Prime Minister Shri Narendra Modi Ji : जानिए क्या कहती है माननीय प्रधानमंत्री श्री. नरेन्द्र मोदीजी की कुंडली |

Prime Minister Shri Narendra Modi Ji : जानिए क्या कहती है माननीय प्रधानमंत्री श्री. नरेन्द्र मोदीजी की कुंडली |

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क्या दिखाती है माननिय प्रधानमंत्री श्री. नरेन्द्र मोदीजी की कुंडली जानिए |

स्वयंसेवक से प्रधान सेवक , इसके बाद सीएम ( CM ) फिर पीएम ( PM ) का सफ़र प्रधानमंत्री मोदी जी की जन्म की सबसे बड़ी खासियत है, केंद्र स्थानों में पाच ग्रहों का उपस्थित होना , इससे भी बड़ा एक राजयोग है स्वयंसेवक , जिसमे चन्द्रमा से केंद्र में स्थित बृहस्पति से गजकेसरी योग | इसके अलावा केंद्र में बैठे शनि और शुक्र का सहयोग , चतुर्थ भाव में बैठे बृहस्पति को दशम भाव में बैठे वर्गोत्तम शुक्र | गुरु का इंटर एक्सचेंज दशम शनि , मोदी जी को लोकप्रियता प्रदान कर रहे है | जो आमचुनाव के समय में अपने ही घर में स्थित रहेंगे | जिसमे लग्नेश मंगल की दशा चल रही है , जो 2021 से 2028 तक रहेगी | जिसके कारण इस चुनाव में भी भारी बहुमत से जित हासिल करेंगे | जो इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जिसे हमेशा याद किया जाएगा |

7 सितंबर 1950 , समय दिन के 11 बजे मेहसाना , गुजरात में जन्मे मोदी जी आज विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक सत्ता भारत देश के प्रधानमंत्री है | माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सफ़र राष्ट्र स्वयंसेवक से प्रधान सेवक से शुरू हुआ था | फिर गुजरात के सीएम ( CM ) और फिर पीएम ( PM ) बने | इनकी कुंडली वृश्चिक लग्न व वृश्चिक राशी की है | लग्न व राशी के स्वामी मंगल , रुचक महायोग , चंद्र – मंगल योग के साथ शत्रुहंता योग है , जिसके चलते ये यह अपने विरोधियों को पछाड़ दिए | इनमे सही निर्णय लेने की प्रबल क्षमता है जिसका असर प्रधामंत्री के कार्य काल में देखा जा रहा है |

लग्न में मंगल की स्थिति एक सफल प्रशासक बनाते है , यही कारण है की विरोधियों को कभी माफ़ नहीं कर पाते | इनकी कुंडली की सबसे खास बात यह है की एकादश भाव में कर्मेश सूर्य , आयेश बुध स्वयं है, केतु स्थित होकर आय भाव के बल को बढ़ा रहा है |

इनकी कुंडली में एक और बात है , केंद्र में पांच ग्रह चंद्र , मंगल, गुरु, शुक्र और शनि उपस्थित है , इससे एक राजयोग की स्थिति बना रहे है | और भी कई शुभ योगों का निर्माण कर रहे है |

जिसमे गजकेसरी योग , मुसल योग , केदार योग , रुचक योग , वोशी योग , भेरी योग , चन्द्र मंगल योग , नीच भंग योग तथा वरिष्ठ योग शामिल है | आज इन शुभ योगों के प्रभाव के चलते ही मोदी जी देश के सबसे वरिष्ठ पद पर विराजमान है |

जनवरी, 2023 से मार्च, 2025 तक शनिदेव कुम्भ राशि में हैं। जो मोदी के चतुर्थ भाव में भ्रमण करते हुए उनके लग्न पर दृष्टि दे रहे है |

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार कुंडली का चतुर्थ समाज सेवा का होता है, जिसमे स्वयं गुरु चतुर्थ में, जिस पर शनि की दृष्टि, समाज सेवा कार्यों में और अधिक रुचि दिलाती है । दशम शनि सत्ता भाव में स्थित होकर समाज सेवा के चतुर्थ भाव को दृष्टि देकर और अधिक सक्रिय कर, इन्हें लोकप्रियता प्रदान कर रहा हैं।

इनकी कुंडली में कुछ तो ऐसी बात है, जो मोदी जी को सफलता की ओर क्रमश: आगे बढ़ा रही है। आईए जानते हैं। एकादश भाव का विचार सत्ता पक्ष के स्वामी और कारक ग्रह सूर्य कर्म भाव के स्वामी हैं । जिन्होंने इन्हें राजनीति के क्षेत्र में सफलता और कार्य करने के अवसर दिए। आयेश स्वयं जब आय भाव में हों, बुध अपने ही भाव में स्थित हों, तो इन्हे बौद्धिक योग्यता के फलस्वरुप उन्नति, मान सम्मान के शीर्ष तक पहुंचाते हैं।

इस समय मंगल की महादशा, शनि की अन्तर्दशा चल रही हैं, जो सितंबर 2023 से सितंबर 2024 तक रहेगी । इसी अन्तर्दशा में आम चुनाव होने वाले है । जो इनके पक्ष में है।

मंगल की महादशा 2028 तक रहने वाली है जो इनको विश्व विख्यात कराएंगी । भारतवर्ष में मोदी जी का स्थिर कार्य काल 2029 तक जारी रहेगा।

जनवरी, 2023 से मार्च, 2025 तक शनिदेव कुम्भ राशि में रहेंगे, जो माननीय प्रधानमंत्री के चतुर्थ भाव में भ्रमण करते हुए उनके लग्न पर दृष्टि करेंगे। शनि की लग्न पर दृष्टि के साथ शनि की ढैया भी प्रारंभ है, जो हेल्थ के लिए ठीक नहीं है । फिर भी लग्नेश मंगल, मंगल की दशा, मंगल के नक्षत्र गुरु, इनके उत्साह एवम पराक्रम में कमी नहीं आने देंगे। हम सब की मंगल कामना उनके साथ है।


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