काय करावे, काय करू नये!

अध्याय २७ – काय करावे, काय करू नये!

भगवान वैकुंठविहारी लक्ष्मीला म्हणाले, “रमा, प्रिये, अधिकमासातील व्रते, नियम, साधना, उपासना, दानादि पुण्यकर्मे केल्यामुळे मनुष्याला सुख, समाधान, शांती आणि प्रगती लाभते. मोक्षप्राप्ती होऊन जीवनाचे सार्थक होते.

ज्या घरी हे अधिकमास व्रत निष्ठापूर्वक विधीयुक्त होते त्या घरी उत्साहाचे पवित्र वातावरण राहाते. त्या घरी देवतांचा निवास होतो. त्यामुळे त्या घरातील दुःख व संकटे दूर पळतात. सर्व बाधा नाहीशा होतात. ते घर संतती व संपत्तीने भरून जाते.

loading…

अधिकमासात सांगितलेली अनेक व्रते, दाने, पुण्यकर्मे ज्या

कोणाला करणे शक्य नसेल त्याने आपली प्रकृती आणि परिस्थिती पाहून यथाशक्ती एखादा तरी नियम पाळावा. नित्यनेमाने स्नान, देवदर्शन, एकमुक्त भोजन, भूमिशयन, पोथीवाचन, श्रवण, शक्य ते दान, उपोषण, तुलसीपूजा याप्रमाणे नियम पाळावे.”

या नियमातील कोणतेही एक व्रत पाळल्यावर त्याचे उद्यापन शेवटी करावे. नक्तभोजन, मौनभोजन अशा व्रताचे उद्यापन म्हणजे शेवटी ब्राह्मणाला भोजन किंवा शिधा देऊन करावे. देवळात एखादी घंटा बांधूनही मौनभोजनाचे उद्यापन होते. दीपदान आणि तेहतीस अनारसे, बत्तासे, खारका, सुपाऱ्या, फळे वगैरे वस्तू यथाशक्ती दान दिल्यानेही उद्यापन साधते. याप्रमाणे शक्य ते एखादे तरी पुण्यकर्म करावे.

या महिन्यात कांदा, लसूण, मसूर डाळ, शिळे अन्न वगैरे उत्तेजक, मांसल, मादक वस्तू खाऊ नयेत. अपेय पिऊ नये. परद्रोह, परनिंदा करु नये. रागाने बोलू नये. नको तेथे बसू नये. अशा प्रकारे आपले आरोग्य बिघडेल. मन अस्वस्थ होईल-अशा गोष्टी करू नयेत. कारण या तेराव्या महिन्यात एकही सूर्यसंक्रात नसल्याने वातावरण मलीन बनलेले असते. अशावेळी निर्मळ राहून आपले आपण पवित्र बनले पाहिजे!

याप्रमाणे या महिन्यात काय करावे आणि काय करू नये ते सांगितल्यावर पुढे अठ्ठाविसाव्या अध्यायात आणखी एक कथा भगवान विष्णूंनी लक्ष्मीला सांगितली ती ऐकावी.

Similar Posts

  • |

    Married Life

    अब समझते है कब जीवनसाथी स्वास्थ्य कब जल्दी ठीक हो जाता है। Married Life Married Life | Life partner | जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रहता है तो क्यों और कब ठीक होगा आज इसी विषय पर बात करते है। वैवाहिक जीवन सुख और विवाह सुख यह पति पत्नी के आपसी सहयोग से ही एक दूसरे को मिलता है। कभी कभी ऐसी स्थिति जीवन मे बन जाती है कि जीवनसाथी (पति या पत्नी) का स्वास्थ्य खराब रहने के कारण विवाह सुख और वैवाहिक जीवन के सुख में कमी रहती है जिससे वैवाहिक जीवन भी थोड़ा नीरस का ही रहता है।

  • Madhurastakam | मधुराष्टकं

    श्री कृष्ण भगवान अति प्रिय स्तोत्र | अष्टक मधुराष्टक | मधुराष्टकम Madhurastakam अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं, गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखiलं मधुरम् ।।१।। वसनं मधुरं, चरितं मधुरं, वचनं मधुरं वलितं मधुरम्,चलितं मधुरं, भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्।।२।। वेणर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ,नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।३।। गीतं मधुरं पीतं मधुरं,…

  • Pitta dosh upay | पित्त दोष: लक्षण, रोग और इसे संतुलित रखने के आसान उपाय

    पित्त दोष: Pitta dosh लक्षण, रोग और इसे संतुलित रखने के आसान उपाय पित्त दोष क्या है? Pitta dosh पित्त दोष ‘अग्नि’ और ‘जल’ इन दो तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है। शरीर की गर्मी जैसे कि शरीर का तापमान, पाचक अग्नि जैसी…

  • दक्षिणावर्ती शंख

    दक्षिणवर्ती शंख भारतीय संस्कृति में शंख की अपार महिमा एवं उपयोगिता बताई गई है। समृद्धि और आयु के वर्धन और दरिद्रता के शमन के साथ-साथ देवी-देवताओं के पूजन, ज्योतिष और तांत्रिक साधनाओं एवं शुभ कार्य के प्रारंभ में इसकी विशेष उपयोगिता बताई गई है। शंख भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में उनके एक हाथ का आभूषण है।

  • jivan ka sar | srushti ka vidhan https://vedashreejyotish.com/

    shree mat bhavat gita saar in hindi jivan ka sar | srushti ka vidhan https://vedashreejyotish.com/ श्रीमत् भगवद् गीता सार हिंदी में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह महाभारत के महायुद्ध के बाद भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है। इस ग्रंथ में जीवन के असली अर्थ और मार्ग बताए गए हैं, जो मनुष्य को…

  • श्री रुद्राष्टकम् | Rudrashtakam महादेव जिकी स्तुती

    श्री रुद्राष्टकम् | Rudrashtakam महादेव जिकी स्तुती ॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥निराकारमोंकारमूलं तुरीयंगिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालंगुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरंमनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शंकरं…

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.