Kundali Matching Ka Keli Jate

Kapoor Ka Upay | कपूर से आश्चर्यजनक उपाय क्या हैं ?

Kundali matching ka keli jate वर वधुच्या कुण्डली जुळविण्यासाठी दहा विधिंचा प्रयोग?

Kundali matching वर वधुच्या कुण्डली जुळविण्यासाठी दहा विधिंचा प्रयोग केला जातो। त्या पैकी कमित कमी पाच फळ शुभ असल्याने कुण्डलींमध्ये परस्पर मेळ मानला जातो।

1. दिनम् (भाग्य)
वर-वधु चा जन्म नक्षत्र एक सारखा आहे।

2. गणम् (सम्पत्ति)
वर-वधु चे गणम् एक सारखे आहे। हे अनुरुपतेला दर्शवितात। हे अति उत्तम आहे। गणम्च्या अनुरुपते पासून धन प्राप्ति होते।

3. महेन्द्रम् (पारस्परिक प्रेम)
वर चा जन्म नक्षत्र वधु चा जन्म नक्षत्रापासून अशुभ स्थानात आहे। कुटुंबात सुख शांति ची कमि राहील। पारस्परिक सम्बन्धात प्रेमाची कमि राहील।

4. स्त्रीदीर्घम् (साधरण शुभत्व)
वर चा नक्षत्र वधुचा 13व्या नक्षत्रापूर्वी असल्याने मेळ अशुभ आहे। विवाहोपरांत कुशळतेत कमि होईल।

5. योनि (सैक्स सम्बन्ध)
योनि एक सारखी असल्यामुळे मेळ उत्तम आहे। संतति प्राप्तित कोणतीहि बाधा होणार नाही।

7. राश्याधिपति (धन धान्य)
वर वधुची चन्द्र राशिच्या राशीस्वामी पारस्परिक मित्र असल्यामुळे शुभ आहे आणि कुटुंबात सम्पन्नता होईल।

8. वश्य (संतति)
वर वधुच्या चन्द्र राशित पारस्परिक मेळ नसल्यामुळे दोघात सामंजस्यामध्ये कमि होवू शकते। या मेळ पासून वंशात वृद्धि होत नाही।

9. रज्जु (वैवाहिक दीर्घता)
वर-वधु दोघांचे नक्षत्र शिरो रज्जु मध्ये असल्यामुळे वरला शारीरिक कष्ट होवू शकते आणि वैवाहिक जीवनात आनन्दाची कमि होईल।

10. वेध (पुत्र प्राप्ति)
वर-वधुचा नक्षत्रांमध्ये पारस्परिक मित्रता असल्यामुळे मेळ शुभ आहे। संतति प्राप्तित बाधा होणार नाही।

इतर विचारणीय गोष्टी

1. लिंग
स्त्री-पुरुषचे नक्षत्र स्त्री-स्त्री असल्यामुळे मेळ सम आहे।

2. गोत्र
वर-वधुचे गोत्र एकच असल्यामुळे मेळ अशुभ आहे।

3. वर्ण
वर-वधुंच्या रााशिंच्या वर्णात पारस्परिक मेळ असल्यामुळे शुभ आहे।

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