द्वितीय भाव में सूर्य का प्रभाव : kundali me surya ka prabhav

kundali janm kundali

जानिए आपकी कुंडली मे सूर्य भगवान का फल किस भाव मे है | kundali me surya ka prabhav

सूर्य भगवान का प्रभाव आपके कुंडली मे जाणे अपनी जीवन रेखा ?

स्वभाव

द्वितीय भाव का सूर्य, जातक को झगड़ा करने वाला, उग्र उत्तेजित एवंऊँची आवाज में बोलने वाला बनाता हैं ।

सप्तम दृष्टि

सूर्य के द्वितीय भाव में स्थित होने से उसकी सप्तम दृष्टि मृत्यु (अष्टम भाव) पर पड़ती है इससे जातक कि लंबी आयु होती है।

Nakshatra surya

मित्र/शत्रु राशि

द्वितीय भाव में मित्र, स्व व उच्च राशि के सूर्य का जातक धनवान बनता है। उसके पास संपत्ति भी होगी और धन का संचय भी हो पायेगा । शत्रु व नीच राशि का सूर्य द्वितीय भाव में स्थित होने से जातक का धन का नाश होगा । जातक अपनी पैतृक संपत्ति का भी नाश करेगा ।

द्वितीय भाव विशेष

द्वितीय भाव में सूर्य की स्थिति से जातक को पैत्रिक संपत्ति नहीं मिलती है | द्वितीय भाव में सूर्य से जातक परिवारजनों से विवाद करता है |

Similar Posts

  • jivan ka sar | srushti ka vidhan https://vedashreejyotish.com/

    shree mat bhavat gita saar in hindi jivan ka sar | srushti ka vidhan https://vedashreejyotish.com/ श्रीमत् भगवद् गीता सार हिंदी में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह महाभारत के महायुद्ध के बाद भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है। इस ग्रंथ में जीवन के असली अर्थ और मार्ग बताए गए हैं, जो मनुष्य को…

  • | |

    Jivanoopayogi Todga

    Jivanoopayogi Todga
    (१) आपण रस्त्यावर अनेक वेळेला जोडपी चालताना पाहतो. अशा वेळी त्यांच्यामधून जाऊ नका. पत्नीशी अगर पतीशी वितुष्ट येण्याची शक्यता असते असा हा संकेत आहे.

  • what is Nirjala ekadashi | निर्जला एकादशी

    निर्जला एकादशी | Nirjala ekadashiche mahatav | what is Nirjala ekadashi | निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शु. एकादशीला निर्जला किंवा भीमसेनी एकादशी असे नाव आहे. सबंध वर्षात दुसरी कोणतीही एकादशी न करता या एकादशीचे व्रत विधिपूर्वक केल्यास सर्व एकादशी व्रतांचे पुण्य मिळते, असे सांगितले आहे. या व्रताचा विधी असा :- एकादशीला आचमनाव्यतिरिक्त पाणी न पिता व…

  • What is the difference between astronomy and astrology | खगोल विज्ञान और ज्योतिष

    खगोल विज्ञान और ज्योतिष में क्या अंतर है? इन दोनों शब्दों को अक्सर एक दूसरे से मिला दिया जाता है, लेकिन वे वास्तव में अलग-अलग चीजें हैं। जबकि दोनों ग्रहों और अन्य खगोलीय वस्तुओं से संबंधित हैं, खगोल विज्ञान एक वैज्ञानिक अनुशासन है, जबकि ज्योतिष एक भविष्यवाणी विश्वास प्रणाली है। खगोल विज्ञान अंतरिक्ष में वस्तुओं…

  • सूर्य यंत्र

    सूर्य यंत्र Surya yantra सूर्य यंत्र ब्रह्माड में सूर्य ही सर्वोपरि ग्रह है जिसके इर्द गिर्द सभी सितारे ग्रह और नक्षत्र घूमते हैं। पृथ्वी के सभी जड़ और चेतन पदार्थों पर इसकी रश्मियों का प्रभाव पड़ता है मौसम, वनस्पति, मानव सभी सूर्य किरणों से प्रभावित होते हैं डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की मान्यता है कि उगते…

  • श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज श्री दत्त अवतार | Narsiha Saraswati Maharaj

    जन्म: लाडाचे कारंजा, पौष शुद्ध इ. स. १३७८आई/वडिल: आंबामाता / माधव वेष: संन्यासीमुंज: इ. स. १३८५ गुरु: कृष्णसरस्वती संन्यास: इ. स. १३८८ तिर्थाटन: इ. स. १३८८ ते  १४२१औदुंबर चातुर्मास: इ. स. १४२१नरसोबावाडी: इ. स. १४२२ ते  १४३४गाणगापुर: इ. स. १४३५ ते  १४५८   कार्यकाळ: इ.स. १३७८ ते १४५८निजानंदीगमन: इ. स. १४५८  विशेष: दत्तावतार, धर्मसंस्थापनेचे कार्य चरित्र ग्रंथ, श्री गुरुचरित्रशिष्यपरंपरा:१) माधव सरस्वती२) बाळसारस्वती३) कृष्णसरस्वती४) उपेंद्र माधव सरस्वती५) सदानंद सरस्वती६) ज्ञानज्योति सरस्वती७) सिद्ध सरस्वती श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज श्री दत्त अवतार |…

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.