7 , bhav me sury bhagvan सातवे भाव में सूर्य का प्रभाव

जानिए सातवे भाव में सूर्य भगवान क्या फल देते है |

स्वभाव

सप्तम स्थान में स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक प्रभावशाली, साहसी, यशस्वी, तीक्ष्ण स्वभाव वाल, कठोर और प्रखर होता है।जातक के हाव भाव एवं स्वभाव में गंभीरता होती है।

पूर्ण दृष्टि

लग्न पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि के प्रभाव से जातक प्रतिभाशाली, राजमान्य, सफल एवं अहंकारी होता है। वह किसी भी प्रकार के दबाव का विरोध करता है।

Nakshatra surya

मित्र / शत्रु राशि

सप्तम भाव में स्व, मित्र और उच्च राशि में स्थित सूर्य प्रबल होता है जिससे जातक ईमानदार, धनी और जीवन के सुखों का आनंद उठाता है। जातक की पत्नी अतिथि सत्कार में कुशल होती है किंतु जातक का उसकी पत्नी से झगड़ा होता रहता है। शत्रु राशि व नीच राशि में सप्तम भाव में स्थित सूर्य अशुभ फल देता है। जातक के वैवाहिक जीवन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। जातक स्वतंत्रता प्रिय होता है। जातक को किसी प्रकार का बंधन अथवा रोक-टोंक पसंद नहीं होती है।

भाव विशेष

सप्तम स्थान में सूर्य के प्रभाव से जातक के दाम्पत्य संबंध में खटास होती हैं एवं उसका तनाव पूर्ण वैवाहिक जीवन होता है। यह जातक को ईर्ष्यालू भी बनाता है। सप्तम स्थान पर सूर्य जातक को कठोर एवं स्वाभिमानी बनाता है। जातक अपमानित होता है एवं हमेशा चिंतायुक्त रहता है।

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