कुलदेवी के आशीर्वाद क्यों जरूरी हैं ?

कुलदेवी के आशीर्वाद क्यों जरूरी हैं ?

विषय बहुत महत्वपूर्ण हैं ।

इस विषय को समझते वक़्त सभी साधना , कुण्डलिनी , श्रीविद्या , दसमहाविद्या जो भी कोई साधना आप कर रहे हो , सब एक बाजू रखें ।

क्योंकि कुलदेवी की कृपा का अर्थ है , सौ सुनार की एक लोहार की , बिना इसके कृपा से किसीके कुल का वंश ही क्या कोई नाम फेम कुछ भी आगे बढ नहीं सकता ।

लोग भावुक होकर अथवा आकर्षित होकर कई साधनाए तो करते हैं , पर वो जानते नहीं की जब आप अपनी कुलदेवी को पुकारे बिना किसी भी देवी देवता की साधना करते हो , वो साधना कभी यशस्वी नहीं होती ; उलटा कुलदेवी का प्रकोप अथवा रुष्टता और ज्यादा बढ़ती हैं ।

*कई जगहों पर आज भी कुछ परंपरा हैं , घर के पूजा घर में कुलदेवी के रूप में सुपारी अथवा प्रतिमा का पूजन करना , घर से बहार लंबी यात्रा हो तो कुलदेवी को पहले कहना , साल में दो बार कुलदेवी पर लघुरूद्र अथवा नवचंडी करना …… यह सब आज भी हैं ।

हर घर की एक कुलदेवी रहती हैं ।

आज भारत में 70% परिवार अपने कुलदेवी को नहीं जानते । कुछ परिवार बहुत पीढ़ियों से कुलदेवी का नाम तक नहीं जानते ।

इसके कारण , एक निगेटिव दबाव उस घर के कुल के ऊपर बन जाता हैं और अनुवांशिक प्रॉब्लम पैदा होती हैं ।

कुलदेवी की कृपा के बिना अनुवांशिक बीमारी पीढ़ी में आती है , एक ही बीमारी के लक्षण सभी लोगो को दिखते हैं

मनासिक विकृतियाँ अथवा स्ट्रेस पूरे परिवार में आना

कुछ परिवार एय्याशी की ओर इतने जाते है कि सबकुछ गवा देते हैं !

बच्चे भी गलत मार्ग पर भटक जाते हैं

शिक्षा* में अड़चनें आती है

किसी परिवार में सभी बच्चे अच्छे पढ़ते हैं फिरभी जॉब ठीक नहीं मिलती!

  • कभी तो किसीके पास पैसा बहुत होता है पर मनासिक समाधान नहीं होता !
  • यात्राओं में अपघात होते है अथवा अधूरी यात्रा होती हैं

बिजनेस में भी ग्राहक पर प्रभाव नहीं बनता अथवा आवश्यक स्थिरता नहीं आती ।

विदेशों में बहुत भारतिय बसे है , उनके पास पैसा होकर भी एक असमाधानी वृत्ति अथवा कोई न कोई अड़चन आती है , इतने लंबा सफर से भारत में कुलदेवी के दर्शन के लिए नहीं आ सकते ।

यह सब परेशानी हम देख रहे हैं ।

मित्रों , यह सब परेशानी आप किसी हीलिंग अथवा किसी ध्यान अथवा किसी दसमहाविद्या के मंत्रो से दूर नहीं कर सकते ।

बल्कि , अगर और अंदर कहूँ तो कोई भी दसमहाविद्या की दीक्षा में सबसे पहले गुरु उस साधक की कुलदेवी का जागरण करवाने की दीक्षा अथवा साधन पहले देता हैं ।

आजकल ये महाविद्याओं की साधनाओ में कोई करता नहीं सभी सीधा मंत्र देते है , बाद उसका फल यह मिलता है कि वो साधक ऐसे जगह पर फेक दिया जाता है , जहाँ से वो कभी उठ ही न पाए ।

