खग्रास चंद्र ग्रहण कब है ? 2026 Chandra Grahan 2026: Event Details and Timing
3 मार्च 2026
- होळी 2 मार्च को होगी. 3 मार्च धुळी वंदन (कलर खेल)
- खग्रास चंद्र ग्रहण यांनी कि ग्रस्तोदित चंद्र. शुक्ला फाल्गुन पोर्णिमा 15

चंद्र ग्रहण कब है ? क्या करे ओर क्या ना करे | khagras chandra grahan 2026 |
खग्रास चंद्रग्रहण (ग्रस्तोदित)
फाल्गुन शुक्ल 15, मंगलवार, 3 मार्च 2026
मुंबई के सूर्यास्त समय की ग्रहण स्थिति
(ऊपर दी गई समय-सारणी संपूर्ण भारत के लिए मान्य है)
स्पर्श – दोपहर 3:20 बजे
संगमिलन – 4:24 बजे
मध्य – 5:05 बजे
उन्मीलन – 5:33 बजे
मोक्ष – सायं 6:48 बजे
ग्रहण दिखाई देने वाले प्रदेश | Chandra Grahan locations.
भारत सहित पूर्व एशिया, जापान, रूस का मध्य व पूर्व भाग, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, संपूर्ण अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, दक्षिण अमेरिका तथा अंटार्कटिका के कुछ भागों में यह ग्रहण दिखाई देगा।
यह चंद्रग्रहण भारत में ग्रस्तोदित रूप में दिखाई देगा, अर्थात ग्रस्त अवस्था में चंद्रमा उदय होगा। भारत में इस ग्रहण का स्पर्श और मध्य काल दिखाई नहीं देगा।
गुजरात के राजकोट, वेरावल, पोरबंदर, जामनगर, जूनागढ़ और गांधिधाम में सूर्यास्त 6:48 के बाद होने के कारण वहां यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए उन क्षेत्रों में ग्रहण के नियमों का पालन आवश्यक नहीं है।
चंद्र ग्रहण कब से कब तक ग्रहण का पुण्यकाल है ?
चंद्रोदय (अपने नगर के सूर्यास्त) से लेकर ग्रहण मोक्ष तक अल्पकाल पुण्यकाल रहेगा। चंद्र ग्रहण सूर्य उदय से लेकर सूर्य आस्था तक ग्रहण का काल (Time ) है | इस काल मे हमे ग्रहण के नियम का ध्यान रखना है | नीचे दिये गये नियम को आप को ग्रहण काल ओर वेध काल मे धन देखर क्या करे ओर ना करे इस पर ध्यान देणा जरुई है ज्योतिष के अनुसार आप यादी जप | दान | धार्मिक विधी | पूजा | करणे से लाभ होता है |
चंद्र ग्रहण के नियम कब से ओर वेध आरंभ कब होर हा है ? वेध आरंभ
यह ग्रहण ग्रस्तोदित होने के कारण मंगलवार 3 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे से मोक्ष काल (सायं 6:48 बजे) तक वेध मान्य रहेगा ।
ग्रहण काल के वेध मे कोनसे नियम का पालन करना जरुरी है ? what is the chandra grahan niyam ?
बालक, वृद्ध, रोगी, अशक्त व्यक्ति तथा गर्भवती महिलाओं को मंगलवार सुबह 11 बजे से मोक्ष तक वेध का पालन करना चाहिए। वेध काल में स्नान, देवपूजा, जप, श्राद्ध और नित्य कर्म किए जा सकते हैं। वेध काल में भोजन करना निषिद्ध है, इसलिए अन्न ग्रहण न करें। आवश्यक होने पर पानी पीना, मल-मूत्र त्याग और विश्राम किया जा सकता है।
ग्रहण काल
ग्रहण काल आपके नगर के सूर्यास्त से लेकर मोक्ष (सायं 6:48 बजे) तक रहेगा।
इस समय पानी पीना और मल-मूत्र त्याग करना वर्जित माना गया है।
ग्रहण में करने योग्य कार्य
सूर्यास्त होते ही स्नान करें।
पुण्यकाल में देवपूजा, तर्पण, श्राद्ध, जप, हवन और दान में से जो संभव हो वह करें।
पूर्व में लिए गए मंत्र का पुरश्चरण चंद्रग्रहण में करना श्रेष्ठ माना गया है।
ग्रहण मोक्ष के बाद पुनः स्नान करें।
अशौच की स्थिति में भी ग्रहणकाल में स्नान और दान करने के लिए शुद्धि मानी जाती है।
ग्रहण किसे नहीं देखना चाहिए, राशि अनुसार फल। Who can see the Chandra Grahan?
मिथुन, तुला, वृश्चिक, मीन – शुभ फल
मेष, कर्क, धनु, कुंभ – मिश्र फल
वृषभ, सिंह, कन्या, मकर – अशुभ फल
जिन राशियों को अशुभ फल बताया गया है तथा गर्भवती महिलाओं को यह ग्रहण नहीं देखना चाहिए।
वेदश्री ज्योतिष मार्गदर्शन
