।
तिरुमाला नगरी में, बसे हो सदा तुम॥
केश दान करते हैं, भक्त तुम्हारे।
मनोकामना पूर्ण होती, दर्शन के द्वारे॥
हे बालाजी, हे बालाजी।
गोमाता की सेवा करके, पुण्य संचित।
बालाजी के पद में, हो मन समर्पित॥
कोटि-कोटि नमस्कार, श्रीनिवास स्वामी।
भक्त कामना पूरन करो, अंतर्यामी॥
हे बालाजी, हे बालाजी, दर्शन दो प्रभु।
`, mr: `हे बालाजी, हे बालाजी, दर्शन द्या प्रभू।
तिरुमाला नगरीत, वसलात सदा तुम्ही॥
केश दान करतात, भक्त तुमचे।
मनोकामना पूर्ण होते, दर्शनाने॥
हे बालाजी, हे बालाजी।
कोटी-कोटी नमस्कार, श्रीनिवास स्वामी।
हे बालाजी, हे बालाजी, दर्शन द्या प्रभू।
` } ] }, { id: 'navgrah', name: 'नवग्रह', name_en: 'Navgrah Aarti', icon: '🪐', color: '#004D40', seoDesc: 'नवग्रह आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'नवग्रह स्तुति आरती', subtitle: 'Navgrah Stuti — Nine Planet Aarti', hi: `जय जय नवग्रह देव, सब मिलकर गाओ।
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु शुक्र शनि राहु केतु।
नव ग्रहों की आरती से, दूर हों सब दुख॥
भास्कर सूर्य देव की जय, रोग दूर भगाओ।
सोमदेव चंद्रमा की, मन शीतल कराओ॥
जय जय नवग्रह देव।
मंगल भौम की जय, भूमि पुत्र जय।
बुध देव की जय बोलो, बुद्धि दो वर्धन॥
जय जय नवग्रह देव, सब मिलकर गाओ।
`, mr: `जय जय नवग्रह देव, सब मिळून गाओ।
सूर्य, चंद्र, मंगळ, बुध, गुरू शुक्र शनी राहू केतू।
नऊ ग्रहांच्या आरतीने, दूर होवोत सर्व दुख॥
जय जय नवग्रह देव।
मंगळ भौमाचा जय, भूमीपुत्र जय।
बुध देवाचा जय बोला, बुद्धी द्या वर्धन॥
जय जय नवग्रह देव, सब मिळून गाओ।
` }, { title: 'सूर्य देव आरती', subtitle: 'Surya Dev Aarti — Sunday Special', hi: `जय जय जय दिनकर देवा, जय रवि सूर्यनारायण।
भास्कर तेज विराजित, प्रचंड रश्मि प्रतापी॥
जय जय जय दिनकर देवा।
सात रथों पर सवार हो, सात घोड़े जोते।
अरुण सारथि के संग में, ब्रह्मांड को रोशन करते॥
जल चढ़ाओ सूर्य को, तांबे के पात्र में।
शनि की दशा कटे, बढ़े भाग्य चमक में॥
जय जय जय दिनकर देवा, जय रवि सूर्यनारायण॥
`, mr: `जय जय जय दिनकर देवा, जय रवी सूर्यनारायण।
भास्कर तेज विराजित, प्रचंड रश्मी प्रतापी॥
जय जय जय दिनकर देवा।
सात रथांवर स्वार, सात घोडे जोडले।
अरुण सारथ्यासह, ब्रह्मांड उजळवले॥
जय जय जय दिनकर देवा, जय रवी सूर्यनारायण॥
` }, { title: 'शनि देव आरती', subtitle: 'Shani Dev Aarti — Saturday Special', hi: `जय जय श्री शनिदेव, महाराज जय।
नीलांबर धारी प्रभु, काकध्वज जय॥
जय जय श्री शनिदेव।
काले तिल, उड़द, तेल, लोहे से पूजन।
शनि शांति के लिए करो, नित्य ध्यान भजन॥
सूर्यपुत्र शनिदेव, सब ग्रहों के राजा।
न्याय करते कर्म का, दंड का मिलता मजा॥
जय जय श्री शनिदेव, महाराज जय।
`, mr: `जय जय श्री शनीदेव, महाराज जय।
नीलांबर धारी प्रभू, काकध्वज जय॥
