घोडे की नाल

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Ghode ki nal | चमत्कारी से कम नहीं है-काले घोडे की नाल

घोडेकी नाल का वैज्ञानिक रहस्य और शक्ती

Ghode ki naal | घोडे की नाल पहले समझें घोडे का वैज्ञानिक रहस्य और शक्ती….आधुनिक विज्ञान ने शक्ती को मापने के लिऐ… HP (हौर्स-पावर) को ही इकाई माना… हाथी, चीते, शेर, डाइनासोर तथा कंगारू जैसे ताकतवर अन्य किसी जीव को क्यों नहीं…..*

कारण ये है कि जो अदभुत शक्ती घोडे में होती है … वो किसी भी स्तनधारी जीव में नहीं पायी जाती।।..

1… घोडा आजीवन खडा रह सकता है… बैठकर या लेटकर आराम की आवस्यकता उसको नहीं होती।

2… घोडे की सैक्स-पावर आजीवन कभी खत्म नही होती…. समस्त प्राणियों से अदभुत सम्भोग- शक्ती का धनी होता है।।

3 … घोडे जैसी अदृश्य खतरों को भाँपने का सिक्स-सेंस सायद ही… अन्य किसी प्राणी में हो… घोडा काफी दूर से खतरे को भाँप कर … रुक जाता है… और आगे नहीं बढ़ता… कहानियों में सुना होगा… ये सत्य है।। ऐसी कई विचित्र.. शक्तियों से सम्पन्न होता है… घोडा (हौर्स) जो लिखना भी संभव नहीं है।

आखिर घोडा में ऐसा क्या है जो ये शक्तियां प्राप्त हैं उसको…
प्रत्येक प्राणी में … शरीर के बाहर भी एक… तरंगों का आवरण होता है… जिसे हम.. वाडी लैस वाडी-पावर… या ओज (ओरा शक्ती) के नाम से जानते है ।। और ये ही आवरण प्राणी-मात्र को ईश्वरीय शक्ती के रूप में…ब्रह्मांडीय ऊर्जा(कास्मिक एनर्जी) को ग्रहण करके कार्य-क्षमता का विकास करते हुऐ…. नकारात्मक (नेगेटिव)… ऊर्जाओं से रक्षा करता है…. और हमारी ऊर्जा को नष्ट होने से बचाता है।।… ये वाडी लैस वाडी पावर घोडे में सबसे अधिक पाई जाती है… इसीलिऐ घोडा अतभुत और ना थकने वाला प्राणी है।।

सायद आप HP (हौर्स-पावर) का रहस्य समझ गये होंगे।।

2- अब हम समझते है… घोडे नाल का रहस्य…

शरीर के चारौ-ओर बने … तरंगों के आवरण का निर्माण हमारे तन से निकली विषेस तरंगें ही करती… कैसे:-

जब भी कोई .. जप, तप, योग, ध्यान या व्यायाम की क्रियाऐं करता है… तो हमारे शरीर के विधुतीकरण की प्रक्रिया तेज होने लगती है.. और विषेश प्रकार की विधुत-रश्मियाँ हमारे कुछ अंगों जिसमे पैर नाखूनों से सबसे ज्यादा… बाहर की ओर तेजी से प्रवाहित होती हैं… और हमारे ही कुछ अंग चुम्बकीय तरीके से … उन तरंगौं को आकर्षित करके .. अपनी ओर खींचकर … फिर शरीर में ही अवशोषित कर लेते हैं… इस पूरी प्रकिया में… ये तरंगों की काफी ऊर्जा.. नष्ट भी होती रहती है।… घोडा में ये क्रिया सर्वाधिक होती है.. जब वो तेजी से दौडता है… तो ये तरंगें.. तेजी से उसके पैरों से… निकलने की कोशिश करती है… “और वहाँ पर लगी लोहे की नाल.. दौडने के कारण जमीन के धर्षण से चुम्बक के रूप में परिवर्तित होकर… इन तरंगों को अवसोसित करती रहती है… और घोडे से प्राप्त असीमित एवं अदभुत शक्तियों का भंडार बनकर… ब्रह्मांडीय ऊर्जा (कौस्मिक-एनर्जी)… को आकर्सित करने की अकूत और अदभूत शक्ती का भंडारण करने की क्षमता पा लेती है….. “घोडे की नाल”…।। और हमारे मानव शरीर या वातावरण में ब्रह्मांडीय-शक्ती को प्रदाय करने में सर्वाधिक सहयोगी होती है।।… *यही है घोडे की नाल की चमत्कारी शक्ती का वैज्ञानिक रहस्य… जो हमारे प्राचीन महिर्षियों ने सदियों पहले ही… समझ लिया था.. और काले घोडे की नाल… का उपयोग… मानव को नकारात्मक ऊर्जाऔं से बचाने… एवं शक्ती-सम्पन्न बनाऐ रखने के लिऐ… एक तंत्र के रूप में… करना सुरू कर दिया था।।