आजकल बड़ी बड़ी शिविरों में हम यही माहौल देखते हैं ।

इसलिए , कोई भी महाविद्या के प्रति आकर्षित होने से पहले अपने कुलदेवी को पुकारो ।

अगर आज नहीं तो कल की पीढ़ी के लिए बहुत दिक्कतें होगी ।

कईयों को लगेगा वो श्रीनाथ जी जाते हैं , तिरुपती जाते हैं , चारधाम जाते हैं , शिर्डी जाते हैं, या हर कहीं माथा रगड़ने जाते … साल में एक दो बार दर्शन के लिए । इससे कुलदेवी प्रसन्न नहीं होती ।
बल्कि वो शक्तियाँ भी आपको यही कहेंगी की पहले अपने माँ बाप को याद करो फिर मेरे पास आओ।

कुलदेवी के रोष में कई संस्थान , राजवाड़े , महाराजे खत्म हुए । कई परिवार के वंश नष्ट हुए ।

इसलिए कुलदेवी का पूजन पहले करों |
वैभव गुरू वालुरकर

Similar Posts

  • Kundali Matching Ka Keli Jate

    Kundali matching ka keli jate वर वधुच्या कुण्डली जुळविण्यासाठी दहा विधिंचा प्रयोग? Kundali matching वर वधुच्या कुण्डली जुळविण्यासाठी दहा विधिंचा प्रयोग केला जातो। त्या पैकी कमित कमी पाच फळ शुभ असल्याने कुण्डलींमध्ये परस्पर मेळ मानला जातो। 1. दिनम् (भाग्य)वर-वधु चा जन्म नक्षत्र एक सारखा आहे। 2. गणम् (सम्पत्ति)वर-वधु चे गणम् एक सारखे आहे। हे अनुरुपतेला…

  • Dhan Prapti Combo Gemstone Bracelet – Unlock Prosperity Instantly

    💰 Dhan Prapti Combo Gemstone Bracelet – Unlock Prosperity Instantly Everyone desires stability in life—but financial problems often stand in the way. Money issues are the root cause of nearly 50% of life’s stress and challenges. While many talk about financial growth, few offer real solutions. The Dhan Prapti Bracelet is designed to help you…

  • श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज श्री दत्त अवतार | Narsiha Saraswati Maharaj

    जन्म: लाडाचे कारंजा, पौष शुद्ध इ. स. १३७८आई/वडिल: आंबामाता / माधव वेष: संन्यासीमुंज: इ. स. १३८५ गुरु: कृष्णसरस्वती संन्यास: इ. स. १३८८ तिर्थाटन: इ. स. १३८८ ते  १४२१औदुंबर चातुर्मास: इ. स. १४२१नरसोबावाडी: इ. स. १४२२ ते  १४३४गाणगापुर: इ. स. १४३५ ते  १४५८   कार्यकाळ: इ.स. १३७८ ते १४५८निजानंदीगमन: इ. स. १४५८  विशेष: दत्तावतार, धर्मसंस्थापनेचे कार्य चरित्र ग्रंथ, श्री गुरुचरित्रशिष्यपरंपरा:१) माधव सरस्वती२) बाळसारस्वती३) कृष्णसरस्वती४) उपेंद्र माधव सरस्वती५) सदानंद सरस्वती६) ज्ञानज्योति सरस्वती७) सिद्ध सरस्वती श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज श्री दत्त अवतार |…

  • Mahashivratri 2023

    महाशिवरात्रि 18 फरवरी 2023 शनि प्रदोष के दिन है। इस साल की महाशिवरात्रि और भी खास है। इस शिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों के कारण महाशिवरात्रि पर मनोकामना पूर्ति जैसा योग (Manokamana−Purti−yog−on−Mahashivratri) बन रहा है। महाशिव रात्री

  • vivah muhurt

    Vivaah Muhurat 2022-23 : विवाह मुहूर्त कीस दिन विवाह का शुभ दिन होगा ! Vivaah Muhurat 2022-23 shaadi ka muhurt विवाह मुहूर्त देख रहे हैं तो आपको बता दें कि, हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले मुहूर्त देखा जाता है, जिससे कार्यों में किसी भी तरह का कोई विघ्न न आए।…

  • |

    Pradosh vrat upay |

    pradosh vrat | प्रदोष व्रत आपल्या सर्व कामना पूर्ति करणारे विशेष व्रत आहे ! 2024 का पहला प्रदोष व्रत कब? साल का पहला प्रदोष व्रत 9 जनवरी दिन मंगलवार को रखा जाएगा। जो प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन होता है, उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। भौम प्रदोष के दिन व्रत रखने से व्यक्ति…