चंद्र ग्रहण chandra grahan
चंद्र ग्रहण चंद्र ग्रहण chandra grahan

Chandrma Ka Vibhinn Rashiyo Me Prabhav : चन्द्रमा का विभिन्न राशियों में प्रभाव |

astrologer

मेष : –

मेष राशि का स्वामी मंगल है जो कि चंद्रमा से मित्रता रखता है इसलिए मेष राशि चंद्रमा की मित्र होगी जिसके प्रभाव से जातक का दृढ़ शरीर होता है। चंद्रमा मेष राशि में हो तो जातक पुत्रवान, स्वजनों से रहित एव अस्थिर होता है। जातक की स्थिर सम्पत्ति होती है एवं जातक स्वयं की कार्य दक्षता से यश अर्जित करने वाला होता है। ऐसे जातक को सदैव जल से तथा उँचे स्थान से गिरने का भय होता है। जातक उतावला व कामी भी होता है।

वृषभ : –

वृषभ राशि के 3 अंश तक चंद्रमा उच्च का होता है । 3 अंश के बाद चंद्रमा मुलत्रिकोण में होता है। इस प्रकार चंद्रमा के वृषभ राशि में होने से जातक सुंदर, संतोषी, चपल, दृढ़ शरीर वाला एवं मिष्ठान प्रिय होता है। जातक शांत, भोगी. विलासी व सुखी होता है। जातक राज सम्मान प्राप्त करने वाला है। जातक स्त्री-पुत्र एवं धन से सुखी होता है। होता जातक कुशल, परोपकारी, चित्रकला, संगीत तथा काव्य-कला का प्रेमी होता है | ऐसे जातक कफ रोग ,शीत रोग , नैत्र रोग तथा जल से संबंधित रोगों से पीड़ित हो सकते है |

 मिथुन : –

मिथुन राशि का स्वामी बुध है जो कि चंद्रमा का पुत्र कहा जाता है। चंद्रमा बुध से मित्रता का भाव रखता है। किंतु बुध चंद्रमा से वैर भाव रखता है। इस प्रकार चंद्रमा के मिथुन राशि में स्थित होने 10 से जातक सुंदर होता है। ऐसे जातक का मिश्रित स्वभाव होता है। जातक कामी व भोगी होता है। मिथुन राशि में चंद्रमा के प्रभाव से जातक हास्यप्रिय होता है। जातक विद्वान होता है एवं स्त्री द्वारा प्रेम प्राप्त करता है। जातक व्यवसाय में एक से अधिक बार परिवर्तन करता है।

कर्क : –

कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। कर्क राशि में चंद्रमा स्वराशि का होता है जिसके शुभ प्रभाव से जातक संततिवान, संपत्तिवान व धनवान होता है। जातक का गौर वर्ण होता है। कर्क राशि में स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक , वेदशास्त्रज्ञ, कला-कौशल, लोक-विख्यात एवं कीर्तिवान होता है । जातक जल क्रीडा करने वाला, जल संबंधी व्यापार, जल स्थान के समीप सफल एवं जल यात्रा का प्रेमी होता है। ऐसा जातक कला कुशल भी होता है एवं संगीत तथा चित्रकला में रूचि रखता है। जातक की बुद्धि निर्मल व उच्च कोटि की होती है। जातक कामी होता है। जातक की ज्योतिष शास्त्र में रूचि होती है। जातक उन्माद रोगी होता है। जातक वस्तुओं का संग्रहकर्त्ता और प्रेमी स्वभाव होता है।

सिंह : –

सिंह राशि का स्वामी सूर्य है जो चंद्रमा का परम मित्र है इसलिए सिंह राशि चंद्रमा की मित्र राशि होगी। सिंह राशि में चंद्रमा के होने से जातक का बड़ा चेहरा व मोटी ठोड़ी होती है। जातक दृढ़ शरीर वाला होता है । 12 जातक वन-पर्वतों में भ्रमण करने वाला, राजकीय क्षेत्र में उन्नति तथा धन पाने वाला होता है। जातक सुशील, विदेश-यात्रा प्रिय, स्थिर-बुद्धि वाला एंव निष्कपटी होता है। जातक मातृ प्रेमी, विद्वान, उच्चपद पाने के लिए प्रयत्नशील तथा स्त्रियों से मतभेद रखने वाला होता है। जातक को पेट व संबंधी रोग हो सकते है। जातक दानी व परहित की कामना रखता है।

