गुरु के ग्रह के शांति के उपाय guru grah ke upya
गुरु भगवान को प्रसन्न करणे केलीय उपाय | guru grah गुरु ग्रह उपाय
2. गुरु के ग्रह की शांति के लिए रत्न और वस्त्र का दान कैसे करेंगे?
- हर गुरुवार को पपीता कोढ़ी को दान करें ।
- हर गुरुवार को गाय को छिला पपीता अपने हाथों से
- खिलाएं ।
- प्रत्येक गुरूवार को विष्णुजी / लक्ष्मीनारायण मंदिर जाकर दर्शन करें ।
- चने की दाल व स्वर्ण बृहस्पतिवार के दिन ब्राह्मण या भिखारी को दान करें ।
- सिद्ध बृहस्पति यंत्र अवश्य धारण करें ।
- गुरुवार का व्रत रखें।
- पीला वस्त्र ही पहनें ।
- माथे पर हल्दी व केसर का तिलक लगावें ।
- कोई भी कार्य आरम्भ करने से पूर्व नाक अवश्य साफ करें
- हरि पूजन या हरिवंश पुराण का पाठ करें ।
- ब्रह्माजी की उपासना करें ।
- पीपल की जड़ में नित्य जल चढ़ावें ।
- दो स्वर्ण के टुकड़े लेकर एक बहते जल में बहा दें तथा दूसरा जीवन भर संभाल कर रखे |
- पीले फूलो वाले पौधे गृह वाटिका में लगाए |
- हल्दी का टुकड़ा पीले धागे से भुजा पर बांधे |
- झूटी गवाही देने से बचे |
- साधू एव ब्राम्हणों को भोजन कराते रहे |
गुरु के ग्रह की शांति के लिए रत्न और वस्त्र का दान क्यों महत्वपूर्ण है?
किसी सुपात्र व्यक्ति को पुखराज दान करें। अपने गुरू या जाप किसी संत पुरुष को पीले वस्त्र श्रद्धापूर्वक दान करें। किसी सौभाग्यवती स्त्री को भी पीले वस्त्र दान करने से भी अनुकूल फल होता है ।

गुरु की शांति कैसे प्राप्त करें: दान का उपाय
गुरु ग्रह से संबंधी दान गुरू के वार गुरूवार या गुरु नक्षत्र पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वाभाद्रपद में करना चाहिए। दान में स्वयं के वजन के बराबर चने की दाल, पीले वस्त्र, सोना, हल्दी, धृत, पीले पुष्प, मिठाई, पुखराज, अश्व, पुस्तक, मधु, लवण, शर्करा, भूमि, छत्र, फल, दक्षिणा साहित ब्राह्मण की या विष्णु भगवान या राम भगवान या कृष्ण भगवान के मंदिर में दान करना चाहिए ।
गुरु की अनुकूलता हेतु औषधि स्नान के फायदे क्या हैं?
गुरु की पीड़ा से शांत करने के लिये जातक को स्नान जल में शक्कर, गूलर, सफेद सरसों, पीले पुष्प, हल्दी, शहद तथा नवीन कोपलों आदि को डालकर स्नान करना चाहिये। इससे गुरू की अनुकूलता प्राप्त होती है ।
गुरु मंत्र का जाप करने से आपकी जीवनशैली में क्या बदलाव होगा?
जिन जातक की पत्रिका में गुरु कमजोर हो उन्हें गुरु ग्रह को बलवान बनाने के लिए या गुरु ग्रह की शांति के लिए गुरु भगवान का मंत्र 76,000 बार अनुष्ठान करके हल्दी की माला से स्वयं जाप करना चाहिए या किसी योग्य ब्राह्मण द्वारा संकल्प देकर जप का अनुष्ठान करवाना चाहिए। जितनी संख्या में जप हुए हो उसका दशांश अर्थात दसवा भाग (10%) मंत्र संख्या से हवन करना चाहिए | हवन की मंत्र संख्या के दशांश का तर्पण करना चाहिए। तथा तर्पण के दशांश का मार्जन करना चाहिए। यदि हवन, तर्पण तथा मार्जन जातक न कर सकें या न करवा सकें तो उतनी ही संख्या के जाप और करने चाहिए ।
गुरु के लिए निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए ।
ॐ बृं बृहस्पते नमः
बीज मन्त्र ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
गुरु का व्रत करने के लिए सही तरीका
3 वर्ष 1 वर्ष अथवा 16 गुरुवारों तक करना चाहिये । पीले रंग के वस्त्र धारणकर ॐ ग्रां ग्रीं गौं सः गुरवे नमः इस मंत्र को 16 5 या 3 माला जपे । भोजन में चने के बेसन, घी और चीनी से बनी मिठाई लड्डू ही खावे । यह व्रत विद्यार्थियों के लिये बुद्धि और विद्याप्रद है । इस व्रत से धन की स्थिरता और यश की वृद्धि होती है। । अविवाहितों को यह व्रत विवाह में सहायक होता है ।
गुरु शांति का अन्य उपाय क्या है?
जिन जातक की पत्रिका में गुरु बलहीन या अनिष्टकारक हो उन्हें रामरक्षा स्तोत्र या विष्णु सहस्त्रनाम करने से विशेष श ुभ फल की प्राप्ति एवं वाक् सिद्धी प्राप्त होती है ।
guru grah ke upya
सूर्य भगवान को प्रसन्न करने केलीया उपाय
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गुरु शांति का अन्य उपाय क्या है?