जय जय श्री शनीदेव।
काळे तीळ, उडीद, तेल, लोखंडाने पूजन।
शनी शांतीसाठी करा, नित्य ध्यान भजन॥
जय जय श्री शनीदेव, महाराज जय।
` }, { title: 'राहु-केतु आरती', subtitle: 'Rahu Ketu Aarti — Grahan Dosh Nivaran', hi: `जय राहु देव, जय केतु देव, ग्रह श्रेष्ठ जय।
छाया के दोनों छोर हो, ग्रहण का आश्रय॥
राहु दोष निवारण के, नीले पुष्प चढ़ाओ।
केतु की शांति के लिए, बहुरंगे फूल लाओ॥
जय राहु देव, जय केतु देव।
कालसर्प दोष कटे, राहु-केतु के पूजन से।
जीवन में आए सुख, दुखों से मुक्ति मिले॥
जय राहु देव, जय केतु देव, ग्रह श्रेष्ठ जय॥
`, mr: `जय राहू देव, जय केतू देव, ग्रह श्रेष्ठ जय।
छायेचे दोन्ही टोक, ग्रहणाचा आश्रय॥
राहू दोष निवारणासाठी, निळी फुले वाहा।
केतू शांतीसाठी, बहुरंगी फुले आणा॥
जय राहू देव, जय केतू देव।
कालसर्प दोष कटे, राहू-केतू पूजनाने।
जय राहू देव, जय केतू देव, ग्रह श्रेष्ठ जय॥
` }, { title: 'नवग्रह मंगलाष्टक आरती', subtitle: 'Navgrah Mangalashtak — Sampoorna Navgrah', hi: `सूर्याय नमः, चंद्राय नमः, भौमाय नमः।
बुधाय नमः, गुरवे नमः, शुक्राय नमः।
शनये नमः, राहवे नमः, केतवे नमः॥
सर्वग्रह शांतिकरो, नवग्रह नमः।
जन्मकुंडली में जो, दोष ग्रहों के।
नवग्रह पूजा से दूर करो, सब बाधाएं॥
वेदशास्त्र विधि से पूजो, नवग्रह सब।
जीवन में आए खुशियाँ, हर दिन नव॥
सूर्याय नमः, चंद्राय नमः, सर्वग्रह नमः॥
`, mr: `सूर्याय नमः, चंद्राय नमः, भौमाय नमः।
बुधाय नमः, गुरवे नमः, शुक्राय नमः।
शनये नमः, राहवे नमः, केतवे नमः॥
सर्वग्रह शांतिकरो, नवग्रह नमः।
जन्मकुंडलीत जे, दोष ग्रहांचे।
नवग्रह पूजेने दूर करा, सर्व बाधा॥
सूर्याय नमः, चंद्राय नमः, सर्वग्रह नमः॥
` } ] }, { id: 'lakshmi', name: 'लक्ष्मी जी', name_en: 'Lakshmi Ji Aarti', icon: '🪷', color: '#AD1457', seoDesc: 'लक्ष्मी जी की आरती हिंदी और मराठी में — Diwali Special', aartiList: [ { title: 'ॐ जय लक्ष्मी माता', subtitle: 'Om Jai Lakshmi Mata — Diwali Aarti', hi: `ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता।
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता॥
`, mr: `ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम्हाला निशिदिन सेवती, हरी विष्णू धाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तू जग-माता।
सूर्य-चंद्र ध्यावती, नारद ऋषी गाता॥
दुर्गा रूप निरंजनी, सुखसंपत्ती दाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता॥
` }, { title: 'लक्ष्मी चालीसा आरती', subtitle: 'Lakshmi Chalisa Opening Aarti', hi: `जय माँ लक्ष्मी, जय माँ लक्ष्मी।
धन-धान्य की देवी, करो कृपा भारी॥
कमल पर विराजे हो, सुवर्ण वर्ण धारी।
हाथ में कलश सोहे, श्रीफल अति प्यारी॥
जय माँ लक्ष्मी।
दीपावली के दिन पर, आरती उतारूं।
