|

Married Life

vivaha marriage

Married Life | वैवाहिक सुख जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रहता है तो क्यों और कब ठीक होगा |

Married Life | Life partner | जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रहता है तो क्यों और कब ठीक होगा आज इसी विषय पर बात करते है। वैवाहिक जीवन सुख और विवाह सुख यह पति पत्नी के आपसी सहयोग से ही एक दूसरे को मिलता है। कभी कभी ऐसी स्थिति जीवन मे बन जाती है कि जीवनसाथी (पति या पत्नी) का स्वास्थ्य खराब रहने के कारण विवाह सुख और वैवाहिक जीवन के सुख में कमी रहती है जिससे वैवाहिक जीवन भी थोड़ा नीरस का ही रहता है। अब समझते है कब जीवनसाथी के स्वास्थ्य में दिक्कत के कारण वैवाहिक जीवन सुख में कमी बनी रहती है और कैसे जीवनसाथी का स्वास्थ्य अच्छा होगा। कुंडली का 7वां भाव और इस भाव का स्वामी जीवनसाथी और हमारे वैवाहिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। जब भी सप्तमेश (सातवें भाव के (स्वामी) पर या सातवे भाव पर छठे या आठवे भाव के स्वामी या इन भाव का प्रभाव होगा और किसी न किसी एक पाप क्रूर ग्रह जैसे शनि मंगल राहु या केतु का प्रभाव होगा तब जीवनसाथी के स्वाथ्य में कमी और शारिरिक या मानसिक स्वास्थ्य खराब रहेगा क्योंकि छठा भाव रोग, बीमारी का है तो आठवां भाव बड़े स्तर के स्वास्थ्य में गिरावट मतलब सुखों में बिघ्नो का है। यदि सप्तमेश (सातवे भाव का स्वामी) छठे या आठवे या पाप ग्रहों के द्वारा पीड़ित करने वाले ग्रहों से ज्यादा बलवान होगा साथ ही सातवे भाव या सप्तमेश पर शुभ ग्रहों जैसे शुभ गुरु शुक्र‘ या शुभ बुध, बली चंद्रमा प्रभाव होगा तब शुभ ग्रहदशाये लगते ही + उपाय से जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक जरूर हो जाएगा क्योंकि शुभ ग्रहों के अंदर शुभ ताकत होती है जिस कारण इनका प्रभाव सातवे भाव या सप्तमेश पर जीवनसाथी को स्वास्थ्य को लेकर बलवान करेगा, लेकिन शुभ ग्रह छठे या आठवे भाव स्वामी होने पर स्वाथ्य लाभ नहीं देंगे ऐसे में उपाय स्वास्थ्य को जीवनसाथी के अच्छा करेंगे केवल ।

0b45d64b6ccf681db196ab37bbe5b271-removebg-preview-min

इसे इस प्रकार से समझे | कैसे मेष (mesh) लग्न की जन्मकुंडली मे शुक्र सप्तमेश होता है साथ ही यहाँ छठे भाव का स्वामी बुध बनता है अब शुक्र कमजोर होकर बुध के साथ बैठे जैसे शुक्र बुध यहाँ छठे भाव ही बैठ जाये और राहु केतु या शनि की शुक्र बुध युति पर पड़े तब जीवनसाथी का स्वास्थ्य कमजोर रहेगा बार बार दवाइयों में पैसा खर्च होता रहेगा । मिथुन लग्न की जन्मकुंडली में सप्तमेश गुरु होता है साथ ही छठे भाव का स्वामी मंगल होता है अब यहाँ जीवनसाथी स्वामी गुरु + रोग बीमारी स्वामी मंगल एक साथ सम्बन्ध में हो और गुरु के ऊपर यहां राहु केतु या शनि की दृष्टि हो या साथ बैठे हो या यह शनि या राहु केतु में से कोई एक सातवे भाव मे हो तब यहां जीवनसाथी के स्वास्थ्य में दिक्कत बनी रहेगी ।।

