शीतला सप्तमी 2026: कब है शीतला सप्तमी? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और कथा | sheetala-saptami-2026-date-time-mahatva
सनातन धर्म में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें शीतला सप्तमी का विशेष महत्व है। यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।
इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से चेचक, छोटी माता, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव होता है तथा परिवार को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि शीतला सप्तमी 2026 कब है, इसका महत्व क्या है, पूजा विधि क्या है और इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है।

शीतला सप्तमी 2026 कब है?
वर्ष 2026 में शीतला सप्तमी 10 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएगी।
सप्तमी तिथि प्रारंभ: Date and Time
9 मार्च 2026 – रात 11:30 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त:
10 मार्च 2026 – सुबह 01:57 बजे
उदय तिथि के अनुसार यह पर्व 10 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
शीतला सप्तमी 2026 का शुभ योग
इस वर्ष शीतला सप्तमी पर एक शुभ योग बन रहा है।
हर्षण योग:
10 मार्च 2026 को सुबह 08:20 बजे तक रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग बहुत शुभ माना जाता है। इस योग में पूजा, दान, धार्मिक कार्य और शुभ कार्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है। यह योग सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सम्मान दिलाने वाला माना गया है।
शीतला सप्तमी का महत्व
शीतला सप्तमी का संबंध स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोगों से सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार:
- शीतला माता की पूजा करने से बीमारियों से रक्षा होती है
- चेचक, चिकनपॉक्स और अन्य संक्रमण से बचाव होता है
- परिवार को निरोगी जीवन का आशीर्वाद मिलता है
- घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है
पुराने समय में जब चेचक जैसी बीमारियाँ बहुत फैलती थीं, तब लोग शीतला माता की पूजा करके उनसे रक्षा की प्रार्थना करते थे। इसी कारण यह पर्व स्वास्थ्य और रोगों से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
कौन हैं शीतला माता?
पौराणिक मान्यता के अनुसार शीतला माता देवी पार्वती का ही एक रूप हैं।
शीतला माता को आमतौर पर गधे पर सवार दिखाया जाता है और उनके हाथों में कुछ विशेष वस्तुएँ होती हैं:
- झाड़ू – स्वच्छता का प्रतीक
- नीम के पत्ते – औषधीय गुणों का प्रतीक
- जल का कलश – जीवन और शुद्धता का प्रतीक
नीम और स्वच्छता का संबंध स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।
शीतला सप्तमी पर क्या करें?
शीतला सप्तमी के दिन कुछ विशेष धार्मिक कार्य किए जाते हैं:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शीतला माता की पूजा करें।
- माता के मंदिर जाकर निरोगी जीवन की प्रार्थना करें।
- घर और आसपास की साफ-सफाई करें।
- माता को ठंडे भोजन का भोग लगाएं।
- जरूरतमंद लोगों को दान करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करें।
शीतला सप्तमी 2026 की पूजा विधि
शीतला सप्तमी के दिन पूजा करने की विधि इस प्रकार है:
- सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करें।
- घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर शीतला माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- माता को लाल वस्त्र, फूल और चंदन अर्पित करें।
- नीम के पत्ते और जल अर्पित करें।
- शीतला माता के मंत्र और शीतला अष्टक का पाठ करें।
- माता को बासी या ठंडा भोजन का भोग लगाएं।
- अंत में शीतला माता की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
इस दिन एक विशेष नियम होता है कि घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाया जाता। भोजन एक दिन पहले यानी षष्ठी तिथि को बनाकर रखा जाता है। इसे रंधन छठ भी कहा जाता है।
शीतला सप्तमी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार कुछ लोग रास्ता भटक गए और उन्हें एक झील तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिल रहा था। तभी एक वृद्ध महिला वहां आई और उसने उन्हें सही रास्ता दिखाया।
उस महिला ने उन्हें शीतला सप्तमी का व्रत करने की भी सलाह दी। बाद में लोगों को पता चला कि वह कोई साधारण महिला नहीं बल्कि स्वयं शीतला माता थीं।
उनमें से एक महिला की भक्ति से प्रसन्न होकर शीतला माता ने उसे वरदान देने की बात कही। बाद में उस महिला ने एक मृत ब्राह्मण को जीवित करने के लिए माता से प्रार्थना की और माता की कृपा से वह जीवित हो गया।
तभी से शीतला सप्तमी व्रत की महिमा और भी बढ़ गई।
निष्कर्ष
शीतला सप्तमी सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोगों से सुरक्षा का संदेश देता है। इस दिन श्रद्धा और नियम से शीतला माता की पूजा करने से परिवार को सुख, शांति और निरोगी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
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