shani shanti ke upya : शनि देव को प्रसन्न करने केलिय उपाय

shani shanti ke upya : शनि देव को प्रसन्न करने केलिय उपाय

astrologer

शनि भगवान को प्रसन्न करने केलिय यदि आप अपने कुंडली में शनि भगवान की कृपा चाहते हो तो निचे दिए गये उपायों में से आप यदि एक भी उपाय करते हो तो शनि देव आपके जीवन में सुख,शान्ति और सुख समृद्धि आपके घर में और जीवन में आएगी |

शनि शांति के उपाय: प्रभावी मंत्र और उपासना

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shani shanti ke upya : शनि देव को प्रसन्न करने केलिय उपाय
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  • शनिवार का व्रत रखे |
  • कीकर की दांतुन करे |
  • शनिवार का व्रत रखें ।
  • कीकर की दांतुन करें ।
  • काले घोड़े के पैरों की खुर (नाल) या नाव की किल का छल्ला बाएं हाथ में सबसे बड़ी अंगुली में धारण करें ।
  • नीलम 9 रत्ती मध्यमिका अंगुली में (दाहिने हाथ में ) लोहा या चांदी की मुद्रिका में जड़वा कर धारण करें ।
  • तेल (सरसों) से चुपड़ी रोटी कुत्ते अथवा कौए को डालें
  • तेल पेड़ों की जड़ में डालें ।
  • सांप को दूध पिलावें ।
  • भैरव भगवान की उपासना करें व दर्शन करें । तैंतालिस दिन तक लगातार कौओं को तेल से चुपड़ी रोटी
  • डालें ।
  • अपने भोजन से गाय और कुत्ते का हिस्सा निकालकर,उसे भी भोजन डालें ।
  • लोहा या काले उडद का दान करे |
  • शनिवार को तेल में छाया देखकर तेल दान कर दें ।
  • हनुमान चालीसा का पाठ करें ।
  • शनि स्त्रोत एवं शनि कवच का पाठ करें ।
  • दो लोहे के टुकड़े या काले नमक के टुकड़े लेकर एक टुकड़ा बहते पानी में बहा दें और दूसरा टुकड़ा आजीवन अपने पास संभाल कर रखें । खो जाने पर पुनः खरीद लाएं परन्तु दोबारा पानी में बहाने की आवश्यकता नहीं ।

शनि साढ़े साती के दौरान शांति कैसे प्राप्त करें?

  • शनिवार को तेल में अपना मुँह देखे, तेल में मीठी चीज़े भजिए बनाकर, गरिब, भैंसे या कुत्ते को दें ।
  • बंदरो को गुड़ / चना खिलायें ।
  • शनिवार को नंगे पैर मंदिर जाकर 1 नारियल व 7 बादाम छिल
  • के चढ़ाऐ ।
  • दक्षिण मुखी हनुमानजी पर मंगल / शनिवार को चमेली के तेल से सिंदूर का चोला गले से नीचे चढ़ाये।
  • 49 तिल के लड्डू गुड़ की चासनी में बनाएँ । प्रत्येक लड्डू में 1-1 सिक्का रखें। लड्डु को शनिवार से शुरु कर 49 दिन तक शनि मंदिर में दोपहर 12 बजे या शाम को बिना बोलें चड़ाएँ ।
  • झूठ का सहारा न लें ।
  • बांसुरी में शक्कर भरकर उसे एकांत स्थान में दबा है
  • माथे पर दूध तथा दही का तिलक करें ।
  • बन्दरों को गुड़ और चनें खिलाएं ।
  • कुएं में दूध डालें ।
  • चांदी का एक चौकार टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। भैंरू जी का पूजन करें और उन्हें शराब का प्रसाद चढ़ाएं।
  • मंदिर में अखरोट चढ़ाएं और वहां से आधे अखरोट वापस लाकर सफेद वस्त्र में बांधे और घर में रखें ।
  • सर्प को दुग्ध पिलाएं ।
  • रोटी पर सरसों का तेल चुपड़कर गायों और कुत्तों को खिलाएं ।
shani shanti ke upya : शनि देव को प्रसन्न करने केलिय उपाय

