shattila Ekadashi vrat katha : षटतिला एकादशी संपूर्ण व्रत,पूजा विधि,दान, सभी जाने

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माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से सम्पूर्ण प्रसिद है | इस एकादशी को मराठि में मोठी एकदशी कहते है | एस एकादशी के दिन तिल का महत्व होता है | इस दिन तिल दान, तिल स्नान, धन्य दान करते है | यहाँ षटतिला एकादशी का व्रत और सभी जानकारी आपको यहाँ पर मिलेगी |

shattila Ekadashi vrat katha : षटतिला एकादशी संपूर्ण व्रत एकादशी व्रत

मुहुर्त

 एकादशी तिथि प्रारम्भ – फरवरी 05, 2024 को 05:24 पी एम बजे 

 एकादशी तिथि समाप्ति- फरवरी 06, 2024 को 06:07 पी एम बजे 

व्रत छोडनेका समय 07 फरवरी को 07 : 00 तो 09 : 19 am तक

षटतिला एकादशी के दिन दान

षटतिला एकादशी के दिन हम दान करे भगवान विष्णु केलिय हम एकादशी करते है इस कारन से हम इस दिन दान पुण्य कर्म करे इसे हमें हमारे जीवन के सभी कष्ट दूर हो और सभी केलिय सभी को शुभ फल दे और हम हमारे जीवन में growth लाये . उसी के साथ यहाँ निचे की षटतिला एकादशी व्रत कथा पढ़े तो आपको आपके जीवन में मार्ग मिलेगा |

षटतिला एकादशी व्रत कथा

एक बार नारद मुनि भगवान विष्णु के धाम बैकुण्ठ पहुंचे. वहां उन्होंने भगवान विष्णु से षटतिला एकादशी व्रत के महत्व के बारे में पूछा. नारद जी के आग्रह पर भगवान विष्णु ने बताया कि प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ब्राह्मण की पत्नी रहती थी. उसका पति मर चुका था.  वह धर्मपरायण थी, लेकिन कभी दान नहीं करती थी. न ही देवी-देवताओं और ब्राह्मणों को धन और अन्न का दान दिया था. 

इसके बाद भगवान विष्णु ने उसे बताया कि उसने जीवन में एक बार भी अन्न दान नहीं किया था. इसी कारण से उसकी कुटिया खाली रह गई. भगवान विष्णु ने उसे उपाय भी बताया. उन्होंने कहा कि जब उसे लेने स्वर्ग की देवियां आएंगी तब वह उनसे माघ माह में आने वाली एकादशी के बारे में जानें. उसका व्रत रखे और पृथ्वी पर जाकर जीवों में अन्न का दान करे. 

उस ब्राह्मणी ने भी देव-स्त्रियों के कहे अनुसार षटतिला एकादशी का उपवास किया. इसके प्रभाव से उसका घर धन्य-धान्य से भर गया. इस एकादशी व्रत के करने वाले को जन्म-जन्म की निरोगता प्राप्त हो जाती है. 

पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष का एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है. इस दिन तिल से बना हुआ व्यंजन या तिल दान करने पर पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. 

षटतिला एकादशी की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठाकर स्नान करके , नित्य कर्मा कोने के बाद , घर में मंदिर में घी दीपाक प्रजवलित करे और भगवान विष्णु या हमारे देवघर में जो गोपाल कृष्ण है उने दूध से अभिषेक करे और अभिषेक होने के बाद जलसे अभिषेक करे और भगवान को नेहलाकर वस्त्र पहनाइए ओर अपने स्थान पर विराज मन कीजिय और भगवान श्री कृष्ण की विधि वत पंचोपचार पूजा करे और गोपाल श्री कृष्ण को भोग दिखैया |

षटतिला एकादशी व्रत कोण कर सकता है ?

षटतिला एकादशी सामग्री लिस्ट

  • भगवान विष्णु प्रतिमा ,फोटो पूजा केलिय.
  • पुष्प फुल
  • नारयल
  • हल्दी
  • कुकुम
  • गुलाल
  • गोपीचंदन
  • तुलसी पत्र
  • पुष्प माला
  • मिठाई
  • दीपक घी का
  • दीपक तेलका

षटतिला एकादशी व्रत कोण कर सकता है ?

षटतिला एकादशी का व्रत सभी कर सकते है | हमारे कर्मे सभी व्यक्ति षटतिला एकादशी का व्रत करके अपने पापोसे मुक्ति पासकते है , और अपनी सभी मनो कामनाये पूरी करने केलिय षटतिला एकादशी का व्रत का उपवास करे, तो आपके जीवन का में आने वाली प्रोब्लम्स ख़तम होगी और शुभ फल आपको मिलेगा .

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