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  • कन्या राशी

    कन्या राशी, राशी चक्र की छाटी रास है| कन्या राशी में उत्तरा नक्षत्रके 3 चरण, हस्त,चित्रा नक्षत्रके 2 चरण मीला कर कन्या रास बनती है। कन्या राशी पृथ्वी तत्व की है, कन्या राशी का चिन्ह कन्या कि प्रतिकृति है| कन्या राशी का स्वामी बुध देव है, बुध देव ग्रह होने के कारण व्यक्ति का स्वभाव…

  • श्री हनुमान चालीसा

    श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
    बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
    बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
    बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस

  • सिंह राशी-leo

    सिंह राशी, राशी चक्र की पाचवी रास है| सिंह राशी में मघा, पूर्वा,उत्तरा नक्षत्र का 1 चरण मीला कर सिंह रास बनती है। सिंह राशी अग्नि तत्व की है, सिंह राशी का चिन्ह सिंह कि

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    दशहरा–विजयादशमी–dussehra

    दशहरा (विजयादशमी) श्रीराम भगवान् जब 14 वर्ष वनवास भुगत रहे थे तब श्रीराम भगवान् ने सभी राक्षसोका वध किया आखिर में अति शक्ति शाली रावण राक्षसोके राजा बचे थे इस लिए श्रीराम रावण के भूमि सीमा पर रहने लगे तब शुर्पनका रावण की बहन श्रीराम का भव्यतेज देखकर प्रभावित हुई और श्रीराम के साथ विवाह…

  • कर्क राशी

    [wpdts-date] कर्क राशी, राशी चक्र की चौथी रास है| कर्क राशी में पुनर्वसू नक्षत्रका 1 चरण, पुष्य, आश्लेषा नक्षत्र मीला कर कर्क रास बनती है। कर्क राशी जल तत्व की है, कर्क राशी का चिन्ह केकड़ा कि प्रतिकृति है| कर्क राशी का स्वामी चंद्र देव है, चंद्र देव गतिशील ग्रह होने के कारण व्यक्ति का…

  • मिथुन राशी–gemini

    मिथुन राशी-gemini, राशी चक्र की तीसरी रास है| मिथुन राशी में मृग नक्षत्रके 2 चरण, आर्दा, पुनर्वसू के 3 चरण मीला कर मिथुन रास बनती है। मिथुन राशी वायु तत्व की है, मिथुन राशी का चिन्ह जुडवा व्यक्ति यो कि प्रतिकृति है|

  • वृषभ राशि (Vrishabh Rashi)

    वृषभ राशि (Vrishabh Rashi) की सम्पूर्ण जानकारियाँ लक्षण : मध्यम कद, प्रायः मोटा शरीर, चैउ़ा मस्तक, मोटी गर्दन, सुन्दर आकर्षक चेहरा, बड़े कान और आंखें चैड़ कंधे, गठीला शरीर, गेहंआ रंग, सफेद दांत, भारी जांघे, घुंघराले बाल, कमर या बगल में मस्सा। अन्य गुण: प्रेमपूर्ण व्यवहार, सौंदर्य, संगीत और कला में रूचि होती है। loading……

  • नवरात्री — Navaratri

    या वर्षी नवरात्र दिनांक 17- ओक्टोम्बर- 2020 रोजी वार:- शनिवार पक्ष:- आश्विन शुल्क पक्ष तिथि :- प्रतिपदा पासुन नवरात्रीची श्रीघट स्थापना होत आहे. दरवर्षी प्रमाने याही वर्षी नवरात्री,अश्विन शुद्ध प्रतिपदा ते अश्विन शुद्ध नवमी हा देवी उपासनेचा काळ, म्हणजेच नवरात्र उत्सव काळ होय. नवरात्रित घरोघरी घट स्थापना केली जाते. नवरात्रीत देवीपुढे अखंड दिप लावला जातो….