Budh Grah : बुध ग्रह

Budh Grah : बुध ग्रह

astrologer

जानिए आपकी कुंडली में बुध ( ग्रह ) भगवान 12 भाव में क्या फल देते है ?

बुध

बुध ग्रह बुद्धी,एकाग्रता , सतर्कता , शिक्षा-दीक्षा अच्छी मानिसक क्षमत, स्मरण शक्ति इत्यादि गुणों का प्रतिनिधित्व करता है | बुध वाणी , छोटी-छोटी यात्राओ,बचपन,तर्क शक्ति , बुद्धिमता , निर्णय क्षमता , गणित आदि का भी ध्यौतक करता है | यह ग्रह उदासीन और नपुसक माना जाता है | प्राय: जन्म पत्रिका में अपनी स्थिति के अनुसार फल देता है |

1 . प्रथम भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

प्रथम भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक आस्तिक, गणित में रूचि रखने वाला उदार, विद्वान्, खर्चीला , साहसी और सत्कार्य करने वाला होता है | जताक वैभव प्रिय होता है | वह दूरस्थ स्थानों की यात्रा करता है |

स्वरुप

लग्न में बुध के प्रभाव से जातक सुंदर एव क्रान्तिवान होता है |

स्वास्थ्य

जताक की पत्रिका में बुध लग्न के लग्न में स्थित होने से जातक दीर्घायु एव स्वास्थ्य होता है |

व्यवसाय

लग्नस्थ बुध के कारन जातक की गणित व लेखन संबंधित कार्य एव जातक प्राय: व्यपार में संलग्न रहता है |

पूर्ण दृष्टी

लग्नस्थ बुध की पूर्ण दृष्टी सप्तम स्थान पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक की पत्नी सुंदर और सुशिल होती है | स्त्री से अत्यंत प्रेम होता है |

मित्र/ शत्रु राशी

मित्र , स्व व उच्च राशी के बुध के प्रभाव से जातक की वाणी तेजस्वी और ओज भरी होती है | वह अपनी वाणी का लोहा मनवाता है | जातक विनोदी एव उदार स्वभाव का होता है | शत्रु एव नीच राशी में बुध को कृपण तथा मिथ्यावादी बनाता है | ऐसा जातक विश्वास योग्य नहीं रहता है | प्राय: जातक का वैवाहिक जीवन भी दुखी होता है |

भाव विशेष

लग्न में स्थित बुध यदि किसी ग्रह से युति न रखता हो तो जातक उन्नति करता है और भाग्यवान होता है | लग्न में स्थित बुध के प्रभाव से जातक प्राय: अपने परिवार या शहर से अन्यत्र रहकर शिक्षा प्राप्त करता है तथा विद्वान् होता है | बुराई से कोसो दूर होता है हाजिर जवाब और विनोद प्रिय होता है | अत: बातचीत से सभी को प्रभावित करता है | जातक को साहित्य में रूचि होती है | विचारो और कार्यो में तेज होता है | जातक में विशेष सजगता पाई जाती है |

2 . द्वितीय भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

द्वितीय भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक स्वभाव से गुणी, सुखी, कुशल वक्ता, साहसी और सत्कर्म करने वाला होता है। जातक मिष्ठान्न पसन्द करता है तथा वाणी निर्मल होती है।

पूर्ण दृष्टि

दूसरे स्थान में स्थित बुध की पूर्ण दृष्टि आठवें भाव पर होती है जिसके प्रभाव से जातक दुखी और प्रवासी होता हैं।

मित्र / शत्रु राशि

मित्र, उच्च राशि में स्थित बुध के प्रभाव से जातक धन संग्रह करता है। उसे परिवार का सुख प्राप्त होता है। ऐसा जातक लंबी यात्राओं पर जाता है एवं सुखी होता है। शत्रु व नीच राशि में स्थित होने पर धन संग्रह में परेशानी होती है। परिवारजनों से जातक के संबंध अच्छे नहीं होते है। ऐसे जातक को नैत्र और मुख से संबंधित रोग भी हो सकते है।

भाव विशेष

द्वितीय स्थान में स्थित बुध के प्रभाव से जातक गणित व लेखा संबंधित व्यवसाय करता है। दलाली के कार्य में भी सफलता प्राप्त करता है। दूसरे स्थान में बुध के कमजोर होने पर जातक हकलाता है। तथा उच्च शिक्षा प्राप्त होती है। जातक को अन्य किसी जगह से धन व जातक नित-नई संपत्ति प्राप्त होने के योग बनते है । योजनाएँ बनाता रहता है ।