शनि की शांति हेतु रत्न और वस्त्र का दान करने का आसान तरीका

शनि से पीड़ित व्यक्ति को शनिवार के दिन लोहा अथवा सीसा या रांगे में उत्कीर्ण शनि यंत्र पर जड़े हुए नीलम को किसी सुयोग्य ब्राह्मण को दान दें। किसी गरीब एवं जरूरतमंद व्यक्ति को अपने पहने हुए काले एवं नीले कपड़े दान दें ।

शनि की अनुकूलता हेतु औषधि स्नान

शनि से पीड़ित व्यक्ति के लिये चाहिये कि वह स्नान के पूर्व जायफल, कस्तूरी, भृंगराज युग एवं लौंग से युक्त तिल के तेल की मालिश करें । तथा काले तिल, लोध, खस, सौंफ, आदि को जल में मिलाकर प्रति शनिवार स्नान करें ।

शनि ग्रह से संबंधी दान क्या है और इसका महत्व क्या है?

शनि ग्रह से संबंधी दान शनि के वार शनिवार या शनि के नक्षत्र पुष्य, अनुराधा या उत्तराभाद्रपद में करना चाहिए। दान में स्वयं के वजन के बराबर काले चने, काले कपड़े, जामुन फल, काले उड़द, काली गाय, गोमेद, काले जूते, तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, नीलम, कुलथी, काली जौ, काले पुष्प, कस्तुरी, सुवर्ण, दक्षिणा साहित ब्राह्मण को या शनि भगवान या कृष्ण भगवान के मंदिर में दान करना चाहिए।

शनि मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?

जिन जातक की पत्रिका में शनि कमजोर हो उन्हें शनि ग्रह को बलवान बनाने के लिए या शनि ग्रह की शांति के लिए शनि भगवान का मंत्र 92,000 बार अनुष्ठान करके तुलसी / अष्टधातु की माला से स्वयं जाप करना चाहिए या किसी योग्य ब्राह्मण द्वारा संकल्प देकर जप का अनुष्ठान करवाना चाहिए। जितनी संख्या में जप हुए हो उसका दशांश अर्थात दसवा भाग (10%) मंत्र संख्या से हवन करना चाहिए। हवन की मंत्र संख्या के दशांश का तर्पण करना चाहिए। तथा तर्पण के दशांश का मार्जन करना चाहिए। यदि हवन, तर्पण तथा मार्जन जातक न कर सकें या न करवा सकें तो उतनी ही संख्या के जाप और करने चाहिए ।

शनि के लिए निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए ।

ॐ शं शनैश्चराय नमः

बीज मन्त्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

शनिश्चर का व्रत क्या है?

51 या 19 शनिवारों तक करना चाहिये । काला वस्त्र धारण करके ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः इस मंत्र को 19, 11 या 5 माला जपे । जप करते समय एक पात्र में शुद्ध जल, काला तिल, दूध, चीनी और गंगाजल अपने पास रख ले । जप के बाद इसको पीपल वृक्ष की जड में पिश्चममुख होकर चढा दे । भोजन में उडद (कलाई) के आटे से बनी चीजें पंजीरी, पकौडी, चीला और बडा इत्यादि खावे । कुछ तेल में बनी चीजें अवश्य खावे । फल में केला खावे | इस व्रत के करने से सब प्रकारकी सांसारिक झंझटें दूरहोती है । झगडे में विजय प्राप्त होती है । लोहे, मशीनरी, कारखाने वालों के लिये यह व्रत व्यापार में उन्नति और लाभदायक होता है ।

शनि शांति के लिए अन्य उपाय का आसान तरीका

जिन जातक की पत्रिका में शनि बलहीन या अनिष्टकारक हो उन्हें सुंदरकांड तथा हनुमान चालीसा का पाठ करने से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होती है ।


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