Rudraksha kyu pehna chahiye | रुद्राक्ष क्यों धारण किया जाता है?

रुद्राक्ष क्यों धारण किया जाता है? Rudraksha

रुद्राक्ष धारण करने से अनेक व्यक्तियों को लाभ होते हुए आपने देखा होगा।
रुद्राक्ष यानी कि एक विशिष्ट स्थान पर आने वाला पेड़ फल है।
यह फूल विशिष्ट स्थान पर ही ज्यादातर पाया जाता है।
यह फूल आशु से उत्पन्न हुआ वृक्ष है।
यह वृक्ष जब महादेव पृथ्वी पर गिरा वहां से यह रुद्राक्ष का वृक्ष आया।
वही वृक्ष का फल रुद्राक्ष कहलाया।
रुद्राक्ष का फल यहां से हमें प्राप्त हुआ।

रुद्राक्ष यानी क्या होता है?

रुद्राक्ष का अर्थ होता है।
रुद्र – अक्ष यह दो शब्द से रुद्राक्ष का निर्माण हुआ है।
यानी कि रुद्र – महादेव दर्शाता है, महादेव का अंश यहां से हमें मिलता है।
यह रुद्राक्ष आपके जीवन में आयु, आरोग्य सभी चीजों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
यह रुद्र का अंश यानी कि महादेव जी का आवश्यक स्वरूप है।

रुद्राक्ष धारण करने से क्या लाभ होता है?

आपने सुना होगा कि रुद्राक्ष धारण करने से जीवन में अनेक बाधाएं और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
रुद्राक्ष आपके जीवन में सारे संकटों को दूर करने वाला, महादेव जी का अंश हमारे लिए लाभकारी होता है।
रुद्राक्ष धारण करने से हमें अनेक लाभ प्राप्त होते हैं।

रुद्राक्ष धारण करने से लाभ

  • मानसिक शांति: रुद्राक्ष पहनने से मन शांत रहता है, तनाव और चिंता कम होती है।
  • एकाग्रता और ध्यान: साधना, ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास में एकाग्रता बढ़ती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: हृदय रोग, रक्तचाप और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याओं में सहायक माना जाता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति नकारात्मक शक्तियों और बुरी ऊर्जा से सुरक्षित रहता है।
  • साहस और आत्मविश्वास: जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
  • धन और समृद्धि: कुछ मुखी रुद्राक्ष लक्ष्मी का स्वरूप माने जाते हैं, जो आर्थिक स्थिरता और समृद्धि देते हैं।
  • संबंधों में सामंजस्य: पति-पत्नी, परिवार और साझेदारी संबंधों में प्रेम और सहयोग बढ़ाता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: भगवान शिव का आशीर्वाद स्वरूप होने के कारण साधक को मोक्ष और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।
  • संकट निवारण: जीवन की बाधाओं और संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।
  • दीर्घायु और आरोग्य: शरीर को स्वस्थ और आयु को दीर्घ करने में सहायक।

कौन सा रुद्राक्ष आपके लिए अत्यंत लाभकारक होगा यह कैसे जाने?

रुद्राक्ष अलग-अलग प्रकार से आता है।
रुद्राक्ष के मुख होते हैं यानी कि रुद्राक्ष पर रेखाएं आती हैं।
रेखाएं कितनी हैं उसके अनुसार हमें पता चलता है कि रुद्राक्ष कितने मुख वाला है।
यह रुद्राक्ष कितने मुख वाला धारण करना चाहिए और आपके लिए किस तरह से कौन सा रुद्राक्ष किस कार्य के लिए लाभकारी है, यह हम आगे देखेंगे।