माँ लक्ष्मी को मनाऊं, सुख-समृद्धि लाऊं॥
जय माँ लक्ष्मी, जय माँ लक्ष्मी।
`, mr: `जय माँ लक्ष्मी, जय माँ लक्ष्मी।
धन-धान्याची देवी, करा कृपा भारी॥
कमळावर विराजे, सुवर्ण वर्ण धारी।
हाती कलश शोभे, श्रीफळ अतिप्रिय॥
जय माँ लक्ष्मी।
दिवाळीच्या दिवशी, आरती उतरवतो।
जय माँ लक्ष्मी, जय माँ लक्ष्मी।
` }, { title: 'महालक्ष्मी आरती', subtitle: 'Mahalakshmi Aarti — Wealth Goddess', hi: `जय महालक्ष्मी माता, जय जय माँ।
संपत्ति-ऋद्धि-सिद्धि दो, करो दया माँ॥
श्वेत कमल पर बैठी, गज से सींचती।
श्री और लक्ष्मी तुम हो, धन-वैभव देती॥
जय महालक्ष्मी माता।
अष्टलक्ष्मी के रूप में, आओ माँ हमारे।
आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी सुंदर।
गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी आकर॥
जय विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, माँ की जय।
जय महालक्ष्मी माता, जय जय माँ।
`, mr: `जय महालक्ष्मी माता, जय जय माँ।
संपत्ती-ऋद्धी-सिद्धी दे, करा दया माँ॥
श्वेत कमळावर बसली, गजाने सींचली।
श्री आणि लक्ष्मी तू, धन-वैभव देसी॥
जय महालक्ष्मी माता।
अष्टलक्ष्मींच्या रूपात, ये माँ आमच्याकडे।
जय महालक्ष्मी माता, जय जय माँ।
` }, { title: 'लक्ष्मी-गणेश आरती', subtitle: 'Lakshmi Ganesh Aarti — Diwali Puja', hi: `जय जय लक्ष्मी गणेश पूजो, दीपावली की रात।
माँ लक्ष्मी और गणपति, साथ पधारो साथ॥
दीप जलाओ, लाल फूल चढ़ाओ।
मिठाई का भोग लगाओ, जय-जय गाओ॥
जय जय लक्ष्मी गणेश।
घर में सुख-शांति हो, व्यापार में उन्नति।
लक्ष्मी की कृपा से, जीवन हो उन्नति॥
जय जय लक्ष्मी गणेश पूजो, दीपावली की रात।
`, mr: `जय जय लक्ष्मी गणेश पूजा, दीपावलीची रात।
माँ लक्ष्मी आणि गणपती, सोबत या सोबत॥
दीप लावा, लाल फुले वाहा।
मिठाईचा भोग लावा, जय-जय गाओ॥
जय जय लक्ष्मी गणेश।
घरात सुख-शांती हो, व्यापारात उन्नती।
जय जय लक्ष्मी गणेश पूजा, दीपावलीची रात।
` }, { title: 'श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर आरती', subtitle: 'Lakshmi Ashtottara Shatanam Aarti', hi: `श्री महालक्ष्मी नमस्ते, कमलासनी जय।
पद्माक्षी पद्मवदनी, भव-भय-हारी जय॥
चंद्रसदृशी कान्तिमति, कमलनयनी देवी।
सौभाग्य-सुख-सम्पदा, दाती भव-सेवी॥
श्री महालक्ष्मी नमस्ते।
धन-धान्य-पुत्र-सौख्य, दो माँ भगवती।
भक्तों पर कृपा करो, विपत्ति-हारती॥
श्री महालक्ष्मी नमस्ते, कमलासनी जय।
`, mr: `श्री महालक्ष्मी नमस्ते, कमलासनी जय।
पद्माक्षी पद्मवदनी, भव-भय-हारी जय॥
चंद्रसदृश कांतिमती, कमलनयनी देवी।
श्री महालक्ष्मी नमस्ते।
धन-धान्य-पुत्र-सौख्य, दे माँ भगवती।
श्री महालक्ष्मी नमस्ते, कमलासनी जय।