3. तृतीय भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

तृतीय स्थान में बुध के प्रभाव से जातक स्वभाव से चंचल, धार्मिक, सद्गुणी, विलासी, परिश्रमी, भीरू और अपने कार्य में दक्ष होता है। ऐसे जातक को साहित्य और गणित में विशेष रूचि होती है। वह सजग, सतर्क और सदैव जिज्ञासु होता है। जातक में किशोर भाव अधिक होता है। वह छोटे बच्चों से स्नेह रखता हैं।

पूर्ण दृष्टि

तीसरे स्थान में स्थित बुध नवें स्थान भाग्य स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखता है जिसके प्रभाव से धार्मिक और भाग्यशाली होता है। वह प्रायः भाई-बहनों में सबसे छोटा होता है। ऐसा जातक धर्म कर्म में आस्था रखता है ।

मित्र / शत्रु राशि

मित्र, उच्च व स्व राशि में स्थित बुध केप्रभाव से जातक व्यवहार कुशल एवं सफल होता है। जातक ओजस्वी वक्ता, कवि और लेखक होता है। शत्रु व नीच राशि में बुध होने पर जातक की शिक्षा अधुरी रह जाती है। भाई-बहनों से संबंध अच्छे नहीं होते है | प्रायः ऐसा जातक डरपोक होता है एवं उसके भाग्य में रूकावटें आती रहती है।

भाव विशेष

बुध के शुभकारी प्रभाव से जातक सफल व्यापारी होता है। लेखन, मुद्रण वितरण एवं उपव्यवसाय (दलाली) या उपधातु के व्यवसाय से जातक को लाभ होता है । सम्पादन और विक्रय कार्य भी जातक के लिए लाभप्रद होते है। जातक के भाई-बहनों से सामान्य संबंध होते है।

4. चतुर्थ भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

चतुर्थ स्थान में बुध के प्रभाव से जातक स्वभाव से आलसी, संगीत प्रेमी माता के प्रति स्नेह रखने वाला, बुद्धिमान, विद्वान और दानी होता है। जातक की ज्योतिष में रूचि होती है तथा एकान्त प्रिय होता है । शिक्षा सामान्य रहती है।

पूर्ण दृष्टि

चतुर्थ स्थान पर स्थित बुध की दशम स्थान पर पुर्ण दृष्टि के प्रभाव से जातक राजमान्य, सुखी, विद्वान और कुलदीपक होता है। पिता के व्यवसाय से लाभ प्राप्त होता है। जातक के कार्य क्षेत्र एक से अधिक होते है।

मित्र / शत्रु राशि

मित्र, उच्च राशि में स्थित बुध के प्रभाव से जातक को शिक्षा एवं धन संपत्ति, वाहन एवं भूमि की प्राप्ति होती है। जातक जीवन में सारे आनंद उठाता है। किन्तु निवास स्थान में बार-बार परिवर्तन होते है। शत्रु व नीच राशि का होने पर शिक्षा में बाधा होती है और जीवन में संघर्ष करना पड़ता है। जातक को प्रायः किरायें के मकान में रहना पड़ता है ।

भाव विशेष

जातक की भाषा में मधुरता होती है। वह दूसरों को प्रसन्न करने वाले वचन बोलता है। चतुर्थ स्थान में बुध कारक ग्रह है जिसके प्रभाव से जातक को श्रेष्ठ वाहन सुख व प्राप्त होता है। जातक नियम व नीति अनुसार रहता है।

5 . पंचम भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

पंचम स्थान में बुध के प्रभाव से जातक निर्मल वाणी, संगीत प्रेमी और अस्थिर विचारों वाला होता है। और साथ में एक स्पष्ट वक्ता होता है।

पूर्ण दृष्टि

पांचवे स्थान में स्थित बुध की पूर्ण दृष्टि ग्यारहवें स्थान पर पड़ती है। जिसके प्रभाव से जातक अधिक धन कमाने वाला एव कला प्रेमी होता है । जातक के पास एक अधिक धन प्राप्ति के साधन होते है।

