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hanuman jayanti 2024 | हनुमान जयंती 2024

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हनुमान जयंती 2024 मे कब है ओर कोनसा उपाय करे? इस उपाय दुख से मुक्त होगे| hanuman jayanti 2024

हनुमान जयंती 2024 | hanuman jayanti 2024

इस साल कि हनुमान जयंती सभी भारत वासियो केलीय महत्व पूर्ण है | इस साल मे श्री राम कि स्थापना इस साल मे अयोध्या मे हुई है | इस करण से सभी देश वासियोने इस सालकी हनुमान जयंतीभी जलोश के साथ मनानी है |

2024 मे हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पोर्णिमा के दिन है |

हनुमान जयंती 2024: महत्व, पूजा विधि और तिथि –

हिंदू calender चैत्र शुक्ल पोर्णिमा 1946 क्रोधी संवत्सर
दिनाक23 एप्रिल 2024
हनुमान जयंती 2024

हनुमान जयंती विशेष इस दिन वैशाख स्नानारंभ , आणि छत्रपती शिवाजी महाराज पुण्य तिथी इस दिन है|

Panchamukhi hanumankavach |॥ श्रीपञ्चमुखी हनुमत्कवचम् ॥
Panchamukhi hanumankavach |॥ श्रीपञ्चमुखी हनुमत्कवचम् ॥

कोसा उपाय हनुमान जयंती के दिन कारण अच्छा रहेगा | hanuman जयंती

इस साल के हनुमान जयंती के दिन मे आप यादी हनुमान चालीसा का पाठ करे तो आपके सभी दुख निवारण होगे | यादी इस दिन हनुमानजी को अभिषेक किया तो अति उत्तम होगा ओर अभिषेक के दोरान शेंदूर हनुमानजी को लागणं अति शुभ कारी होगा |

हनुमान चालीसा hanuman chalisa

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि
बरनऊं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन कुमार
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुं लोक उजागर
रामदूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुंचित केसा
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै
कांधे मूंज जनेऊ साजै
संकर सुवन केसरीनंदन
तेज प्रताप महा जग बन्दन

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे
रामचंद्र के काज संवारे

लाय सजीवन लखन जियाये
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा

जम कुबेर दिगपाल जहां ते
कबि कोबिद कहि सके कहां ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
लंकेस्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानू
लील्यो ताहि मधुर फल जानू

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहू को डर ना

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हांक तें कांपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै
नासै रोग हरै सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुड़ावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै

सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोइ अमित जीवन फल पावै
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा
तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम-जनम के दुख बिसरावै
अन्तकाल रघुबर पुर जाई
जहां जन्म हरि भक्त कहाई

और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
जै जै जै हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा

पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप

जय श्री राम || रामचंद्र जी कि जय || हनुमानजी की जय ||


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