` } ] }, { id: 'durga', name: 'दुर्गा माता', name_en: 'Durga Mata Aarti', icon: '⚔️', color: '#BF360C', seoDesc: 'दुर्गा माता की आरती हिंदी और मराठी में — Navratri Special', aartiList: [ { title: 'जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी', subtitle: 'Jai Durge Durgatinashini — Navratri Aarti', hi: `जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी, जय भक्त उद्धारिणी।
जगत-सृष्टि स्थिति संहारिणी, त्रिगुण-धारिणी माता॥
जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी।
सिंहवाहिनी महाशक्ति, अष्टभुज सुंदरी।
त्रिनयनी मां त्रिशूलधारी, चंडी मुंडमाली॥
महिषासुर का संहार किया, शुंभ-निशुंभ मार।
रक्तबीज को मारकर, किया जगत उद्धार॥
जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी।
`, mr: `जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी, जय भक्त उद्धारिणी।
जगत-सृष्टी स्थिती संहारिणी, त्रिगुण-धारिणी माता॥
जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी।
सिंहवाहिनी महाशक्ती, अष्टभुज सुंदरी।
त्रिनयनी माँ त्रिशूलधारी, चंडी मुंडमाली॥
जय दुर्गे दुर्गतिनाशिनी।
` }, { title: 'चंडी पाठ आरती', subtitle: 'Chandi Path Aarti — Ashwin Navratri', hi: `जय चंडी माँ, जय चंडी माँ, जय चंडी देवी।
चंडी पाठ सुनाओ, करो मन की सेवी॥
सप्तशती का पाठ करें, नौ दिन नवरात्रि।
माँ चंडी के भजन से, होत मंगल रात्री॥
जय चंडी माँ।
भैरव और चंडी माता, जोड़ी अनूप।
हर रोग-दोष-संकट से, बचाओ माँ भूप॥
जय चंडी माँ, जय चंडी माँ, जय चंडी देवी।
`, mr: `जय चंडी माँ, जय चंडी माँ, जय चंडी देवी।
चंडी पाठ ऐकवा, करा मन सेवी॥
सप्तशतीचा पाठ करा, नऊ दिन नवरात्र।
माँ चंडीच्या भजनाने, होतो मंगल रात्री॥
जय चंडी माँ।
भैरव आणि चंडी माता, जोडी अनुपम।
जय चंडी माँ, जय चंडी माँ, जय चंडी देवी।
` }, { title: 'माँ दुर्गा का भजन', subtitle: 'Durga Bhajan Aarti — Shakti Upasana', hi: `जगदम्बे जय, जगदम्बे जय, जगदम्बे जय।
आदिशक्ति, महाशक्ति, भवानी की जय॥
काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी माता।
भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती विधाता॥
बगलामुखी, मातंगी, कमला जगत-दाता।
दश महाविद्या रूप में, तुम ही एक माता॥
जगदम्बे जय, जगदम्बे जय।
`, mr: `जगदंबे जय, जगदंबे जय, जगदंबे जय।
आदिशक्ती, महाशक्ती, भवानीची जय॥
काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी माता।
दश महाविद्या रूपात, तू एकच माता॥
जगदंबे जय, जगदंबे जय।
` }, { title: 'शेरावाली माँ', subtitle: 'Sherawali Maa Aarti — Vaishnav Devi', hi: `आया मेला माँ शेरावाली का।
आया मेला माँ शेरावाली का, जय जय माँ जगदम्बे॥
माँ तेरे दर की चाहत है, मन में बड़ी ललक है।
पहाड़ों पर विराजे माँ, दूर से दिखती है लौ॥
आया मेला माँ शेरावाली का।
लाल चुनरी ओढ़े हो, माँ सिंहासन पर।
शीश पर मुकुट सोहे, करे मंगल सत्वर॥
आया मेला माँ शेरावाली का।
`, mr: `आला मेळा माँ शेरावालीचा।