अब समझते है कब जीवनसाथी स्वास्थ्य कब जल्दी ठीक हो जाता है। Married Life

कुंभ लग्न में जैसे सप्तमेश सूर्य होता है और यहाँ छठे भाव का स्वामी चन्द्रमा बनता है अब यहाँ सूर्य चन्द्रमा एक साथ सम्बन्ध बनाकर बैठे और दोनों ही शनि या राहु केतु या मंगल से पीड़ित हो जाये लेकिन अब यही इसी सप्तमेश सूर्य के साथ गुरु शुक्र का भी सबंध हो और सूर्य गुरु शुक्र तीनो बलवान हो तब जीवनसाथी का स्वास्थ्य शुभ ग्रह दशाओं में स्वयम अच्छा हो जाता है। जबकि शुभ प्रभाव कम मात्रा में होगा तब उपचार और उपाय आदि से ही स्वास्थ्य अच्छा जल्दी हो पाता है। इस तरह यदि वैवाहिक जीवन मे जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कमी या दिक्कत के कारण वैवाहिक जीवन सुख में कमी हो रही है या जीवनसाथी स्वास्थ्य कब ठीक हो पायेगा और कैसी स्वास्थ्य की स्थिति रहेगी ? यह सब आपकी कुंडली सातवे भाव / सप्तमेश की स्थिति या स्वयंम जीवन साथी की कुंडली पर निर्भर करेगा ।।

Similar Posts

  • What is the difference between astronomy and astrology | खगोल विज्ञान और ज्योतिष

    खगोल विज्ञान और ज्योतिष में क्या अंतर है? इन दोनों शब्दों को अक्सर एक दूसरे से मिला दिया जाता है, लेकिन वे वास्तव में अलग-अलग चीजें हैं। जबकि दोनों ग्रहों और अन्य खगोलीय वस्तुओं से संबंधित हैं, खगोल विज्ञान एक वैज्ञानिक अनुशासन है, जबकि ज्योतिष एक भविष्यवाणी विश्वास प्रणाली है। खगोल विज्ञान अंतरिक्ष में वस्तुओं…

  • Satynarayan Vrat Katha

    Satynarayan Vrat Katha ॥ श्री सत्यनारायण व्रत कथा ॥ ॥ श्री सत्यनारायण व्रत कथा ॥ Satynarayan Vrat Katha ॥ श्री सत्यनारायण व्रत कथा ॥ भगवान श्री सत्यनारायण भगवान को प्रसन्न करने केलिए , बंधनसे मुकत्ती, विवाह योग केलिए,श्री सत्यनारायण भगवान की हर month मे पोरणिमा के दिन श्री सत्यनारायण जी की पूजा करनी चाहिए |…

  • Mahabharat

    Mahabharat महाभारतात असे म्हंटले आहे की सुमारे ८०% मनुष्यबळ युद्धाच्या अठराव्या दिवशी मृत्युमुखी पडले होते. जेव्हा युद्ध संपले तेव्हा संजय युद्ध झाले तिथे म्हणजेच कुरुक्षेत्राच्या मैदानात आला. त्याचा मनात शंका आलेली होती की हे युद्ध खरंच झाले आहे का? खरंच एवढा मोठा नरसंहार झालेला आहे का? ती हिच जागा आहे का जिथे सामर्थ्यवान पांडव आणि भगवान श्रीकृष्ण उभे होते? ही तीच जागा आहे का जिथे श्रीमद् भगवत गीता सांगितली गेली?

  • मिथुन राशी 2023 | Mithun Rashi

    Mithun Rashi | मिथुन राशीसाठी 2023 कसे असेल. चैत्रः- रविगुरु शुभयोगाचा उत्तम लाभ उठवाल. पूर्वार्ध नोकरी व्यवसायात छानच. पौर्णिमा पुत्रोत्कर्षाची. उत्तरार्ध आर्थिक व्यवहारांतून फसगतीचा. जगार टाळा. अमावास्येजवळ वाहन सांभाळा. गर्भवतींनी सांभाळा. वैशाख:- राशीतील शुक्रभ्रमण उत्तरार्धात सर्वार्थाने फलदायी. जनसंपर्कातून लाभ. व्यावसायिक उत्सव प्रदर्शने. नोकरीच्या मुलाखतींतून यश. सरकारी कामे. उत्तरार्धात जुगार नको. उधारउसनवारी जपा. ज्येष्ठ:- ग्रहांचे फील्ड…

  • Holi 2021 | होळी २०२१

    प्रदोषकाल व्यापिनी घ्यावी. होलिकादहन हे पौर्णिमातिथी असताना Holi 2021 दिनांक २८ मार्च रोजी प्रदोषकालातच भद्रा संपल्यावर (सायं.६.४४ ते रा.९.०८ प.) करावे.