मित्र और शत्रु राशि

स्व, उच्च और मित्र राशि में बुध शुभ कारक होता है। जातक विद्वान होता है व उसके बच्चे भी विद्वान होते है। शत्रु व नीच राशि के प्रभाव से जातक विद्याहीन, कठोर भाषी और दुःखी होता है। उसे अपने व्यवसाय मे हानि होती है।

भाव विशेष

पंचम स्थान मे बुध के प्रभाव से जातक अच्छा व्यवसायी व समाजसेवी होता है। वह अपने परिवार के साथ समय बिताता है और कड़ी मेहनत करके अपने बलबूते पर आगे बढ़ने वाला होता है।

6 . छठे भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

छठे भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक स्पष्ट वक्ता, अभिमानी, परिश्रमी, वाद विवाद करने वाला और मानसिक रूप से अत्यंत परेशान होता हैं । जातक को सफलता नहीं मिलती है। कार्य अधिक होने से चिंता बनी रहती है। जातक चंचल और स्त्रीप्रिय होता हैं ।

पूर्ण दृष्टि

छठे स्थान में स्थित बुध की पूर्ण दृष्टि द्वादश स्थान पर पड़ती है जिसके प्रभाव से धन निरर्थक कार्यो में व्यय होता हैं। जातक को प्रायः तनाव और चिन्ता बनी रहती हैं। बुध के द्वादश भाव में दृष्टि होने से जातक अंतिम समय में सुखी होता हैं।

मित्र और शत्रु राशि

स्व, मित्र और उच्च राशि का होने पर जातक शत्रुओं पर विजय पाने वाला, स्वस्थ और निरोगी होता है । उसे पुरस्कार प्राप्त होता है। वह उच्चकोटि का लेखक अथवा अधिकारी होता हैं । शत्रु व नीच राशि में जातक आलसी, धनहीन, धैर्यहीन, रोगी और शत्रुओं द्वारा पीड़ित होता है। एवं ऋण युक्त भी होता है।

भाव विशेष

षष्ठ भाव मे बुध के प्रभाव से जातक को अधीनस्थ एवं नौकरों पर अति विश्वास करने के कारण हानि होती है। जातक को भागीदारी में साझेदार से नुकसान होता है। दूषित बुध के प्रभाव से जातक को वायु संबंधी विकार होते हैं। जैसे गैस, कब्ज, संग्रहणी आदि । प्रायः मानसिक तनाव के कारण होने वाले अन्य रोग भी जातक को प्रभावित करते हैं

7 . सातवें भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

सातवें स्थान में स्थित बुध के प्रभाव से जातक वाचाल, स्पष्टवक्ता, स्त्रियों से शीघ्र प्रभावित होने वाला, बुद्धिमान, विद्वान कुलीन, उदार और धार्मिक होता है। जातक भोग विलास का जीवन व्यतीत करना चाहता है।

पूर्ण दृष्टि

सातवें स्थान में स्थित बुध की पूर्ण दृष्टि लग्न पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक, गणितज्ञ, व्यवहार कुशल, व्यवसायी, सबसे मिल-जुलकर रहने वाला, सामाजिक, विनम्र और प्रतिष्ठित होता है। जातक एक से ज्यादा कार्य करने की सोचता है किन्तु निर्णय लेने में देर लगाता है।

मित्र/शत्रु राशि

मित्र, उच्च और स्व राशि में बुध शुभ कारक होता है। जातक का वैवाहिक जीवन सुखी होता है हस्तकला में प्रवीण होता है। जातक को भागीदारी के व्यवसायों में सफलता प्राप्त होती है। जातक का प्रभावशाली व्यक्तित्व होता है। शत्रु व नीच राशि के प्रभाव में जातक का वैवाहिक जीवन कष्टप्रद होता है । उसे भागीदारी से हानि उठानी पड़ती है ।

भाव विशेष

सप्तम बुध के प्रभाव से जातक आधुनिक विचारों वाला होता है। वह परंपरावादी नहीं रहता है। जातक विलासी और दीर्घायु होता है। उसे सुख-सुविधा के समस्त साधन एकत्र कर उसका उपयोग करना पसंद होता है। सप्तम बुध स्त्री जातक को सुन्दर और बुद्धिमान बनाता है । जातक स्त्रियोचित गुणों की वृद्धि होती है।

8 . अष्टम भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

अष्टम भाव में बुध के प्रभाव से जातक स्वभाव से अभिमानी, मानसिक संताप रखने वाला और मनस्वी होता है। धार्मिक कार्यो में रूचि रखने वाला होता है तथा स्मरण शक्ति तीव्र होती है। जातक बलवान, गंभीर और परिवार के साथ रहने वाला होता है।