कुछ सावधानियां नाल को सही उपयोगी… बनाए रखने के लिऐ …

घोडे की नाल से… छल्ला(रिंग) अथवा कोई भी सामग्री निर्माण के समय साधारण अग्नी से गर्म नहीं करना चाहिऐ… बरना उसकी… चुम्बकीय शक्ती नष्ट हो जाती है और सिर्फ लोहा (आयरन) ही बचता है।।
नाल या इससे निर्मित सामान को … भूलकर भी कभी चुम्बक के पास नहीं.. रखना चाहिए… बरना इसकी मूल शक्ती क्षीण हो जाती है।।

इससे सामग्री निर्माण का सही तरीका और समय
जब भी काले घोडे की नाल से छल्ला, यंत्र, कीलें आदि बनानी हो…. तो
शनिवार को.. शनि-नक्षत्र में…. शनीयज्ञ की.. समस्त औषधियों की सम्मिधा व हवन-सामग्री और काली गौ के सूखे गोवर.. शनि मंत्रों से हवन करके…. उस में ही गर्म करके ही…. निर्माण करना चाहिऐ…. तभी इनका सही लाभ प्राप्त होगा…. और चमत्कारी शनिरिंग या सामान तैयार होगा।।

इस तरह तैयार घोडे की नाल, कीलें, या रिंग के लाभ

शनिदेव के अशुभ प्रभावों की शांति हेतु लोहा धारण किया जाता है किन्तु यह लौह मुद्रिका सामान्य लोहे की नहीं बनाई जाती

काले घोडे की नाल (घोडे के पैरों खुरों में लोहे की अर्धचन्द्राकार वस्तु पहनाई जाती है, जो घोडे के खुरों को मजबूत बनाये रखती है, घिसने नहीं देती, वही नाल होती है), जो नाल स्वत: ही घोडे के पैरों से निकल गयी हो या दो तिहाई से अधिक घिस गयी हो,…. उस नाल को शनिवार को सिद्घ योग ( शनिवार और पुष्य, रोहिणी, श्रवण नक्षत्र हो अथवा चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी तिथि हो) में प्राप्त की जाती है और फिर इसका उपयोग विविध प्रकार से किया जाता है.

इसके कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं

यदि घर में क्लेश रहता हो, आर्थिक उन्नति नहीं हो रही हो या किसी ने तंत्र क्रिया की हो तो घर के मुख्य द्वार पर नाल को अंग्रेजी के U अक्षर के आकार में लगा दें। कुछ ही दिनों में नाल के प्रभाव से सब कुछ ठीक हो जाएगा।

यदि किसी कार्य में अड़चन आ रही हो तो शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल को विधिपूर्वक दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर लें।

आपके बिगड़े काम बन जाएंगे और साथ ही धन लाभ भी होगा।

काले वस्त्र में लपेट कर अनाज में रख दो तो अनाज में वृद्धि हो |

काले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रख दो तो धन में वृद्धि हो |

अंगूठी या छल्ला बनाकर दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली मे धारण करे तो शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिले एवं तरक्की होगी रुके काम बनने लगेंगे।।|

