दिपावली-Dipawali

दिपावली-Dipawali

भारत में सबसे बड़ा उत्सस है, हर साल दिपावली आती है और सब को आनंदीत और उत्सहीत करति है। इस साल दिपावली 11 ओक्टोम्बर से शुरू हो रही है |

  • रमा एकादशी दि. 11/12/2020 वार :- बुधवार
  • वसुबारस दि. 12/11/2020 वार :- गुरुवार
  • धनत्रयोदशी दि. 13/11/2020 वार :- शुक्रवार
  • नरक चतुर्दशी दि. 14/11/2020 वार :- शनिवार
  • लक्ष्मी कुबेर पुजन दि. 14/11/2020 वार :-शनिवार
  • गोवर्धन पूजन दि. 15/11/ 2020 वार :-रविवार
  • दिपावली पाडवा दि. 16/11/2020 वार :- सोमवार
  • वसुबारस

वसुबारस के दिन गोऊ माता की पूजा करते है |गोऊ माताकी पूजा करनेसे घरमे सुखशान्ति मिलती है|

  1. धनत्रयोदशी

धन की देवता भगवान कुबेर और लक्ष्मी माता इन देवता को प्रसन्न रखने के लिये इस दिन लक्ष्मी माता और कुबेरदेवता की विधीवत पूजा करते है|इनदिनों लक्ष्मी कुबेर देवकी पूजा करे तो जीवन में आने वाली सभी परेशानीया दूर होती है |इस दिन सोना खरेदी करना शुभ माना गया है|

लक्ष्मी माता की और कुबेर भगवान् की मूर्ति/फोटो घर लाने से लक्ष्मी माता और कुबेर भगवान् भाग्य बदलने का प्रतिक माना जाता है | इसलिए इस दिन लक्ष्मी-कुबेर भगवान् की मूर्ति/फोटो घर लाना चाही ये|धनत्रयोदशी के दिन धनवंतरी की पूजा करे तो धन और आरोग्य अच्छा रहता है|

  • नरक चतुर्दशी

इस वर्ष नर्क चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजन एकही दिन है|(दि.14/11/2020) इस दिन सुबह जल्दी जागना और सूर्योदय से पहले स्नान करने की एक परंपरा है। कहानी यह है कि दानव राजा नरकासुर- प्रागज्योतीसपुर (नेपाल) के शासक- इंद्र देव को हराने के बाद, अदिति (देवताओं कि माँ) अपने अन्त:पुर में देवताओं और संतों की सोलह हजार बेटियों को कैद कर लेते हैं। नर्क चतुर्दशी के अगले दिन, भगवान कृष्ण ने दानव को मार डाला और कैद हुई कन्याओं को मुक्त कराकर, अदिति के कीमती झुमके बरामद किये थे। महिलाओं ने अपने शरीर को सुगंधित तेल से मालिश किया और अपने शरीर से गंदगी को धोने के लिए एक अच्छा स्नान किया। इसलिए, सुबह जल्दी स्नान की यह परंपरा बुराई पर दिव्यता की विजय का प्रतीक है। यह दिन अच्छाई से भरा एक भविष्य की घोषणा का प्रतिनिधित्व करता है।

  1. लक्ष्मी कुबेर पुजन

तीसरा दिन, लक्ष्मी कुबेर पुजन का दिन अत्यंत महत्व पूर्ण होता है, इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर भगवान् को आवाहित की या जाता है, माता रानी की इस दिन भक्ति भाव से विधिवत पूजन करते है|लक्ष्मी माता की भक्ति भाव से पूजा प्रार्थन कर ने से माता प्रसन्न होती है| लक्ष्मीजी दीपावली कि रात को पृथ्वी पर चलती हैं और विपुलता व समृद्धि के लिए आशीर्वाद की वर्षा करती है|इस दिन लोग शाम को भक्ति भाव से लक्ष्मी कुबेर पूजा करते है, अपने घर को दीप से प्रकाश मान करते है|

  1. गोवर्धन पूजा (बलि प्रतिपदा) |Govardhan Puja

दिपावली का चौथा दिन यह वो दिन भी है जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र देव की मूसलाधार बारिश के क्रोध से गोकुल के लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था, और सभी भक्तो की रक्षा की थी|

  1. दिपावली पाडवा

भाइयों और बहनों के लिए यह दिन अत्यंत महत्व पूर्ण है| भाइयों और बहनों के बीच प्रेम का प्रतीक दर्शाता है। भाई उन्हें उनके प्यार की निशानी के रूप में एक उपहार देते हैं।

दिपावली मुहूर्त

पुष्य नक्षत्र योग (वहीखाते खरेदीचा मुहुर्त)

दि. 07/11/2020 वार :- शनिवार

सकाळी 08:05 – 09:14 शुभ
दुपारी 12:04 – 01:28 चंचल
दुपारी 01:28 – 04:18 लाभ/अमृत
संध्या 05:42 – 07:18 लाभ

धनत्रयोदशी (धनतेरस) मुहुर्त

दि. 13/11/2020 वार:-शुक्रवार

सकाळी 07:53 – 09:17 लाभ
सकाळी 09:17 – 10:41 अमृत
दुपारी 12:05 – 01:29 शुभ
संध्या 04:17 – 05:42 चंचल

श्री महालक्ष्मी कुबेर पूजन (दिपावली)

दि. 14/11/2020 वार :- शनिवार दिपावली मुहूर्त

अमावस्या आरंभ दि.14/11 वेळ 02:18 ते समाप्ती दि.15/11 वेळ 10:37

दुपारी 12:54 – 02:32 स्थिर कुंभ लग्न
दुपारी 01:28 – 02:52 लाभ
दुपारी 02:52 – 04:16 अमृत

संध्या 05:40 – 07:16 लाभ

गोरज (गोधुली) 05:11 – 07:00 विशेष मुहूर्त
प्रदोष वेळ 05:30 – 09:15 शुभ वेळ
संध्या 05:52 – 07:53 स्थिर वृषभ लग्न
रात्री 08:53 – 10:29 शुभ
रात्री 10:29 – 12:05 अमृत
मध्य रात्री 12:05  – 01:41 चंचल
मध्य रात्री 12:17 – 02:24 स्थिर सिंह लग्न

बली प्रतिपदा (दिपावली, पाडवा)

दि.16/11/2020 वार:-सोमवार

सकाळी 06:30 – 07:53 अमृत
सकाळी 09:17 – 10:41 शुभ
दुपारी 01:29 – 05:40 चंचल / लाभ
संध्या 05:40 – 07:16 चंचल

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