Rahu Grah : राहू स्तोत्र का पाठ करने से मिलेंगी आपके मन को शांति |

यदि आपके जीवन में अशांति है तो करिये राहू स्तोत्र का पाठ मिलेंगी आपके मन को शांति | जिंके जीवन मे Desigen नही ले पारहे होतो ओर अनेक संकट से घीरे होतो ये राहू ग्रह आपके जीवन मे अशुभ फल देता है |

राहु के शुभ बनाम अशुभ फल

स्थितिशुभ फलअशुभ फल
शुभ ग्रहों के साथ युतिसफलता, नेतृत्व क्षमता, नवीनता, विदेश से लाभ
पाप ग्रहों के साथ युतिमानसिक तनाव, विवाद, असफलता
सूर्य के साथराजनीति/प्रशासन में सफलताअहंकार, सत्ता संघर्ष
चंद्र के साथकल्पनाशक्ति, कला में सफलतामानसिक भ्रम, अस्थिरता
शनि के साथअनुशासन, गहरी सोचमानसिक द्वंद, अवसाद

राहु स्तोत्र / Rahu Stotra

राहुर्दानवमंत्री च सिंहिकाचित्तनन्दन:। अर्धकाय: सदा क्रोधी चन्द्रादित्य विमर्दन: ।।1।।

रौद्रो रूद्रप्रियो दैत्य: स्वर्भानु र्भानुभीतिद:। ग्रहराज सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुक: ।।2।।

कालदृष्टि: कालरूप: श्री कण्ठह्रदयाश्रय:। बिधुंतुद: सैंहिकेयो घोररूपो महाबल: ।।3।।

ग्रहपीड़ाकरो दंष्टो रक्तनेत्रो महोदर:। पंचविंशति नामानि स्म्रत्वा राहुं सदानर: ।।4।।

य: पठेन्महती पीड़ा तस्य नश्यति केवलम्। आरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ।।5।।

ददाति राहुस्तस्मै य: पठेत स्तोत्र मुत्तमम्। सततं पठेत यस्तु जीवेद्वर्षशतं नर: ।।6।।

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