विष्टि करण | vishti karana in astrology

Bhdra kay hai ?

विष्टि करण क्या है | Vishti Karan (Bhadra) shanti Puja

विष्टि करण भद्रा क्या है | ज्योतिषनुसार भद्रा का्य होती है | Bhdra kay hai ? who is bhdra

विष्टि करण क्या है | Vishti Karan (Bhadra) shanti Puja

vishti karan in hindi | किसे कहते है विष्टी करण?

विष्टि करण भद्रा (Bhdra) क्या है| देव दोनों संग्राम नमक पौराणिक क्षण में कहा गया है | कि पूर्व काल में जब देवताओं और असुरों में युद्ध हो रहा था उसी समय देव हारने लगेथे, तब भगवान शंकर को क्रोध उत्पन्न हो गया | अत्यधिक क्रोध से उनकी आंखें लाल हो गई दिशाएं भी कांपने लगी थी ठीक इसी समय भगवान शंकर की दृष्टि अपने हृदय पर बड़ी अचानक उनके हृदय से एक कन्या उत्पन्न हो गई इसका मुख्य (गर्दभी) गधी के समान और गर्दन सिंह के समान सात हाथों एवं तीन पैरों से युक्त उसकी आंखें कौड़ी के समान थी | पतले शरीर वाली प्रेत पर सवार होकर यह भद्रा शव वस्त्र को पहन कर, धूम्र वर्णन की क्रांति से युक्त शीघ्र ही विशाल शरीर धारण कर दैत्यों की सेना में एक भयंकर आंधी की तरह प्रविष्ट हुई और राक्षसों का विनाश करने लगी | देवताओं की विजय हो गई हो गई देवताओं ने इसकी शक्ति वह अद्भुत साहस पर प्रसन्न होकर अपने कानों के पास( दैत्यध्नी मुदीतै: सुरैस्तु करन्म प्रांत्ये नियुक्ता तू सा)
अतः इसे भी करनो में गीना जाने लगा|

The Title: भद्रा: देवताओं की विजय की क्रांति

यह भद्र अब भूख से व्याकुल होने लगी भगवान शंकर से कहा कि ‘है मेरे उत्पत्ति करता मुझे भूख लग रही है मेरे भोजन की व्यवस्था करिए’ तब भगवान शंकर ने कहा की विष्टि करक में जो भी मंगल शुभ कार्य किया जाये, उस कर के सभी पुण्यों को भक्षण करके अपनी भूख मिटाना भद्रा काल में किए जाने वाले सभी शुभ मांगलिक कार्यों की सिद्धि को यह अपनी अग्नि के समान लपलपाती सात जीवों से भक्षण कर लेती है | इसलिए भद्रा काल में मांगलिक कार्य नहीं करनी चाहिए | पंचांग में जो करण होते हैं उसमें विष्टि नमक करण को ही भद्रा एवं विष्टि करण के काल को ही भद्रा काल कहते हैं | भद्रा काल शुक्ल पक्ष में अष्टमी व पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्ध में एवं चतुर्थी एकादशी तिथि के उत्तरार्ध में विष्टि करण अर्थात भद्रा होती है | जबकि कृष्ण पक्ष में तृतीय व दशमी तिथि के उत्तरार्ध में एवं सप्तमी व चतुर्थी के पूर्वार्ध में भद्रा होती है तिथि के संपूर्ण भोग कल का प्रथम आधा हिस्सा पूर्वार्ध तथा अंतिम आधा हिस्सा उत्तरार्ध होता है | मुख्य बात यह है कि जितने समय तक विष्टि करण रहता है उतने समय तक ही भद्रा होती है | सभी शुभ कार्यों को त्याग देना चाहिए |

घटी अष्टमी को पांच घटी एकादशी तिथि को 12 घटी एवं पूर्णिमा तिथि को 20 घटी के उपरांत 3 घटी भद्र होती है आपकी कृष्ण पक्ष में तृतीया को 20 घटी सप्तमी को 12 घटी दशमी को 5 घटित तथा चतुर्दशी की तिथि को 27 घटी के उपरांत 3 घटी भद्रा होती है

चन्द्रमा भद्रा वास (विष्टि करण)

विष्टी ओर भद्रा कीस राशी मे चंद्र है उस समय यादी भद्रा अति है तो भद्रा हम जो पुण्या इस विष्टी करण पर करते है ओ भद्रा भक्षण करती है|

भद्रा का विष्टी करण पर अभी कीस राशी मे होकार ओर कहा निवास करही है|
कुंभ, मीन, कर्क, राशि में हो तो भूमि पर वास.

मेष, वृषभ, मिथुन, या वृश्चिक, में हो तो स्वर्ग लोक में वास.

कन्या, धनु, तुला, या मकर राशि में हो तो पाताल में वास.
इस प्रकार भद्रा का वास देखा जाता है जीस लोक में वास होता है भद्रा का प्रभाव भी उस लोक में होता है |

कुंभ, मीन तथा सिंह राशि में स्थित भद्रा का पृथ्वी वासियों को त्याग करना चाहिए|

(विष्टि करण) भद्रा विहित कार्य

भद्रा में यह कार्य किया जा सकते हैं| जैसे युद्ध, वाद विवाद, राजा अर्थात मंत्री आदि से मिलना, धोखा, डॉक्टर को मिलना, जल में तैरना, शत्रु को भगाना, रोग निवारणार्थ औषधि प्रयोग, पशु, आदि का संग्रह विवाह, आदि कार्यों में भद्रा अच्छी होती है|
कालिदास जी को यह कहते हैं | कि महादेव जी के जब या अनुष्ठान में मीन राशि में चंद्रमा के देव पूजन करने में एवं दुर्गा देवी के हवन करने में तथा सभी प्रकार के कार्यों में एवं रात्रि में मेष राशि में चंद्रमा होने पर भद्रा शुभ फलदाई कही गई है | जो कार्य शुभ होते हैं उन्हें भी भगवान शंकर को नमन करते हुए ब्रह्म या अथवा परिवार के बड़ोकी आदमियों लेकर करना चाहिए |

vishti karana shanti pooja

पूजा विधि: कुशा द्वारा नवग्रह और पार्थिव भद्र मूर्ति के साथ चौकी, महासंकल्प, स्वस्तिवचनम्, गौरी गणेश पूजा , कलश पूजन, विष्टि करण (भद्रा) पूजन, हवन, महामंगल आरती, प्रसाद वितरण

पूजा विधि में एक व्यक्ति कुशा की मदद से नवग्रह और पार्थिव भद्र मूर्तियों के साथ चौकी स्थापित करता है, जिसमें मंत्रों का जाप किया जाता है। इसके बाद महासंकल्प और स्वस्तिवचनम् किया जाता है, जिसमें भगवान की कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है। गौरी गणेश पूजा के बाद कलश पूजन किया जाता है, जिसमें कलश में जल और घी का आहुति दी जाती है। विष्टि करण (भद्रा) पूजन के बाद हवन करने का आयोजन किया जाता है, जिसमें मंत्रों के साथ अहुति दी जाती है। इसके बाद महामंगल आरती की जाती है और प्रसाद वितरण किया जाता है।

Vishti Karan (Bhadra) yog is a big dosha in the janm kundali. The persons birth under the Vishti Karan has the Vishti Yog Dosha. Vishti Karan also known as Bhadra Karan is considered very inauspicious. Bhadra is the Daughter of Surya and the Sister of Shani.

vishti karana shanti pooja

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