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पित्त दोष: Pitta dosh लक्षण, रोग और इसे संतुलित रखने के आसान उपाय

पित्त दोष क्या है? Pitta dosh

पित्त दोष ‘अग्नि’ और ‘जल’ इन दो तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है। शरीर की गर्मी जैसे कि शरीर का तापमान, पाचक अग्नि जैसी चीजें पित्त द्वारा ही नियंत्रित होती हैं। पित्त का संतुलित अवस्था में होना अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। शरीर में पेट और छोटी आंत में पित्त प्रमुखता से पाया जाता है। Pitta dosh

ऐसे लोग पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कि कब्ज़, अपच, एसिडिटी आदि से पीड़ित रहते हैं। पित्त दोष के असंतुलित होते ही पाचक अग्नि कमजोर पड़ने लगती है और खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं  पाता है। पित्त दोष के कारण उत्साह में कमी होने लगती है साथ ही ह्रदय और फेफड़ों में कफ इकठ्ठा होने लगता है। इस लेख में हम आपको पित्त दोष के लक्षण, प्रकृति, गुण और इसे संतुलित रखने के उपाय बता रहे हैं।

पित्त नाशक प्रयोग, जिन्हें पित्त ज़्यादा बनता है, गले में, छाती में, पेशाब में जलन होती है, उनके लिए यह औषधि बहुत ही लाभदायक है। यह औषधि का उपयोग आप यदि करते हो तो इस पित्त से राहत मिलेगी।

पित्त के प्रकार : Pitta dosh 

शरीर में इनके निवास स्थानों और अलग कामों के आधार पर पित्त को पांच भांगों में बांटा गया है.

  • पाचक पित्त pitta
  • रज्जक पित्त
  • साधक पित्त
  • आलोचक पित्त
  • भ्राजक पित्त

केवल पित्त के प्रकोप से होने वाले रोगों की संख्या 40 मानी गई है।

पित्त क्यों होता है?

पित्त होने के अनेक कारण हो सकते हैं, लेकिन पित्त ज़्यादातर अपचन के कारण होता है या कभी ज़्यादा खाने की वजह से होता है। यह पित्त होने के कारण से आपको आपका पेट साफ नहीं होता है और आपको जलन सी महसूस होती है। यदि इसका सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह बढ़ भी सकता है।

इसलिए हम यहाँ पर बता रहे हैं कि क्या औषधियाँ “रावण संहिता” में दी गई हैं। इससे आपको किस तरह से राहत मिलेगी और यह औषधि किस तरह से आपको लेनी है।

पित्त कि रावण ने बताई हुई औषधी

यह औषधि इस तरह से है: तीन चम्मच धनिया शुद्ध पीसा हुआ, शक्कर की मात्रा के साथ दिन में तीन बार आवश्यकता अनुसार पानी के साथ प्रयोग करने से पित्त ज़्यादा बनना या रुक जाना यह जल्द से जल्द संभव हो पाएगा।

धनिया अत्यंत शुद्ध और अच्छे तरीके से पीसकर भी ले सकते हो और धनिया को आप हाथ में रगड़कर शक्कर के साथ पानी में डालकर भी ले सकते हो।

गोदंती भस्म, प्रवाल भस्म, गिलोय सत्व आदि मिलाकर उक्त दवा का अगर प्रयोग करें तो अति शीघ्र लाभ होगा। यदि यह भस्म धनिया और शक्कर के साथ मिक्स करके लें, तो निश्चित ही इसका लाभ आपको मिल पाएगा।

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