Ruby | माणिक

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Ruby | माणिक रत्न ग्रहराज भगवान सूर्य यह रत्न धारण करनेसे क्या लाभ होगा?

Ruby | माणिक्य भगवान सूर्य(sun) को ग्रहराज कहा जाता है, इन्हीं के प्रताप से मानव जीवन जीवित है, कुण्डली में सूर्य की क्षीण स्थिति को शक्तिपूर्ण बनाने के लिए सूर्य रत्न माणिक्य (Ruby) धारण करने केलिए परामर्श दिया जाता है। माणिक्य एक अत्यधिक मूल्यवान तथा शोभायुक्त रत्न है |

माणिक्य को स्थान भेद के अनुसार अनेक नामों से पुकारा जाता है। संस्कृत में इसे

वसुरत्न, लोहित, माणिक्य, शोणरत्न, रविरत्न शोणोपल आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है |

हिंदी में :- इसे चुन्नी, माणिक, बंगला में माणिक्य. मराठी में :- माणिक तेलग :-में माणिक्य, फारसी मे :- याकुत अरबी :- लाल बदख्शाँ तथा अंग्रेजी में :- रुबी नाम से पुकारा जाता है।

बर्मा (Myanmar) का माणिक्य अपना विशिष्ट स्थान रखता है। विभिन्न स्थानों से प्राप्त माणिक्य के रंगों में भी अंतर होता है । बर्मा से प्राप्त माणिक्य का रंग श्याम के माणिक्य से कम गहरा होता है। श्री लंका से प्राप्त माणिक्य का रंगों में कुछ पिलापन होता है। सबसे उत्तम जाति के माणिक्य उत्तरी बर्मा के मोगोल नामक स्थान से प्राप्त होते है। स्याम माणिक्य बैंकॉक के निकट चांटबन नामक स्थान में पाये जाते हैं। यहां ये रेतीली मिट्टी में प्राप्त होते हैं। बर्मा के माणिक्य की खदानें सबसे पुरानी मानी जाती हैं। संसार के सबसे उत्तम और बड़े माणिक्य यहीं से प्राप्त होते हैं। बर्मा के माणिक्य की कीमत अधिक होती है। पाश्चात्य देशों में भी प्राचीन काल से माणिक्य बहुत उपयोगी रत्न माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि माणिक्य विष को दूर कर देता है, प्लेग से रक्षा करता है; दुख से मुक्ति प्रदान करता है, मन में बुरे विचारों को आने से रोकता है, तथा धारण करने वाले पर विपत्ति आने वाली हो, तो उसका निवारण हो जाता है। माणिक्य पहन कर सूर्य उपासना करने से सूर्य की पूजा का फल दुगना हो जाता है। सूर्य प्रभावित रोगों में सिर, पीडा ज्वर, नेत्र विकार, पित्त विकार, मूच्र्छा, चक्कर आना, दाह (जलन), हृदय रोग, अतिसार, अग्नि शस्त्र एवं विष जन्य विकार, पशु एवं शत्रुभय, दस्यु पीड़ा, राजा, धर्म, देवता, ब्राह्मण, सर्प, शिव आदि की अप्रतिष्ठा से चित्त विकार एवं इनसे भय आदि होते हैं, मानहानि, पिता और पुत्र में विचार नहीं मिलते।

हृदय और रत्न : माणिक रत्न का बल जानिए.

सूर्य व्यय का प्रतिनिधि है। रत्नों में वह माणिक्य का प्रतिनिधि है | इसलिए व्यक्ति को बल मिलने के लिए माणिक्य धारण करना बताते हैं। हृदय के सभी प्रकार के कष्टों में माणिक्य पहनना लाभदायक माना गया है। माणिक्य की पिष्टी और भर आते हैं। माणिक्य रक्तवर्धक, वायुनाशक और उदर रोगों में लाभकारी है। माणित वृद्धि होती है। इसमें वात, पित्त, कफ को शांत करने की शक्ति है। यह क्षय कोष्ठबद्धता आदि दूर करता है। इसका भस्म शरीर में उत्पन्न उष्णता और जलन को दूर करता है | भाव प्रकाश एवं रस रत्न समुच्चय के अनुसार माणिक्य कषाय और मधुर रस प्रधान द्रव्य है और नेत्र ज्योति को बढ़ाने वाला है तथा अग्नि, दीपक, कफ, वायु तथा पित्त शमन करता है |


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