Mulank 1 मूलांक 1 का विवाह भाग्य का फल ?
अपना मुलांक-भाग्यअंक कैसे पता करे ?
यहाँ आपको मूल अंक अर्थात मूलांक बनाना बता रहे हैं। यह जन्म की तारीख से
बनाया जाता है। यदि किसी की जन्म तारीख न हो तो यह जन्म तिथि से भी बनाया जा
सकता है। मान लो किसी व्यक्ति की जन्म तारीख एक है, तो उसका मूलांक 1 होगा। इस
प्रकार 2 का 2, 3 का 3, 4 का 4, 5 का 5, 6 का 6, 7 का 7, 8 का 8 एवं 9 जन्म तारीख
का मूल अंक 9 रहेगा।
तारीख 10 का 1+0 = 1 होगा तथा इसी तरह 11 का 1+1 = 2,
12 का 1+2 = 3, 13 का 1+3 = 4, 14 का 1+4=5, 15 का 6, 16 का 7, 17 का 8, 18
का 9, 19 का 10 अर्थात् 1, 20 का 2, 21 का 3, 22 का 4, 23 का 5, 24 का 6, 25 का
7, 26 का 8, 27 का 9, 28 का 10 अर्थात् 1, 29 का 11 अर्थात् 2, 30 का 3, 31 का 4 मूलांक
बनेगा।
जन्मतिथि से मूलांक बनाने की विधि यह है कि एक महीने में 30 तिथियाँ होती हैं
और मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। पूर्णमासी के बाद की प्रतिपदा की संख्या
16, द्वितीया की 17, तृतीया की 18 होती है।
इसी प्रकार अमावस्या की तिथि संख्या 30 होगी। शुक्लपक्ष की प्रतिपदा की संख्या 1 से चलकर पूर्णमासी तक 15 तथा कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक 16 से लेकर 30 तक होती है। वैसे आजकल अंग्रेजी तारीख सर्वत्र
प्रचलित है और पूरी जन्मतिथि मालूम हो तो अंग्रेजी तारीख भी निकाली जा सकती है।
परन्तु यदि कभी अंग्रेजी तरीख न मिले और तिथि मालूम हो जाये तो तिथि का मूल अंक
बनाकर फल कथन किया जा सकता है।
किसी भी संख्या का मूल अंक जानने का आसान तरीका यह है कि उस संख्या में
9 का भाग दीजिये, जो शेष बचे वही मूल अंक होगा। 0 शून्य बचे तो 9 मूल अंक होगा।
नीचे 1 से 9 तक के मूलांकों के बाबत विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।

मुलांक 1 होणे पर कैसे फल आपको मिळते है?
मूलांक 1 सूर्य आपका मुलांक 1 है तो आपके अंक का स्वामी सूर्य है
किसी भी वर्ष या महीने की 1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति
या जातक का मूलांक 1 होता है। ऐसे जातक सूर्य ग्रह से प्रभावित होते हैं। इन पर सूर्य
का प्रभाव विशेष रूप से देखा गया है। यह स्थिर विचारधारा के व्यक्ति रहते हैं एवं अपने
निश्चय पर दृढ़ रहते हैं। जीवन में जब भी यह किसी को वचन इत्यादि देते हैं तो उन्हे पूर्ण
निभाने की कोशिश करते हैं।
इनकी इच्छा शक्ति दृढ़ होती है तथा जो भी कार्य या विचार
अपने मन में बना लेते हैं, उनका पालन करने की निरन्तर कोशिश करते हैं। प्रेम संबंध या
मित्रता के संबंध स्थाई और लम्बे समय तक मधुर बने रहते हैं। जब कभी किसी कारणवश
इनका किसी से विवाद या शत्रुता हो जाती है तो ऐसी परिस्थिति में इनका शत्रु या
विभाजित व्यक्ति से मन मुटाव दीर्घ काल तक बना रहता है। Mulank 1
इनकी मानसिक स्थिति स्वतन्त्र विचार धारा की होने से पराधीन रहकर कार्य करने
में असुविधा महसुस करते हैं। किसी के अनुशासन में कार्य करने की अपेक्षा यह स्वतंत्र रूप
