रावण sahita
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रावण संहिता: दशानन ज्योतिष परिचय | Jyotish Parichay

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रावण संहिता दशानन ज्योतिष परिचय | Jyotish Parichay


भगवान शंकर है रावण समस्त जगत के प्राणियों के भूत भविष्य वर्तमान को प्रभावित करने वाले ग्रहों का अध्ययन करने के लिए किसी व्यक्ति की कुंडली जानने के लिए निम्नलिखित ज्योतिष तथ्यों को जानना परम आवश्यक है अतः पाठकों की सुविधा हेतु उनका संक्षिप्त वर्णन यहां किया जा रहा है इस विषयों के बारे में आगे पड़े

ग्रह सूर्य मंडल के यह सदस्य संख्या में 9 है तथा सूर्य के चारों तरफ परिक्रमा करते हैं| इनका समस्त पृथ्वी के चराचर वस्तुओं व जीवो पर प्रभाव पड़ता है क्या यू कहे कि उनका जन्म विकास एवं उन्नति अवनति इन्हीं के प्रभाव से नियंत्रित होता है- 1 सूर्य,2 चंद्र, 3 मंगल, 4 बुद्ध, 5 गुरु, 6 शुक्र, 7 शनि, 8 राहु, 9 केतु.| इनमें साथ मुख्य ग्रह है जिनके पिंड आकाश में दिखाई देते हैं राहु एवं केतु छाया ग्रह है इनके पिंड आकाश मंडल में नहीं है| आधुनिक खोजने में हर्षल, नेपच्यून, तथा प्लूटो तीन अन्य ग्रहों का भी पता चलता है परंतु भारतीय ज्योतिष में अभी इन्हें सम्मिलित नहीं किया गया है| पृथ्वी से अंत अत्यधिक दूर होने के कारण इनका प्रभाव भी सामान्य जनक जीवन पर बहुत ही काम माना जाता है| यह ग्रह अपने सामूहिक प्रभाव के लिए अधिक जाने जाते हैं| पाश्चात्य ज्योतिष इन तीन नए ग्रहों के विषय में अध्ययन करते हैं|

वार- पूर्वक्त साथ ग्रहण के नाम पर ही सात वार (दिन) माने गए हैं| रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार. | इन्हें सम्मिलित रूप से सप्ताह कहा जाता है| दो सप्ताह या 15 दिन का एक पक्ष माना जाता है| दो पक्ष को एक मास या महीना माना जाता है| 12 महीना का एक वर्ष तथा 12 वर्षों का सामान्य योग माना जाता है|

रावण sahita
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नक्षत्र एवं राशिया

नक्षत्र एवं राशिया ज्योतिष में अध्ययन की सुविधा के लिए आकाश मंडल को 360 अंक या 208 भागों में बाटा गया है | 30 अंश अथवा 9 भाग की एक राशि होती है रसिया 12 है| मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन.
इस प्रकार ज्योतिषों ने संपूर्ण आकाश मंडल को 27 भागों में भी बांटा गया है यह भी 27 नक्षत्र माने जाते हैं|

अश्विनी, भरनी, कृतिका, रोहिणी, मृग, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, जेष्ठ, मूल, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, शताभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, रेवती.
सामान्यतः एक नक्षत्र 60 घाटी का होता है| उत्तराखंड नक्षत्र की 15 घाटी तथा श्रवण नक्षत्र के प्रारंभ की चार घटी इस प्रकार कुल 19 घटी के मां का अभिजीत नमक 28 सवा नक्षत्र भी माना जाता है| प्रत्येक नक्षत्र को चार भागों में बताकर चार-चार बात किए गए हैं तथा प्रत्येक नक्षत्र का एक-एक नक्शा निर्धारित किया गया है जिस जातक(जन्म लेने वाला) का जिस नक्षत्र के जी चरण में जन्म होता है इस चरण अक्षर के नाम पर उसका जन्म कालीन नाम निर्धारित किया जाता है| जैसे उत्तराशादा के दूसरे चरण का “भो” नक्षत्र है| तो उत्तर शाखा के दूसरे चरण में जन्म लेने वाले का नाम व अक्षर से प्रारंभ होने वाला नाम होगा| जैसे भोलानाथ भूमि राम आदि| विभिन्न नक्षत्र के चरण अक्षरों के विषय में आगे लिखा अनुसार समझना चाहिए सवा दो नक्षत्र की एक राशि होती है|

