गुरु ग्रह यंत्र
गुरु ग्रह यंत्र

गुरु के निर्बल होने पर यकृत रोग, मज्जा रोग, मोटापा, दंत रोग, मस्तिष्क विकार, कर्ण रोग, वायु जन्य विकार, तनाव आदि होते हैं। बृहस्पति ग्रह अध्यात्म, विवेक, ज्ञान तथा परोपकार आदि का कारक है। अध्यात्मिक श्री बृहस्पतियन्त्रम् साधना में सिद्धि के लिए इस ग्रह का विशेष महत्व है, इसके अतिरिक्त पारलौकिक सुख, ज्ञान, विद्या, न्याय, श्रेष्ठ गुण तथा धर्म-कर्म संबंधी कार्यो से इसका धनिष्ठ संबंध है। स्त्री जातक के लिए इस ग्रह से पति सुख का विचार किया जाता है।

बृहस्पति यंत्र की साधना मुख्यतः विद्या प्राप्ति, यश, वन एवं आध्यात्म सुख, शांति के लिए अधिक फलदायी होती है। इस यंत्र के नित्य दर्शन, पूजन से व्यक्ति की अभ्यातर शक्ति जागृत होती है। जिससे नई चेतना का उदय होता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्ति बुद्धि विवेक से सफल होते हैं। यदि कन्या के विवाह में विलंब हो हो तो इस यंत्र की नित्य प्रति धूप, दीप से पूजा करें। अध्ययन में बाधाएं आती हो, मन न लगता हो ऐसी परिस्थिति में इस मंत्र की नित्य पूजा से लाभ प्राप्त होता है। विशेष इस यंत्र में अंकित मंत्र का प्रतिदिन जप करने से शीघ्र कार्य सिद्धि होती है।
मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः।
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