जय जय माँ जगदंबे, शेरावालीचा मेळा॥
माँ तुझ्या दाराची इच्छा, मनात मोठी ओढ।
डोंगरावर विराजे माँ, दुरून दिसते ज्योत॥
आला मेळा माँ शेरावालीचा।
` }, { title: 'दुर्गा पूजा आरती', subtitle: 'Durga Puja Aarti — Navami Special', hi: `जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा।
नवरात्रि में आओ माँ, करो कृपा भारी॥
कन्या पूजन करते हम, नव कन्या जिमाते।
माँ के रूप नौ दुर्गा, हर घर में सजाते॥
जय माँ दुर्गा।
हवन-पूजन-व्रत करें, नौ दिन नवरात्रे।
माँ दुर्गा का आशीष मिले, जीवन हो उत्तम॥
विसर्जन की बेला आई, भारी मन से जाते।
फिर आना माँ अगले साल, दिल से बुलाते॥
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा।
`, mr: `जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा।
नवरात्रीत या माँ, करा कृपा भारी॥
कन्या पूजन करतो, नऊ कन्या जेवतो।
माँच्या रूप नऊ दुर्गा, प्रत्येक घरी सजवतो॥
जय माँ दुर्गा।
हवन-पूजन-उपवास, नऊ दिन नवरात्र।
विसर्जनाची वेळ आली, जड मनाने जातो।
पुन्हा या माँ पुढच्या वर्षी, दिलाने बोलावतो॥
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा।
` } ] }, { id: 'vishnu', name: 'विष्णु जी', name_en: 'Vishnu Ji Aarti', icon: '🌀', color: '#0D47A1', seoDesc: 'विष्णु जी की आरती हिंदी और मराठी में', aartiList: [ { title: 'जय विष्णु भगवान', subtitle: 'Jai Vishnu Bhagwan — Ekadashi Aarti', hi: `जय विष्णु भगवान, जय जगदीश हरे।
स्वामी जय जगदीश हरे॥
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट।
क्षण में दूर करे, ॐ जय जगदीश हरे॥
जय विष्णु भगवान।
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
जय विष्णु भगवान, जय जगदीश हरे।
`, mr: `जय विष्णू भगवान, जय जगदीश हरे।
स्वामी जय जगदीश हरे॥
भक्त जनांचे संकट, दास जनांचे संकट।
क्षणात दूर करे, ॐ जय जगदीश हरे॥
जय विष्णू भगवान।
जो ध्यान करतो फळ पावतो, दुख नाहीसे मनाचे।
सुखसंपत्ती घरी येई, कष्ट मिटती तनाचे॥
जय विष्णू भगवान, जय जगदीश हरे।
` }, { title: 'ॐ जय जगदीश हरे', subtitle: 'Om Jai Jagadish Hare — Universal Aarti', hi: `ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट।
क्षण में दूर करे, ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥
`, mr: `ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनांचे संकट, दास जनांचे संकट।
क्षणात दूर करे, ॐ जय जगदीश हरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सर्वांचे स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥
` }, { title: 'विष्णु सहस्रनाम आरती', subtitle: 'Vishnu Sahasranam Aarti', hi: `जय श्री विष्णु, जय नारायण, जय हरि विष्णु।
सहस्र नाम तुम्हारे, पढ़ते हैं हम।
विश्वंभर विश्वनाथ, चक्रपाणि प्रभु॥
शंख-चक्र-गदाधारी, पीताम्बर-धारी।