मेष राशि – 

  1. अश्विनि नक्षत्र:- चू, चे, चो, ला
  2. भरणी नक्षत्र:-ला, ली, लू, ले, लो
  3. कृतिका नक्षत्र:- आ,ई, ऊ, ए

वृषभ राशि-

  1. कृतिका नक्षत्र:-  आ,ई, ऊ, ए
  2. रोहिणी नक्षत्र:- ओ, वा, वी, वू
  3. मृगशिरा नक्षत्र:- वे, वो,का, की

मिथुन राशि-

  1. मृगशिरा नक्षत्र:- वे, वो,का, की
  2. आर्द्रा नक्षत्र:-  कू, घ, ङ, छ
  3. पुनर्वसु नक्षत्र:- के, को, हा, ही

कर्क राशि –

  1. पुनर्वसु नक्षत्र:- के, को, हा, ही
  2. पुष्य नक्षत्र:- हू, हे, हो, डा
  3. अश्लेषा नक्षत्र:- डी, डू, डे, डो 

सिंह राशि-

  1. मघा नक्षत्र:-  मा, मी, मू, मे
  2. पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र:- मो, टा, टी, टू
  3. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र:- टे,टो,पा,पी

कन्या राशि –

  1. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र:- टे,टो,पा,पी
  2. हस्त नक्षत्र:- पू, ष, ण, ठ
  3. चित्रा नक्षत्र:- पे,पो, रा,री

तुला राशि –

  1. चित्रा नक्षत्र:- पे,पो, रा,री
  2. स्वाती नक्षत्र:- रू, रे, रो, ता
  3. विशाखा नक्षत्र:- ती, तू, ते, तो

वृश्चिक राशि –

  1. विशाखा नक्षत्र:- ती, तू, ते, तो
  2. अनुराधा नक्षत्र:- ना, नी, नू, ने
  3. ज्येष्ठा नक्षत्र:- नो, या, यी, यू

धनु  राशि –

  1. मूल नक्षत्र:- ये, यो, भा, भी
  2. पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र:- भू, धा, फा, ढा
  3. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र:- भे,भो, जा, जी

मकर राशि –

  1. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र:- भे,भो, जा, जी
  2. श्रवण नक्षत्र:- खी, खू, खे, खो
  3. धनिष्ठा नक्षत्र:- गा, गी, गू, गे

कुंभ राशि –

  1. धनिष्ठा नक्षत्र:- गा, गी, गू, गे
  2. शतभिषा नक्षत्र:- गो, सा, सी, सू
  3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र:- से, सो, दा, दी

मीन राशि –

  1. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र:- से, सो, दा, दी)
  2. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र:- दू, थ, झ, ण
  3. रेवती नक्षत्र:- दे, दो, चा, ची

अभिजित नक्षत्र की गणना मकर राशि के अंतर्गत की जाती है उसके चरण अक्षरों के जू,जे, जो,खा.

इसी तरह से ज्योतिष की अध्ययन करना चाहिए और ज्योतिष सीखना चाहिए यह रावण संहिता में का कुछ अंक यहां पर बताया गया है आगे के लेख में आगे बताया गया है वह भी आप पढ़ सकते हैं राशियों का महत्व राशिफल, ग्रहों का फल, किस स्थान में कौन सा ग्रह फल देता है, युति होने से क्या फल मिलता है, ग्रहों के मूल त्रिकोण स्थान, जन्म कुंडली तथा उसके 12 भाव का फल ग्रहों के स्थिति के अनुसार फल, 12 राशियों के तंत्रोक्त मंत्र. यह सारी बातें नीचे दिए गए लिखो में दी गई है तो वह अवश्य पढ़े और अपना अध्ययन आगे बढ़ते रहे| Jyotish Parichay


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