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सूर्य महादशा के नैसर्गिक शुभ-अशुभ फल | surya grah mahadasha

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सूर्य महादशा का नैसर्गिक फल (संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप में)

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सूर्य महादशा के सामान्य प्रभाव क्या है ? surya grah mahadasha

  • विदेश यात्रा और विदेशवास की संभावना।
  • भूमि, राजकार्य, ब्राह्मण, अग्नि, शास्त्र तथा औषधि से धन की हानि या प्राप्ति।
  • यंत्र-मंत्र, तंत्र और आध्यात्मिक विषयों में रुचि।
  • राज्य पुरुषों, राजनीतिज्ञों और अधिकारियों से मित्रता।
  • भाई-बंधुओं से शत्रुता, स्त्री-पुत्र-पिता से वियोग या चिंता।
  • नेत्र, दांत और उदर रोगों की पीड़ा।
  • पशुधन, नौकरी और धन में हानि-लाभ दोनों संभव।

सूर्य ग्रह शुभ-अशुभ स्थिति

  • सूर्य महादशा मूलतः मिश्रित फल देती है।
  • यदि सूर्य लग्न, पंचम या दशम भाव में हो तो शुभ फल देता है।
  • अन्य भावों में सूर्य प्रायः अशुभ फल देता है।
  • शनि, मंगल और चंद्र की अंतर्दशा में अशुभ फल अधिक होते हैं।

सूर्य का विभिन्न राशियों में फल ?

  • अग्नि तत्व राशियाँ (मेष, सिंह, धनु)
    • मेष: अत्यंत अशुभ
    • सिंह: मध्यम
    • धनु: तुलनात्मक रूप से शुभ
  • पृथ्वी तत्व राशियाँ (वृषभ, कन्या, मकर) → सामान्य फल
  • वायु तत्व राशियाँ (मिथुन, तुला, कुंभ) → तुलनात्मक रूप से शुभ
  • जल तत्व राशियाँ (कर्क, वृश्चिक, मीन) → सामान्य फल

भाव अनुसार सूर्य महादशा का फल

भावफल
लग्ननेत्र-दांत रोग, धन हानि, राजकीय कष्ट
द्वितीयसंतान उत्पत्ति, स्त्री से झगड़ा, भूमि-वाहन का नाश
तृतीयराजसम्मान, धन प्राप्ति, पराक्रम से उन्नति
चतुर्थस्त्री-संतान-बंधु हानि, भूमि हानि, अग्नि/चोरी का भय
पंचममन दुखी, पिता का अपमान
षष्ठशत्रु से धन लाभ, मूत्र व उदर रोग
सप्तमस्त्री रोग, मृत्यु की आशंका, वैवाहिक कठिनाई
अष्टमनेत्र-दंत-उदर रोग, जीवन संकट
नवमपिता की मृत्यु, राजकीय अपमान, धर्म में अरुचि
दशमराज्य सम्मान, अधिकार, कार्य सफलता
एकादशधन लाभ, उत्तम कार्यों में रुचि, स्त्री-पुत्र-भूमि सुख
द्वादशविदेश भ्रमण, धन-पुत्र-परिवार हानि, नेत्र-पैर रोग

सूर्य महादशा का नैसर्गिक फल (सुस्पष्ट रूप में)

इस प्रकार हम देखते हैं कि सूर्य की महादशा में जातक को शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के परिणाम प्राप्त होते हैं।

शुभ फल

  • सूर्य यदि तृतीय, षष्ठ, दशम और एकादश भाव में स्थित हो तो जातक को शुभ फल प्राप्त होते हैं।
  • इन भावों में सूर्य राजसम्मान, पराक्रम, कार्यसिद्धि, धनलाभ और उन्नति प्रदान करता है।
  • विद्या और ज्ञान से प्रगति होती है तथा जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • सूर्य की दशा का फल उसकी अवस्था, युति और दृष्टि पर निर्भर करता है।
  • यदि सूर्य शत्रु ग्रहों से पीड़ित हो या नीच राशि में हो तो अशुभ फल अधिक होते हैं।
  • मित्र ग्रहों की दृष्टि या शुभ स्थिति में सूर्य के फल उत्तम हो जाते हैं।

अशुभ फल

  • सूर्य की दशा-अंतर्दशा में माता-पिता को मानसिक व्यथा और कष्ट हो सकता है।
  • दशा के मध्य भाग में पशुधन और धन की हानि तथा मानसिक पीड़ा की संभावना रहती है।
  • नेत्र, दांत और उदर संबंधी रोग भी उत्पन्न हो सकते हैं।
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