द्वार पर सीधा लगाये तो दैवीय कृपा मिले |

द्वार पर उल्टा लगाओ तो भूत, प्रेत, या किसी भी तंत्र मंत्र से बचाव हो जाता है।।

काले घोड़े की नाल से एक-एक कील सवा किलो उरद की दाल में … 7 शनिवार.. रख कर एक नारियल के साथ जल में प्रवाहित करे… शनि-जनित सभी बाधाऐं दूर होंगी।।

यदि दुकान ठीक से नहीं चल रही हो या किसी ने दुकान पर तंत्र प्रयोग कर उसे बांध दिया हो तो दुकान के मुख्य द्वार की चौखट पर नाल को अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में लगा दें। आपकी दुकान में ग्राहकों की संख्या बढऩे लगेगी और परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी।

यदि घर में क्लेश रहता हो, आर्थिक उन्नति नहीं हो रही हो या किसी ने तंत्र क्रिया की हो तो घर के मुख्य द्वार पर नाल को अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में लगा दें। कुछ ही दिनों में नाल के प्रभाव से सबकुछ ठीक हो जाएगा।

यदि किसी कार्य में अड़चन आ रही हो तो शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल से बनी रिंग (छल्ला ) विधिपूर्वक दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर लें। आपके बिगड़े काम बन जाएंगे और साथ ही धन लाभ भी होता है।

काले घोड़े की नाल की चार कीलें शनि पीड़ित व्यक्ति के घर के चारो कोने पे लगायें घर की नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होगा।।

काले घोड़े की नाल से एक कील या छल्ला …शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर कर है छल्ला या कील दाल कर अपना मुख देखे और पीपल के पेड़ के नीचे रख दें 7शनिवार करने से शनि जनित-रोग और ऊपरी बाधाऐं दूर हो जाती हैं।।।

व्यापार वृद्घि के लिए घोडे की नाल को या रिंग को सिन्दूर लगाकर… दुकान या औफिस में… ऐसी जगह टांग दे… जहाँ से… आने-जाने वालों को दिखाई दे… ग्राहकों संख्या और आवक बढंती है।।

फैक्ट्री, कारखाने आदि निर्माण जैसे स्थानों पर… प्रत्येक रूम के.. चारौ कोंनौ में एक -एक कील … तथा मैन गेट पर नाल लगा देने से … कारखाने में .. सकारात्मक ऊर्जा के कारण कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ती है…. प्रोडक्शन बढ़ जाता है।।

27 शनिवार तक हनुमान जी के मन्दिर में काले घोडे की नाल की…. *कील+कालेउर्द+कालेतिल+नारियल+सिन्दूर+चमेली का तेल…. चढाकर प्रार्थना करने से…. सभी प्रकार के शत्रु, कर्ज, रोग, और भय दूर हो जाते हैं।।

इसका छल्ला या कील -गोमती चक्र- नीबू- कालेउर्द-कालेतिल- नारियल-सवा रुपया-..7 लोंग- और काली हल्दी….. ये सारी वस्तुऐं… मंगलवार या शनिवार के दिन… काले कपडे मे बाँधकर… द्वार पर लटकाने से….. उस घर या स्थान की… सभी प्रेतादि.. बाधाऐं तथा ग्रह बाधाऐं दूर हो जाती हैं…. नकारात्मक ऊर्जा पूर्ण नष्ट हो जाती है….. सभी क्लेश दूर हो जाते हैं…. उन्नति के मार्ग सवतः खुलने लगतेहैं…. रुके हुऐ काम बनने लगते है….।।

नाल से निर्मित… एक रिंग पर्स या तिजोरी में रखने से… धन की कमी नहीं आती… और उन्नति होती है।।

घोडे की नाल का रिंग और चाँदी मे मोती पहनने से… मानसिक कमजोरी दूर होकर मेमोरी और मेघा शक्ती बढ.ती है।।… विध्यार्थी और मानसिक कार्य करने वालों को अदभुत लाभ होता है।।मानसिक रोग तथा ब्लड-प्रेशर या हार्ट के मरीजों को बहुत लाभ होता है

विद्यार्थीयो के लिए छहमुखी रुद्राक्ष

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