पूर्ण दृष्टि

अष्टम भाव में स्थित बुध की पूर्ण दृष्टि दुसरे भाव पर होती है, जो कि शुभ होकर पैतृक एवं अन्य स्थान से धन प्राप्ति के योग बनाती है।

मित्र और शत्रु राशि

मित्र, स्व एवं उच्च राशियों में स्थित बुध से जातक को लाभ होता है। उसकी ईश्वर के प्रति श्रद्धा होती है। परिवारजनों से अच्छे संबंध होते हैं। शत्रु व नीच राशि का बुध होने पर जातक को मानसिक चिंताएं, शारीरिक कष्ट तथा झगड़ालू स्वभाव होता है। शत्रु राशि के प्रभाव से जातक अनेक मानसिक रोगो से ग्रसित होता है।

भाव विशेष

अष्टम भाव में बुध की स्थिती से जातक को विपरीत लिंग वाले लोगों का विश्वास और सुख प्राप्त होता है । जातक कुशल वक्ता, न्यायाधीश व राजमान्य होता है। जातक की आयु दीर्घ होती है । अष्टम बुध से जातक मानसिक तौर पर दुखी रहता है। बुध के प्रभाव से जातक के पेट और जांघों मे कष्ट होता है। मस्तिष्क ज्वर और अन्य मानसिक रोगों से कष्ट होता हैं ।

9 . नवम भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

नवम भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक विद्वान, धार्मिक, भाग्यवान, पढ़ने-लिखने में रूचि रखने वाला और काव्य प्रेमी होता है। जातक सदाचारी, धनी और संतान से सुख प्राप्त करता है। जातक अपनी वाक पटुता के लिए प्रसिद्ध होता है । जातक लेखन, पठन और पाठन में रूचि के कारण अच्छा लेखक बनता है अथवा गणितज्ञ अथवा ज्योतिष में रूचि रखता है। तथा उच्चकोटि का व्यवसायी होता है।

पूर्ण दृष्टि

नवमस्थ बुध की पूर्ण दृष्टि तीसरे भावपर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक को भाई बहनों का सुख प्राप्त होता है । जातक की दूरस्थ देशों की यात्रा होती है और वह प्रवासी होता है।

मित्र / शत्रु राशि

स्व, मित्र और उच्च राशि में जातक भाग्यशाली होता है तथा धन धान्य से परिपूर्ण होता है। शत्रु व नीच राशि में बुध के प्रभाव से जातक की प्राय: धर्म के प्रति आस्था कम होती है। अधिक चिंता और घबराहट से स्थितियाँ जातक के नियंत्रण के बाहर हो जाती है जिससे अनेक कष्ट उठाने पड़ते है ।

भाव विशेष

नवमस्थ बुध के प्रभाव से जातक भाग्यशाली होता है। वेद, पुराण अथवा तंत्र-मंत्र में जातक की विशेष रूचि होती है तथा अनेक लंबी यात्राएं करता है। नवम भाव में स्थिति से कवि, गायन, संपादन, लेखन, ज्योतिष व व्यवसाय में सफल होता है। जातक जिसके लिए कार्य या नौकरी करता है उसे विशेष लाभ होता है । अतः अधिकारी मालिक का विशेष प्रेम जातक प्राप्त करता है तथा जातक यात्रा प्रेमी होता है । दूर-दूर के क्षेत्रों में व्यवसाय और आनंद के लिये यात्रा करता है ।

10 . दशम भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

दशम भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक विनम्र, तीव्र बुद्धि से अलंकृत, सत्यवादी, विद्वान, व्यवहार कुशल, न्याय-प्रिय, भाग्यशाली, राजमान्य ओर साहसी होता है। जातक माता-पिता के प्रति विशेष आदर रखता है। वह अपने पुरुषार्थ से उच्च स्थिति प्राप्त करता है। जातक की तीव्र स्मरण शक्ति होती है। जातक अच्छे विचारों वाला, चिंतक और यशस्वी होता है।

पूर्ण दृष्टि

दशम भाव की पूर्ण दृष्टि चतुर्थ भाव में होने से जातक को माता, भूमि, भवन और वाहन से सुख प्राप्त होता है। जातक अपने बनाये मकान में रहता है।