से कार्य करना अधिक पसंद करते हैं। निष्पक्ष कोशिश एवं महत्वकांक्षा रहती है कि यह जो
भी कार्य करें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र हो, उस कार्य में किसी बाहरी व्यक्ति का बीच में हस्तक्षेप
इनको मंजूर नहीं होता है।
मूलांक 1 का स्वामी सूर्य ग्रह होने के कारण सूर्य से संबंधित गुण
कमोवेश मात्रा में इनके अन्दर मोजूद रहती है। जिसके प्रभाव से यह दुसरों का उपकार एवं
उपचार निरन्तर करते रहते हैं। सामाजिक क्षेत्र में यह सूर्य के समान ही प्रकाशित होना
पसंद करते हैं। सामाजिक संगठनो में मुखिया एवं निरन्तर उच्च पद पाने की इनकी चाहत
बनी रहती है। जिसे यह अपनी मेहनत एवं लगन से प्राप्त कर लेते हैं।
मूलांक 1 के अन्दर जन्म लेने वाले व्यक्ति महत्वाकांक्षी होते हैं। उन्हे किसी भी
प्रकार का प्रतिबंध अपने ऊपर पसंद नहीं आता। वे जो भी कार्य, धंधा या व्यवसाय अपनाते
हैं उसमें सदैव उन्नति के शिखर पर अपने परिश्रम से पहुँचते हैं। अपने क्षेत्र एवं व्यवसाय
में हमेशा प्रमुख की भूमिका अदा करने के आकांक्षी होते हैं।
यह विभागी प्रमुख होने के साथ साथ सत्ता सम्पन्न होते हैं एवं अपने अधिनस्थ व्यक्तियों से मान सम्मान प्राप्त करना जानते
हैं। चूंकि इनमें नेतृत्व करने का गुण सर्वोपरि रहता है, इसलिये यह गुण जन्म से मृत्यु तक
इनमें बना रहता है। जीवन की प्रारंम्भिक अवस्था में भी यह गुण दिखलाई देता है। यह
धैर्यवान होते हैं एवं धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़ते। यह अपने अध्ययन में कमी नहीं आने
देते एवं अच्छी सूझ बूझ के साथ अपनत्व भाव रखते हुए स्वतन्त्रता पूर्वक कार्य करते रहते।
हैं तथा अपने कार्य में किसी पर निर्भर नहीं रहते। यह भावुकता में दुसरों पर विश्वास कर
कभी कभी धोखा भी खा जाते हैं।
मूलांक 1 वाले व्यक्तियों के लिए किसी भी मास की 1, 10, 19 और 28 तारीख
विशेष महत्वपूर्ण होती है। इन तारीखों में इनके कई कार्य बनते हैं। इनको रविवार एवं
सोमवार का दिन महत्वपूर्ण रहता है। यदि इन्ही वारों में उपरोक्त तारीख भी आ जाती है
तब यह इनके लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए उपयुक्त रहती है। इनके लिए
जनवरी, अप्रेल, जुलाई एवं अक्टुबर का मास विशेष प्रभावशाली रहता है।
इनके जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष- 1, 10, 19, 28, 37, 46, 55, 64, 73 मूलाक के प्रभाव
से तथा 8, 17, 26, 35, 44, 53, 62, 71, 80, एवं 13, 22, 31, 40, 49, 67, 76 मित्रांक के
प्रभाव से हैं। इन वर्षों में सभी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित होने के योग रहते हैं।
मूलांक 1 के प्रभाववश इस्वी सन् जिनका योग 1, 4, 8, होता है इनके लिए विशेष
घटनाक्रम वाले होते हैं। जोकि
मूलांक 1 के प्रभाव से 2008, 2017, 2026, 2035, 2044,
2053, 2062, 2071, 2080,
मित्रांक 4 के प्रभाव से 2002, 2011, 2020, 2029, 2038, 2047,
2056, 20.65, 2074 एवं
मित्रांक 8 के प्रभाव से 2006, 2015, 2024, 2033, 2042, 2051,
