कन्या राशी

कन्या राशी, राशी चक्र की छाटी रास है| कन्या राशी में उत्तरा नक्षत्रके 3 चरण, हस्त,चित्रा नक्षत्रके 2 चरण मीला कर कन्या रास बनती है। कन्या राशी पृथ्वी तत्व की है, कन्या राशी का चिन्ह कन्या कि प्रतिकृति है|

कन्या राशी का स्वामी बुध देव है, बुध देव ग्रह होने के कारण व्यक्ति का स्वभाव चंचल,प्रेमळ,बडबडा, होता है|  

कन्या राशी वाले व्यक्ती…

कन्या राशी कि पसंद :- सौदर्य, अलंकार, मृदुता,

कन्या राशी के शरीर भाग :- पेट,पाचन शक्ति,…

कन्या राशी व्यापार :- शिक्षण, लेखक, पोस्टखाते,..

आपके  बारेमे और  जनने के लिए संपर्क करे…

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    चैत्रः- शुक्रहर्षल योगातून कलाकारांचा भाग्योदय. पौर्णिमेपर्यंत काहींचे उत्तम प्रवास. बुधगुरु योगातून तरुणांचे परदेशगमन. उत्तरार्ध दुखापतींचा. शुक्रभ्रमणातून वादग्रस्त येणी येतील. सूर्यग्रहणाजवळ घरात भांडणे.

    वैशाख:- राशीतील गुरुचे पर्व सुरु होत आहे. पूर्वार्धात मोठ्या प्रगतीकडे वाटचाल. व्यावसायिक आडाखे यशस्वी होतील. तरुणांना पूर्वार्ध शिक्षण, नोकरी आणि विवाह या त्रिघटकांतून उत्तम. उत्तरार्ध मानसन्मानाचा.

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    Married Life

    अब समझते है कब जीवनसाथी स्वास्थ्य कब जल्दी ठीक हो जाता है। Married Life Married Life | Life partner | जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रहता है तो क्यों और कब ठीक होगा आज इसी विषय पर बात करते है। वैवाहिक जीवन सुख और विवाह सुख यह पति पत्नी के आपसी सहयोग से ही एक दूसरे को मिलता है। कभी कभी ऐसी स्थिति जीवन मे बन जाती है कि जीवनसाथी (पति या पत्नी) का स्वास्थ्य खराब रहने के कारण विवाह सुख और वैवाहिक जीवन के सुख में कमी रहती है जिससे वैवाहिक जीवन भी थोड़ा नीरस का ही रहता है।

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    श्री हनुमानजी की आरती

    आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥आरती कीजै हनुमान लला की। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥आरती कीजै हनुमान लला की। लंका…

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