Shubh Vivah Muhurat 2026: A Complete Guide to Auspicious Wedding Dates
शुभ विवाह मुहूर्त 2026: विवाह के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका
विवाह हिंदू परंपरा में सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है, और इसीलिए सही मुहूर्त में विवाह करना अत्यंत शुभ माना जाता है। हर साल पंचांग के अनुसार कुछ निश्चित तिथियां विवाह के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं। Shubh Vivah Muhurat 2026 — Complete Guide
शुभ विवाह मुहूर्त 2026
| महीना | प्रमुख तिथियाँ |
|---|---|
| अगस्त 2026 | कोई शुभ मुहूर्त नहीं (अधिक मास/चातुर्मास प्रभाव) |
| सितंबर 2026 | कोई शुभ मुहूर्त नहीं |
| अक्टूबर 2026 | कोई शुभ मुहूर्त नहीं |
| नवंबर 2026 | 21, 24, 25, 26 |
| दिसंबर 2026 | 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 |
नोट: विशेष स्थानीय गणना के लिए संपर्क करें।
विवाह मुहूर्त कैसे तय किया जाता है?
विवाह मुहूर्त तय करते समय कई बातों का ध्यान रखा जाता है — शुक्र और गुरु ग्रह का उदय अवस्था में होना, चंद्रमा की शुभ स्थिति, नक्षत्र, तिथि और वर-वधू दोनों की कुंडली का तालमेल। इसके अलावा चातुर्मास (देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक) के दौरान सामान्यतः विवाह नहीं किए जाते, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं।
2026 में विवाह के लिए अनुकूल महीने
सामान्य पंचांग परंपरा के अनुसार जनवरी-फरवरी, अप्रैल-जून, और नवंबर-दिसंबर के महीनों में विवाह मुहूर्त अधिक संख्या में आते हैं, बशर्ते गुरु व शुक्र अस्त न हों। सटीक तिथि, नक्षत्र और समय हर साल बदलते हैं, इसलिए यहां पर निश्चित तारीखों की जगह नीचे दी गई टेबल में Guruji द्वारा सत्यापित सटीक मुहूर्त सूची डालें (यह जगह टेम्पलेट के रूप में छोड़ी गई है)।
विवाह मुहूर्त चुनते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- वर और वधू दोनों की जन्म कुंडली का मुहूर्त से मेल होना ज़रूरी है
- गुरु और शुक्र अस्त होने पर विवाह नहीं करना चाहिए
- मलमास और चातुर्मास के दौरान विवाह वर्जित है
- स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त और स्थान अनुसार मुहूर्त थोड़ा बदल सकता है
अपनी और अपने होने वाले जीवनसाथी की जन्म तिथि, समय और स्थान भेजें — Guruji आपके लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे शुभ विवाह मुहूर्त निकाल कर देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. विवाह के लिए शुभ मुहूर्त क्यों जरूरी है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ मुहूर्त में विवाह करने से ग्रहों की अनुकूल स्थिति प्राप्त होती है, जिससे वर-वधू के बीच आपसी प्रेम, समझ और तालमेल बना रहता है। यह उनके भावी जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद करता है।
2. मुहूर्त निकालने के लिए किन चीजों पर विचार किया जाता है? मुहूर्त निकालते समय मुख्य रूप से पंचांग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण), वर और वधू की जन्म कुंडली, गुरु और शुक्र ग्रह की स्थिति (तारा डूबना/उदित होना) और विवाह के महीने (खरमास या अधिक मास तो नहीं) को ध्यान में रखा जाता है।
3. क्या बिना मुहूर्त के विवाह किया जा सकता है? हिंदू परंपरा में विवाह के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों (जैसे आपातकाल) में विद्वान ब्राह्मणों के परामर्श से प्रायश्चित या विशेष विधि-विधान के साथ कार्य किया जा सकता है, लेकिन सामान्यतः शुभ मुहूर्त में ही विवाह करना श्रेष्ठ माना जाता है।
4. शुक्र और गुरु का अस्त होना विवाह में क्यों वर्जित है? ज्योतिष में शुक्र को दांपत्य सुख और गुरु को जीव-कारक (संतान और सौभाग्य) माना गया है। जब ये ग्रह अस्त होते हैं, तो वे अपनी शुभ शक्ति खो देते हैं, इसलिए इस दौरान विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
5. विवाह के लिए सबसे उत्तम महीने कौन से होते हैं? सामान्यतः माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ के कुछ भाग को विवाह के लिए पंचांग के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है। हालांकि, यह हर साल ग्रहों की स्थिति के आधार पर बदलता रहता है।
क्या आप आने वाले किसी विशेष महीने या वर्ष के शुभ मुहूर्त के बारे में अधिक जानकारी जानना चाहेंगे?
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