कन्या : –

कन्या राशि का स्वामी बुध है। बुध चंद्रमा से शत्रुता का भाव रखता है किन्तु चंद्रमा बुध से मित्रता का भाव रखता है इसलिए कन्या राशि में चंद्रमा के लिए सम राशि होगी । कन्या राशि में चंद्रमा के स्थित होने से जातक उन्नत शरीर, गौर वर्ण वाला एवं सुन्दर होता है। जातक अनेक विधाओं का ज्ञाता, चतुर, सुशील एवं सत्कर्म करने वाला होता है। ऐसा जातक भाग्यशाली स्त्रियों को प्रसन्नतादायक व स्त्री द्वारा सुख प्राप्त करता है। जातक मधुरभाषी व सदाचारी होता है जातक विद्वान व धीर स्वभाव का होता है। जातक को पुत्र की अपेक्षा कन्या अधिक होती है ।

तुला : –

तुला राशि का स्वामी शुक्र है। तुला राशि में चंद्रमा की स्थिति शुभ मानी गयी है। तुला राशि में चंद्रमा के स्थित होने से जातक दीर्घ शरीर का होता है। असंतुलित स्वभाव वाला होगा । जातक रूपवान एवं स्वस्थ शरीर धार्मिक व का मालिक होता है। जातक चतुर, भोगी, बुद्धिमान होता है। जातक ब्राह्मण का भक्त व अन्नदाता होता है। जातक धनवान होता है एंव अनेक संपत्तियों का मालिक होता है। जातक परोपकार व दूसरों के हित के लिए अपना धन भी व्यय करता है। जातक सुखी व वैभवशाली होता है। जातक सामाजिक संस्थाओं के काम में रूचि रखने वाला होता है।

वृश्चिक : –

वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा 3 अंश तक नीच का फल देता है । नीच राशि का चंद्रमा प्रायः शुभफल प्रदान नहीं करता है | शेष 27 अंशों में चंद्रमा सामान्य फल देता है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा स्थित होने से जातक दुष्ट, कलह-प्रिय, अशांत एवं दुर्बल होता है। जातक अपयश पाने वाला, परा न, विश्वासघाती व असंतोषी होता है। ऐसा जातक मादक पदार्थो का सेवन करने वाला एवं कामासक्त होता है। जातक की धर्म के प्रति रूचि नहीं होती है। जातक परस्त्रीगामी भी होता है।

धनु : –

धनु राशि का स्वामी गुरु है जो कि चंद्रमा का मित्र है इसलिए धनु राशि में चंद्रमा मित्र राशि का होगा व उसके प्रभाव से जातक सुंदर व स्थूल शरीर वाला होता है। जातक बलवान्, धनी, स्पष्टवादी एवं निष्कपट होता है I जातक अनेक कलाओं का ज्ञाता, निर्मल चरित्र वाला, मितव्ययी एवं स्वपराक्रम से भाग्योदय करने वाला होता है । जातक राजसम्मान प्राप्त करता है।

मकर : –

मकर राशि का स्वामी शनि है। चंद्रमा शनि से समता का भाव रखता है। इसलिए मकर राशि चंद्रमा की सम राशि है। मकर राशि स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक संगीतज्ञ, कामातुर, स्वधर्म एवं स्वकुल की रीतियों का श्रेष्ठ प्रकारसे निर्वाह करने वाला होता है। जातक चिंताग्रस्त भी होता है। धार्मि जातक प्रसिद्ध व धर्म के प्रति आस्थावान होता है । जातक कवि होता है। वह क्रोधी व लोभी भी होता है ।

कुंभ : –

कुंभ राशि का स्वामी शनि है। कुंभ राशि चंद्रमा की सम राशि होती है। कुंभ राशि में चंद्रमा की स्थिति से जातक दुर्बल शरीर का स्वामी होता है। जातक आलसी प्रवृत्ति का होता है। जातक पाप कर्म करने वाला व दुष्टों की संगति में रहता है। ऐसा जातक अत्यंत कामी, दुःखी, मिष्ठान भोजी तथा गुप्त संगठन का सदस्य होता है ।

मीन : –

मीन राशि का स्वामी गुरु है। मीन राशि में चंद्रमा स्थिति शुभ मानी गयी है। मीन राशि में चंद्रमा के स्थित होने से जातक रूपवान, सुंदर शरीर वाला व प्रसन्नचित होता है | जातक गुणवान, जितेन्द्रिय व सत्कर्म में धन खर्च करने वाला होता है | जातक शास्त्रज्ञ व धार्मिक प्रवृत्ति वाला होता है |


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