1 से 14 मुखी तक लाभ

मुखी रुद्राक्षविस्तृत लाभ
1 मुखीभगवान शिव का स्वरूप। आत्मज्ञान, ध्यान में एकाग्रता, मोक्ष की प्राप्ति, नेतृत्व क्षमता और मानसिक शांति देता है।
2 मुखीअर्धनारीश्वर का प्रतीक। पति-पत्नी या साझेदारी संबंधों में सामंजस्य, प्रेम और सहयोग बढ़ाता है।
3 मुखीअग्नि देव का स्वरूप। पाप नाशक, आत्मविश्वास बढ़ाने वाला, आलस्य दूर करता है और ऊर्जा प्रदान करता है।
4 मुखीब्रह्मा का स्वरूप। ज्ञान, रचनात्मकता, अध्ययन में सफलता, लेखन और कला में प्रगति देता है।
5 मुखीकालाग्नि रुद्र का स्वरूप। स्वास्थ्य लाभ, हृदय रोग से रक्षा, मानसिक शांति और दीर्घायु प्रदान करता है।
6 मुखीकार्तिकेय का स्वरूप। बुद्धि, साहस, विद्या, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है।
7 मुखीदेवी लक्ष्मी का स्वरूप। धन, समृद्धि, व्यापार में सफलता, आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य देता है।
8 मुखीगणेश जी का स्वरूप। बाधा निवारण, सफलता की प्राप्ति, शत्रु पर विजय और जीवन में सरलता लाता है।
9 मुखीदेवी दुर्गा का स्वरूप। शक्ति, साहस, भय से मुक्ति, आत्मबल और आत्मरक्षा की क्षमता बढ़ाता है।
10 मुखीभगवान विष्णु का स्वरूप। सुरक्षा, धर्म पालन, जीवन में संतुलन, न्यायप्रियता और शांति प्रदान करता है।
11 मुखीहनुमान जी का स्वरूप। साहस, विजय, शत्रु पर नियंत्रण, आत्मविश्वास और पराक्रम को बढ़ाता है।
12 मुखीसूर्य देव का स्वरूप। तेज, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सम्मान और समाज में प्रतिष्ठा दिलाता है।
13 मुखीकामदेव का स्वरूप। आकर्षण, सफलता, भौतिक सुख, प्रेम संबंधों में सामंजस्य और इच्छाओं की पूर्ति करता है।
14 मुखीभगवान शिव और हनुमान का स्वरूप। अद्भुत शक्ति, निर्णय क्षमता, स्थिरता, भय निवारण और जीवन में मजबूती देता है।

रुद्राक्ष धारण करने की विधि क्या है?

रुद्राक्ष धारण करने के लिए हमें पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।
जैसे कि हमारे जीवन में नॉन-वेज यदि हम आध्यात्मिक दृष्टिकोण से दूर रखें,
महादेव जी को जल चढ़ाना, रुद्राक्ष की शुद्ध रखना — यह क्रियाएं आवश्यक हैं।
यदि हम इन्हें पालन करें तो रुद्राक्ष हमारे जीवन में अत्यंत शुभकारक लाभ देगा।

रुद्राक्ष की शुद्धि हमेशा रहने के लिए क्या करें?

  • सोमवार को महादेव जी को जल का अभिषेक या पानी चढ़ाना।
  • अशुद्ध स्थान पर रुद्राक्ष न ले जाएं (toilet, negative energy वाले स्थान, मृत्यु स्थल)।
  • नकारात्मक ऊर्जा वाले स्थानों से दूर रखें।
  • रुद्राक्ष को गले में धारण करने से विशेष लाभ मिलता है।
  • जब रुद्राक्ष पर जल का प्रवाह होता है, तब वह अशुद्धियां शरीर से बहाकर ले जाता है।
    इसलिए रुद्राक्ष गले में धारण करना अत्यंत सहकारी माना गया है।

रुद्राक्ष कहां से उत्पन्न हुआ?

रुद्राक्ष का वृक्ष महादेव जी के आँसुओं से उत्पन्न हुआ।
जब महादेव जी के आँसू पृथ्वी पर गिरे, वहां से रुद्राक्ष का वृक्ष आया।
वही वृक्ष का फल रुद्राक्ष कहलाया। Rudraksha kyu pehna chahiye

Rudraksha

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