मित्र / शत्रु राशि

स्व, मित्र और उच्च राशि में बुध के प्रभाव से जातक को अनेक शुभ फल प्राप्त होते है। उसे भाषा और गणित में अद्भूत सफलता प्राप्त होती है। जातक धीर गंभीर, प्रसिद्ध और धार्मिक कार्य करता है। शत्रु व नीच राशि में बुध के होने पर जातक को अशुभ फल प्राप्त होते है। जातक मूर्खता पूर्ण कार्य करता है। कृपण होता है और व्यर्थ समय बर्बाद करता है।

भाव विशेष

दशम भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक को उसके द्वारा किये गये कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। जातक को पिता से धन, भूमि और भवन की प्राप्ती होती है। जातक को अपने कुशल व्यवहार और अच्छे आचरण से नाम, यश, धन और वैभव प्राप्त होता है अच्छा वक्ता होता है। दलाली. संपादन, लेखा, गणित और लेखन कार्य में जातक को सफलता प्राप्त होती है। जातक के कार्य क्षेत्र एक से अधिक रहते है। बुध के प्रभाव से जातक व्यवसायी हो सकता है।

11 . एकादश भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

एकादश भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक धनी, वैभव से परिपूर्ण, स्वाभिमानी, उदार हृदयवाला, दीर्घायु, योगी, सदाचारी, प्रसिद्ध, ईमानदार और विचारवान होता है। जातक गायन-वादन काव्य प्रिय होता है।

पूर्ण दृष्टि

बुध की एकादश स्थान से पांचवें स्थान पर पूर्ण दृष्टी के प्रभाव से जातक की पहली संतान पुत्र के रूप में प्राप्त सकती है। जातक धनवान, गुणवान, और विद्वान होता है | जातक कुशल शिल्पकार होता है।

मित्र / शत्रु राशि

मित्र, स्व व उच्च राशि में स्थित बुध के प्रभाव से जातक भाग्यशाली, उच्च आय वाला एवं सुखी होता है। शुभ प्रभाव में जातक को विज्ञान अथवा साहित्य में रूचि रखने वाले मित्रों से सहायता प्राप्त होती है। शुभ कार्यों से धन प्राप्ति होती है। शत्रु व नीच राशि में होने पर जातक की आय में बाधाएं आती है। गलत उपयोग से धन नाश होता है। उसके मित्र ही झगड़ो का कारण होते है।

एकादश भाव विशेष

एकादश भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक को धन ईमानदारी से प्राप्त होता है । जातक की ईमानदारी के कारण उसे प्रसिद्धि मिलती है । प्रायः आय के स्त्रोत एक से अधिक होते है ।

12 . द्वादश भाव में बुध का प्रभाव

स्वभाव

द्वादश भाव में स्थित बुध के प्रभाव से जातक स्वभाव से आलसी, क्रूर, विद्या-हीन, कठोर भाषी और दुःखी होता है । चित्त चंचल होता है। तथा उसे राजदंड का भय होता है।

सप्तम दृष्टि

द्वादश भाव में स्थित बुध की सप्तम दृष्टि छटवें स्थान पर होने से जातक को कर्ज के कारण हानि उठानी पड़ती है।

मित्र / शत्रु राशि

स्व, मित्र या उच्च राशि में बुध होने पर धनी अपव्ययी होता है। वह लोगों का नेता बनता है। जातक में प्रतिनिधित्व के गुण पाए जाते है। जातक ज्ञानी और पढ़ा लिखा होता है। धन को धार्मिक कार्यों में खर्च करता है। शत्रु व नीच राशि में जातक को अशुभ फल प्राप्त होते क है। जातक दुखी और अपव्ययी होता है। प्रायः बीमारियों में जातक का धन व्यय होता है। परिवारजनों से कलह होती है |

भाव विशेष

बुध के द्वादश भाव से जातक के आत्म विवेचन, आध्यात्मिक प्रभाव, एकाग्रता, समझ और आत्म परिक्षण की विवेचना होती है। जातक की अतः प्रेरणा ही उसे सफलता की ओर अग्रसर करती है। वह आरोपों से घिरा रहता है। प्रायः अपने शत्रु स्वयं बनाता है। जातक कई चिंताओं, समस्याओं और अपव्यय से परेशान होता है। उसकी रूचि रसायन, तिलिस्म और गुप्त विद्याओं में भी होती है।

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