क्षीरसागर में सोते, लक्ष्मी-पति भारी॥
जय श्री विष्णु, जय नारायण।
दशावतार लिए हो, जगत को बचाने।
मत्स्य-कूर्म-वाराह से, नर-वानर बनाने॥
जय श्री विष्णु, जय नारायण, जय हरि विष्णु।
`, mr: `जय श्री विष्णू, जय नारायण, जय हरी विष्णू।
सहस्र नाम तुझी, वाचतो आम्ही।
विश्वंभर विश्वनाथ, चक्रपाणी प्रभू॥
शंख-चक्र-गदाधारी, पीतांबर-धारी।
जय श्री विष्णू, जय नारायण, जय हरी विष्णू।
` }, { title: 'नारायण नारायण', subtitle: 'Narayan Narayan — Bhajan Aarti', hi: `नारायण नारायण, जय गोविंद हरे।
नारायण नारायण, जय गोपाल हरे॥
करुणानिधान आनंद कंद, गोविंद जय जय।
यदुकुलतिलक दीनबंधु, माधव जय जय॥
नारायण नारायण।
अचल निरंतर अनंत अव्यय, पुरुष पुरातन।
परम ब्रह्म परमात्मन् श्रीहरि, नारायण॥
नारायण नारायण, जय गोविंद हरे।
`, mr: `नारायण नारायण, जय गोविंद हरे।
नारायण नारायण, जय गोपाल हरे॥
करुणानिधान आनंद कंद, गोविंद जय जय।
नारायण नारायण।
अचल निरंतर अनंत अव्यय, पुरुष पुरातन।
नारायण नारायण, जय गोविंद हरे।
` }, { title: 'पंढरपूर आरती', subtitle: 'Pandharpur Vitthal Aarti — Maharashtra Special', hi: `पुंडलीक वरदा हरि विठ्ठल, श्री विठ्ठल श्री विठ्ठल।
पंढरपुर में विराजे, पांडुरंग भोले॥
वारी करते संत-जन, भाव से आते।
नामदेव-तुकाराम-ज्ञानेश्वर, भजन गाते॥
पुंडलीक वरदा हरि विठ्ठल।
भीमा नदी के तट पर, तुम खड़े हो।
ईंट पर कटिवर करें, भक्त मोहित हो॥
पुंडलीक वरदा हरि विठ्ठल, श्री विठ्ठल श्री विठ्ठल।
`, mr: `पुंडलीक वरदा हरी विठ्ठल, श्री विठ्ठल श्री विठ्ठल।
पंढरपुरात विराजे, पांडुरंग भोले॥
वारी करतात संत-जन, भावाने येतात।
नामदेव-तुकाराम-ज्ञानेश्वर, भजन गातात॥
पुंडलीक वरदा हरी विठ्ठल।
भीमा नदीच्या काठावर, उभे आहात तुम्ही।
विटेवर कटीवर करांनी, भक्त मोहित होती॥
पुंडलीक वरदा हरी विठ्ठल, श्री विठ्ठल श्री विठ्ठल।
` } ] } ]; // ============================================================ // BUILD UI // ============================================================ const catListEl = document.getElementById('catList'); const sectionsContainer = document.getElementById('sectionsContainer'); const breadcrumbCat = document.getElementById('breadcrumbCat'); let currentLang = 'hi'; let activeCat = DATA[0].id; function buildSidebar() { DATA.forEach(cat => { const li = document.createElement('li'); li.className = 'cat-item'; li.setAttribute('role','listitem'); const btn = document.createElement('button'); btn.className = 'cat-btn' + (cat.id === activeCat ? ' active' : ''); btn.setAttribute('aria-label', cat.name + ' aarti'); btn.dataset.catId = cat.id; btn.innerHTML = `${cat.seoDesc}
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