जानिए आपकी कुंडली मे सूर्य भगवान का किस भाव मे है |
सूर्य आपके कुंडलीसे कैसे प्रभावित करते है ?
स्वभाव
चतुर्थ स्थान में सूर्य का प्रभाव से’जातक बुद्धिमान एवं अच्छी स्मरण शक्तिवाला होता है। जातक प्रवासी होता है । जातक प्रसिद्ध, कठोर और गुप्त विद्या में रूचि रखने वाला होता है।
पूर्ण दृष्टी
चतुर्थ स्थान पर स्थित सूर्य की पूर्ण दृष्टि दशम स्थान पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक राजमान्य होता है एवं उच्चपद को प्राप्त करने वाला होता है। जातक अपने कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।
मित्र / शत्रु राशि
स्व, उच्च व मित्र राशि में सूर्य चतुर्थ भाव में होने पर जातक कला प्रिय, पारिवारिक सुखों को प्राप्त करने वाला, राजमान्य और प्रसिद्ध होता है। शत्रु व नीच राशि में चतुर्थ भाव में स्थित होने पर सूर्य से जातक को माता पिता के सुख में न्यूनता होती है। जातक को किराये के मकान में रहना पड़ता है । व्यर्थ के कार्य में जातक का धन नष्ट होता है।
भाव विशेष
चतुर्थ भाव में स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक को जमीन, मकान एवं वाहन से सुख में न्यूनता आती है। जातक की माता को भी कष्ट होता है। जातक राजमान्य से सफलता प्राप्त होता है एवं अपने कार्य पक्ष की ओर करता है। चतुर्थ स्थान में स्थित सूर्य जातक के सुख को कम करते हुए जातक को चिंताग्रस्त बनाता है।
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