मंगल यंत्र

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कुंडली में है मंगल दोष होतो यह यंत्र आपके कुंडली का दोष दूर कर सकता है !

मंगल यंत्र आपके जीवन मे क्या बदलाव लासक्त है

मंगल यंत्र

मंगल ग्रह के अशुभ होने से रक्तचाप, रक्त विकार, खुजली, फोड़ा-फुसी, रक्तसाव कुष्ठ रोग, आकस्मिक दुर्घटना जन्य रोग, अग्नि भय, गुप्त रोग, सूजन, वात, पित्त संबंधी रोग होते हैं।

श्री मंगलयन्त्रम्

मंगल यंत्र

कार्य सफल होगा या नहीं ऐसी भावनायें बार-बार मन में उठती है। कई बार कार्य असफल भी होते हैं। ऐसे कार्यों को निर्धारित करते समय में बिना किसी परेशानी के सफलता पाने के लिए यह यंत्र अत्यन्त उपयोगी है। व्यापार, विदेश गमन, राजनीति, गृहस्थ जीवन, नौकरी पेशा आदि में इस यंत्र का उपयोग करने से सुख एवं समृद्धि प्राप्त होती है।

मंगल यंत्र

जब वाहन, मकान, नौकरों से कोई न कोई तकलीफ रहती हो व्यापार व्यवसाय में भयानक उतार-चढ़ाव आते हो तथा घाटा होता हो तो ऐसी स्थिति में व्यापारिक एवं व्यवसायिक स्थिति अनुकूल होने के लिए इस यंत्र की पूजा उपासना करना उचित होगा। अथक परिश्रम करने के बाद भी बाछित सफलता जिन्हें नहीं मिलती तथा कार्यों में असफलता मिलती है। बार-बार अपयश का सामना होता है तो ऐसी स्थिति में यह यंत्र अत्यन्त लाभकारी है। इस यंत्र के सम्मुख सिद्धि विनायक मंत्र का जप करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है तथा आकरण हुये अपमान का शत्रु प्रायश्चित करता है और जीवनपर्यन्त सम्मान प्रदान करता है।

मंत्र : ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।

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मंगल यंत्र

मंगल ग्रह के अशुभ होने से रक्तचाप, रक्त विकार, खुजली, फोड़ा-फुसी, रक्तसाव कुष्ठ रोग, आकस्मिक दुर्घटना जन्य रोग, अग्नि भय, गुप्त रोग, सूजन, वात, पित्त संबंधी रोग होते हैं।

श्री मंगलयन्त्रम्

मंगल यंत्र

कार्य सफल होगा या नहीं ऐसी भावनायें बार-बार मन में उठती है। कई बार कार्य असफल भी होते हैं। ऐसे कार्यों को निर्धारित करते समय में बिना किसी परेशानी के सफलता पाने के लिए यह यंत्र अत्यन्त उपयोगी है। व्यापार, विदेश गमन, राजनीति, गृहस्थ जीवन, नौकरी पेशा आदि में इस यंत्र का उपयोग करने से सुख एवं समृद्धि प्राप्त होती है।

मंगल यंत्र

जब वाहन, मकान, नौकरों से कोई न कोई तकलीफ रहती हो व्यापार व्यवसाय में भयानक उतार-चढ़ाव आते हो तथा घाटा होता हो तो ऐसी स्थिति में व्यापारिक एवं व्यवसायिक स्थिति अनुकूल होने के लिए इस यंत्र की पूजा उपासना करना उचित होगा। अथक परिश्रम करने के बाद भी बाछित सफलता जिन्हें नहीं मिलती तथा कार्यों में असफलता मिलती है। बार-बार अपयश का सामना होता है तो ऐसी स्थिति में यह यंत्र अत्यन्त लाभकारी है। इस यंत्र के सम्मुख सिद्धि विनायक मंत्र का जप करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है तथा आकरण हुये अपमान का शत्रु प्रायश्चित करता है और जीवनपर्यन्त सम्मान प्रदान करता है।

मंत्र : ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।

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