Mithuna-Sankranti-2026 मिथुन संक्रांति 2026: जानें सूर्य देव को प्रसन्‍न करने के सरल और अचूक उपाय

mithun rashi sankaranti
मिथुन संक्रांति 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अचूक उपाय | वेदश्री ज्योतिष

मिथुन संक्रांति 2026: जानें सूर्य देव को प्रसन्‍न करने के सरल और अचूक उपाय

हिंदू पंचांग में तीसरे सौर माह के आरंभ का प्रतीक मिथुन संक्रांति है। वर्ष में आने वाली सभी 12 संक्रांतियां दान-पुण्‍य और धार्मिक कार्य करने के लिए बहुत शुभ मानी जाती हैं। सूर्य के वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करने की खगोलीय घटना को मिथुन संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

वेदश्री ज्योतिष के इस विशेष लेख में हम आपको मिथुन संक्रांति 2026 से जुड़ी विस्तृत जानकारी देंगे। हम जानेंगे कि मिथुन संक्रांति के दिन किन आसान और प्रभावी उपायों को करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है।

मिथुन संक्रांति 2026 कब है?

वर्ष 2026 में मिथुन संक्रांति 15 जून को पड़ रही है। इस दिन सूर्य देव वृषभ राशि की यात्रा पूरी करके बुध ग्रह के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।

विवरण समय / तिथि
संक्रांति तिथि 15 जून 2026, सोमवार
सूर्य गोचर का समय दोपहर 12:34 बजे
गोचर की अवधि 16 जुलाई 2026 तक (लगभग एक महीना)

चूंकि मिथुन राशि सूर्य की मित्र राशि मानी जाती है, इसलिए इस अवधि को ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद प्रभावशाली और सक्रिय ऊर्जा प्रदान करने वाला समय माना जाता है।

मिथुन संक्रांति का ज्योतिषीय और सांस्कृतिक महत्व

सृष्टि के लिए ऊर्जा एवं प्रकाश का स्रोत सूर्य देव हैं। जब सूर्य एक राशि में लगभग 30 दिन बिताकर अगली राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य संक्रांति या गोचर कहा जाता है। Mithuna-Sankranti-2026-date- Pujan-vidhi-upay

  • प्रकृति में बदलाव: मिथुन संक्रांति से वर्षा ऋतु की शुरुआत मानी जाती है और मानसून के संकेत मिलने लगते हैं।
  • अंबुबाची मेला: भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर प्रांतों में मिथुन संक्रांति को माता पृथ्‍वी के वार्षिक मासिक धर्म चरण के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘राजा पारबा’ या ‘अंबुबाची मेला’ (कामाख्या मंदिर, असम) भी कहते हैं।
  • सुख-समृद्धि: ऐसी मान्यता है कि मिथुन संक्रांति पर किए गए धार्मिक कार्यों और उपायों से वर्ष भर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और समृद्धि में वृद्धि होती है।

मिथुन संक्रांति 2026 की पूजा विधि

इस शुभ दिन पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। आप नीचे दी गई सरल विधि से पूजन कर सकते हैं:

  1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  2. सूर्य को अर्घ्य: एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। उसमें लाल फूल, अक्षत (चावल), रोली या कुमकुम और थोड़ा सा गुड़ डालें।
  3. मंत्र उच्चारण: पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को जल अर्पित करें और लगातार “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  4. दान-पुण्य: पूजा के बाद गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन, ताजे फल और लाल वस्त्रों का दान गरीबों या जरूरतमंदों को करें।
  5. सात्विक आहार: इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और तामसिक चीजों (मांस, मदिरा) से पूरी तरह दूर रहें।

सूर्य देव को प्रसन्‍न करने के 5 अचूक उपाय

यदि आप अपने करियर, स्वास्थ्य या आर्थिक स्थिति में उन्नति चाहते हैं, तो मिथुन संक्रांति के दिन ये उपाय अवश्य करें:

  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना सूर्य देव को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। इससे आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • लाल रंग का प्रयोग: इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करें और मस्तक पर लाल चंदन का तिलक लगाएं।
  • पीपल और तुलसी की पूजा: रविवार के दिन (या संक्रांति पर) पीपल के पेड़ में जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करें। तुलसी माता की सेवा करने से भी उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
  • माणिक्य (Ruby) धारण: यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेकर सूर्य का रत्न माणिक्य धारण कर सकते हैं।

सभी 12 राशियों पर मिथुन संक्रांति 2026 का प्रभाव

सूर्य के मिथुन राशि में गोचर का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा:

मेष राशि

आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होगी। भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा।

वृषभ राशि

धन से जुड़े मामलों में समझदारी से फैसले लें। अचानक खर्चे बढ़ सकते हैं।

मिथुन राशि

नेतृत्व क्षमता में निखार आएगा। धैर्य और अनुशासन से बड़ी सफलता मिल सकती है

कर्क राशि

अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने की आवश्यकता है। बजट बनाकर चलें।

सिंह राशि

आय के नए स्रोत बनेंगे। नौकरी में प्रमोशन और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ने के प्रबल योग हैं।

कन्या राशि

सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी। करियर में नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए बेहतरीन समय है।

तुला राशि

भाग्य की गति थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन कड़ी मेहनत और अनुशासन से लक्ष्य प्राप्त होंगे।

