ketu shanti ke upya : केतु शांति के उपाय

आपकी कुंडली में यदि केतु ग्रह अशुभ फलदायी है तो आप यह उपाय कीजिये आपके जीवन में सदा सर्वदा सुख,शांति,और समृद्धि आयेगी |

  • मंगलवार को चार मोतीचूर के लड्डू ( बिना लाल-हरे ) लेकर,उनमे 1/2 चम्मच दही डाले तथा कुत्ते को खिलाये | ( 9 मंगलवार )
  • अपने चरित्र को ठीक बिल्कुल ठीक रखे और पाप कर्मो से बचे |
  • काली गाय दान करे |
  • काले व सफ़ेद तिल दरिया मे बहावे |
  • गणेश चतुर्थी का व्रत रखे |
  • कुत्ते को रोटी का टुकड़ा डाले , ऐसा करने से संतान को भी सुख प्राप्त होगा |
  • गणेश उपासना करे |
  • सिद्ध केतु यंत्र गले में धारण करे |
  • नींबू,तिल व केले का दान करे |
  • कान छिदवाएं और कुत्ता पालें ।
  • नौ वर्ष से कम उम्र वाले बच्चे को खट्टी वस्तुएं खाने को दे |
  • दो काले रंग में रंगे पत्थर के टुकड़े तैयार करें, एक पानी में बहा दें, दूसरा जीवन भर साथ रखें ।
  • नौ वर्ष से कम आयु वाली कन्याओं को भोजन कराएं।
  • ईंधन (लकड़ी) के चार-चार टुकड़े चार दिनों तक बहते पानी में प्रवाहित करें ।
  • धार्मिक स्थानों में तथा जरूरतमन्दों को चितक बरे (काले – सफेद रंग के ) कंबल बांटें |
ketu shanti ke upya : केतु शांति के उपाय

केतु की शांति हेतु रत्न एवं वस्त्र का दान

सुयोग्य पात्र को लहसुनिया का श्रद्धापूर्वक दान करना उचित होता. है । तिल का दान करना तथा याचकों को नीले और काले वस्त्र दान देने से केतु की अनिष्टता का निवारण हो जाता है ।

केतु की अनुकूलता हेतु औषधि स्नान

केतु की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिये जातक मंगलवार के दिन स्नान के जल में रक्त चन्दन, बकरी का दूध तिल एवं लौहांश थोड़ी मात्रा में मिला लेना चाहिये । इस प्रयोग से केतु की पीड़ा का शमन होकर अनुकूलता प्राप्त होती है ।

केतु ग्रह से संबंधित दान क्या होता है?

केतु ग्रह से संबंधी दान शनिवार या पूर्णिमा या राहु के नक्षत्र अश्विनी, मधा या मूल में करना चाहिए । दान में स्वयं के वजन के बराबर कस्तुरी, तिल, छाग, काला वस्त्र, ध्वज, सप्तधान्य, उड़द, कंबल, काले उड़द, सुवर्ण, नारियल, शस्त्र, दक्षिणा साहित ब्राह्मण को या गणेश मंदिर में दान करना चाहिए ।

केतु मंत्र का जाप करने से क्या लाभ होता है?

जिन जातक की पत्रिका में केतु कमजोर हो उन्हें केतु ग्रह को बलवान बनाने के लिए या केतु ग्रह की शांति के लिए केतु भगवान का मंत्र 68,000 बार अनुष्ठान करके तुलसी की माला से स्वयं जाप करना चाहिए या किसी योग्य ब्राह्मण द्वारा संकल्प देकर जप का अनुष्ठान करवाना चाहिए। जितनी संख्या में जप हुए हो उसका दशांश अर्थात दसवा भाग (10%) मंत्र संख्या से हव करना चाहिए । हवन की मंत्र संख्या के दशांश का तर्पण करना चाहिए’ । तथा तर्पण के दशांश का मार्जन करना चाहिए। यदि हवन, तथा मार्जन जातक न कर सकें या न करवा सकें तो उतनी ही संख्या के जाप और करने चाहिए ।

केतु के लिए निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए ।

ॐ कें केतवे नमः

बीज मन्त्र

ॐ मां मीं म्रौं सः केतवे नमः

राहु और केतु का व्रत के लाभ और महत्व क्या हैं?

18 शनिवारो तक करना चाहिए | काले रंग का वस्त्र धारण करके राहु के व्रत में ॐ भ्रां भ्रीं भौं सः राहवे नमः इस मंत्र एवं केतु के व्रत में ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रॉसः केतवे नमः इस मंत्र का 18, 11 या 5 माला जप करे । जप के समय एक पात्र में जल, और कुशा अपने पास धर ले । जप के बाद इनको पीपल की जड में चढा दे । भोजन में मीठा चूरमा, मीठी रोटी,समयानुसार दूर्वा रेवडी, भूजा और काले तिल से बने पदार्थ खाये । रात में घी का दीपक पीपलवृक्ष की जड में रख दिया करे । इस व्रत के करने से शत्रु का भय दूर होता है ।राजपथसे (मुकदमे में ) विजय मिलती है, सम्मान बढता है |

केतु शांति के लिए अन्य उपाय का आसान तरीका

जिन जातक की पत्रिका में केतु बलहीन या अनिष्टकारक हो उन्हें गणेश अर्थवशीर्ष का पाठ करने से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होती है ।

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