Similar Posts
भगवान शिव परिवार | shivji ka parivar
भगवान शिव परिवार | Shivji ka Parivar | शिवजी कि पाच कन्या | 5 shivji ki kanya. भगवान शिव के परिवार की बात जब भी आती है तो सबसे पहले मुंह पर श्री गणेश और कार्तिकेय जी का नाम आता है। ऐसे में आज हम आपको भगवान शिव की पांच पुत्रियों के बारे में बताने…
Dhan Prapti
Dhan Prapti | धन प्राप्ती केलीय राशी के अनुसार उपाय | कैसे मिलेगा धन इन उपायोसे? Dhan Prapti | धन प्राप्ती केलीय राशी के अनुसार उपाय | कैसे मिलेगा धन इन उपायोसे? ✅मेष राशि :- 1- रात में लाल चंदन और केसर घिसकर उससे रंगा हुआ सफेद कपड़ा यदि आप अपने गल्ले अथवा तिजोरी में…
आषाढ़ अमावस्या 2025: कैसे करें तर्पण और कौन से मंत्र दिलाएंगे पितृ दोष से छुटकारा? Amavasya 2025
आषाढ़ अमावस्या 2025: कैसे करें तर्पण और कौन से मंत्र दिलाएंगे पितृ दोष से छुटकारा? Ashadha Amavasya 2025 आषाढ़ अमावस्या 2025: कैसे करें तर्पण और कौन से मंत्र दिलाएंगे पितृ दोष से छुटकारा?जून 25, 2025 vedashree jyotish Amavasya हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह में आने वाली अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या के नाम से…
श्री रुद्राष्टकम् | Rudrashtakam महादेव जिकी स्तुती
श्री रुद्राष्टकम् | Rudrashtakam महादेव जिकी स्तुती ॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥निराकारमोंकारमूलं तुरीयंगिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालंगुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरंमनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शंकरं…
Madhurastakam | मधुराष्टकं
श्री कृष्ण भगवान अति प्रिय स्तोत्र | अष्टक मधुराष्टक | मधुराष्टकम Madhurastakam अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं, गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखiलं मधुरम् ।।१।। वसनं मधुरं, चरितं मधुरं, वचनं मधुरं वलितं मधुरम्,चलितं मधुरं, भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्।।२।। वेणर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ,नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।३।। गीतं मधुरं पीतं मधुरं,…
मंगल यंत्र
मंगल ग्रह के अशुभ होने से रक्तचाप, रक्त विकार, खुजली, फोड़ा-फुसी, रक्तसाव कुष्ठ रोग, आकस्मिक दुर्घटना जन्य रोग, अग्नि भय, गुप्त रोग, सूजन, वात, पित्त संबंधी रोग होते हैं