वृश्चिक राशि

स्वास्थ्य (विशेषकर आंखों) का ध्यान रखें। स्क्रीन टाइम कम करें।

धनु राशि

व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, लेकिन दांपत्य जीवन में तालमेल बनाकर रखें।

मकर राशि

प्रतिस्पर्धा में आप आगे रहेंगे। संघर्ष के बाद शानदार सफलता मिलने के योग हैं।

कुंभ राशि

प्रेम संबंधों के लिए समय अनुकूल है। माता-पिता को बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

मीन राशि

मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है। परिवार के साथ सकारात्मक समय बिताएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. मिथुन संक्रांति 2026 कब है?
वर्ष 2026 में मिथुन संक्रांति 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी।
2. मिथुन संक्रांति का क्या अर्थ है?
जब सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस खगोलीय और ज्योतिषीय घटना को मिथुन संक्रांति कहा जाता है।
3. मिथुन राशि के जातकों के लिए कौन सा रत्न शुभ होता है?
मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए पन्ना (Emerald) रत्न लाभकारी माना जाता है। हालांकि, इसे धारण करने से पहले कुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए।

क्या आप अपनी व्यक्तिगत जन्म कुंडली का सटीक विश्लेषण करवाना चाहते हैं?

आज ही वेदश्री ज्योतिष से संपर्क करें

Similar Posts

  • Mangal dosh Asnari vyakti | विवाह करणे योग्य आहे की अयोग्य आहे.

    मंगळदोष असणाऱ्या व्यक्तीसोबत विवाह करणे योग्य आहे की अयोग्य आहे? Mangal dosh Asnari vyakti | अनेक व्यक्तीच्या जीवनामध्ये जेव्हा लाईफ पार्टनर आपला साथीदार पहात असतो त्या वेळेला आपण कुंडली जुळवतो दोघांची कुंडली जुळून किती गुण येतात, आणि त्यांचे ग्रह किती प्रमाणात जुळतात हे सर्व काही पाहत असतो. त्यानुसारच मंगळ दोष हा जर असेल तर आपण…

  • युगप्रवर्तक राजा : छत्रपति शिवाजी महाराज  . CHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ

    छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती फेब्रुवारी 2024. शिवाजी महाराज जयंती 19 फेब्रुवारी 2024 शिवाजी महाराजांचा जन्म, शिवनेरी किल्ला. 19 फेब्रुवारी 1630 शिवाजी महाराजांचे नाव कोठे आणि कशे ठेवण्यात आले ? पुणे जिल्ह्यातील जुन्नर शहरानजीक वसलेल्या शिवनेरी या डोंगरी किल्ल्यावर १९ फेब्रुवारी इ.स. १६३० मध्ये छत्रपती शिवाजी महाराजांचा जन्म झाला. शिवाजी महाराजांचे नाव शिवाई या देवतेवरून ठेवण्यात आले.  एका आख्यायिकेनुसार शिवनेरी गडावरील…

  • |

    Pradosh vrat upay |

    pradosh vrat | प्रदोष व्रत आपल्या सर्व कामना पूर्ति करणारे विशेष व्रत आहे ! 2024 का पहला प्रदोष व्रत कब? साल का पहला प्रदोष व्रत 9 जनवरी दिन मंगलवार को रखा जाएगा। जो प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन होता है, उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। भौम प्रदोष के दिन व्रत रखने से व्यक्ति…

  • |

    बारह राशियों के तंत्रोक्त मंत्र | 12 rashi ke mantra

    बारह राशियों के तंत्रोक्त मंत्र | ग्रह के नाम मंत्र | mantra aarth or unke labh/12 rashi ke mantra or unke laabh प्रत्येक जातक को अपनी सुविधानुसार प्रतिदिन अपनी राशि के अधिष्ठित मंत्रकी कम-से-कम एक माला जाप करते रहने से शुभ फल की प्राप्ति होती है या केजब-जब आप पर संकट मंडरा रहा हो तो…

  • Mahabharat

    Mahabharat महाभारतात असे म्हंटले आहे की सुमारे ८०% मनुष्यबळ युद्धाच्या अठराव्या दिवशी मृत्युमुखी पडले होते. जेव्हा युद्ध संपले तेव्हा संजय युद्ध झाले तिथे म्हणजेच कुरुक्षेत्राच्या मैदानात आला. त्याचा मनात शंका आलेली होती की हे युद्ध खरंच झाले आहे का? खरंच एवढा मोठा नरसंहार झालेला आहे का? ती हिच जागा आहे का जिथे सामर्थ्यवान पांडव आणि भगवान श्रीकृष्ण उभे होते? ही तीच जागा आहे का जिथे श्रीमद् भगवत गीता सांगितली गेली?

  • |

    सुंदर दत्त गुरूंची कथा | Gurucharitra ki katha

    गुरूचरित्राचे पारायण सोहळा करायचा आहे तर कथा/ story नाकी वाचा| gurucharitra ki katha गोविंदरावांच्या समाराधनेच कौतुक हा गावातल्या गप्पांचा नेहेमीचा विषय ,नित्य अन्न संतर्पण होत असे . दुपारी बारा वाजता पहिली पंगत बसली कि चार वाजून जाईस्तोवर पंगती सुरूच असत. स्वतः गोविंदराव पंगतीत फिरून सावकाश होऊ द्यात म्हणत असत . मोठे दत्त भक्त असा गोविंदरावांचा…

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.