2060, 2069, 2078 हैं।
मूलांक 1 वाले व्यक्तियों की अंक 4 एवं अंक 8 से मित्रता रहती है। अतः इनके
जीवन में 1, 4, 8 के अंक विशेष घटना क्रम वाले होते हैं। अंक 2, 3, 7, 9 सम रहते हैं तथा
5 एवं 6 के अंक शत्रु होते हैं। उपरोक्त मित्र शत्रु एवं सम अंक से संबंधित दिन, तारीख,
मास, वर्ष का भी प्रभाव इन पर आता है।
कीरो के मतानुसार इनके शुभ अंक 1, 2, 4 तथा 7 हैं। जिनका जन्म 21 मार्च से 28
अप्रेल के मध्य होता है उनमें भी अंक 1 के सभी गुण विद्यमान रहते हैं। क्योंकि इस अवधि
में सूर्य का मेष राशि में प्रवेश होता है और इस काल में सूर्य पूर्णतः उच्च भाव में पूर्णतः सर्व
शक्तिमान होता है।
जिनका जन्म 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य होता है वह भी 1 या
सूर्य के प्रभाव में होते हैं। क्योंकि इस समय सूर्य अपनी राशि सिंह में रहता है। मेष एवं सिंह
दोनो ही अग्नि तत्व की राशियां हैं। इस कारण इनका स्वभाव सिंहवत होता है। सिंहवत
होने से यह अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करते हैं। इनको अधिकांशतः अपने कार्यो में सफलता
प्राप्त होती है तथा समाज में प्रतिष्ठा मिलती है। यह व्यर्थ के आडम्बर, तड़क भड़क से दूर
रहते हैं। इनका क्रोध क्षणिक होता है।
चाटुकारता, दिवानगी, ओछापन, खुदगर्जी पसंद नहीं होती। सत्य के मार्ग पर यह चलते हैं तथा इनके विचारों में मौलिकता, नई सूझ बूझ, तीव्र कल्पना शक्ति होती है।
सिंह में या मेढ़ा में जितनी ताकत होती है उतनी ही ताकत से यह
अपने कार्य में लगे रहते हैं। दूसरों की मदद करना इनके स्वभाव में रहता है। ऐसे व्यक्ति
विपरीत लिंग की ओर सदैव आकर्षित रहते हैं और कई बार चोट भी खाते हैं। परिर्वतन
इनका विशेष गुण है। व्यापार हो या नौकरी, समाज सेवा या राजनिति, धार्मिक क्षेत्र हो या
पारिवारिक इनमें यह सदैव परिवर्तन के अनुयायी रहते हैं। इस कारण इनके स्वभाव को तथा
आचरण को समझना थोड़ा कठिन होता है। एक ही मार्ग, एक ही लक्ष्य इनको पसंद नहीं
आता। ऐसे व्यक्ति गुप्त शत्रुओं से कभी कभी घात खाते रहते हैं। कुंडली मे विवाह योग जानीया

कीरो के मत से इनकी मित्रता अंक 1, 2, 4 तथा 7 अंक वालों से रहती है। जिनका
जन्म 21 मार्च से 28 अप्रेल के मध्य तथा 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य होता है उनसे
भी इनके संबंध मधुर बनते हैं। इनके लिए रविवार एवं सोमवार के दिन सभी कार्यों के लिए
शुभ रहते हैं। अंक 1 के अन्तर्गत जन्मे व्यक्तियों के लिए अधिक भाग्यशाली रंग सुनहरी,
पीला और तांबई या सुनहरा तांबई रंग हैं। इनका श्रेष्ठ रत्न पुखराज, पीतरत्न, पीला हीरा
तथा इनके रंगों के अन्य रत्न हैं। भारतीय मत से इनका प्रभावशाली रत्न माणिक है।
सेफेरियल के मतानुसार मूलांक एक के व्यक्तियों को नौ का अंक स्पन्दित करता है।
चार एवं आठ के अंक आकर्षित करते हैं तथा 6 एवं 7 के अंक विपरीत रहते हैं। जबकि 2,
3 एवं 5 के अंक मध्यम फल देते हैं। इन्हे रविवार का दिन विशेष लाभप्रद रहता है।
अंक शास्त्र कि संपूर्ण information
